class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

बिना संगठन महामंत्री और प्रभारी के चल रही झारखंड भाजपा

पार्टी विद द डिफरेंस के नाम से जाने जानेवाली भाजपा इन दिनों सचमुच अलग होती जा रही है। झारखंड में भी भाजपा अलग तरीके से चल रही है। संगठन के मेरूदंड कहे जानेवाले पद संगठन महामंत्री का पद तकरीबन दो साल से खाली है। केंद्र के प्रतिनिधि और नीतिगत मामलों में प्रदेश को मार्ग दर्शक के रूप में निर्देशित, सहयोग करनेवाले प्रदेश प्रभारी का पद भी अब खाली हो गया है।

झारखंड भाजपा के संगठन महामंत्री रहे राजेंद्र सिंह दो साल पहले पद छोड़कर बिहार विधानसभा चुनाव में किस्मत आजमाने चले गये। हालांकि वह चुनाव हार गये, लेकिन उनके जाने के बाद केंद्रीय नेतृत्व ने झारखंड में इस पद पर किसी को नियुक्त नहीं किया। बगैर संगठन महामंत्री के ही संगठन चलता रहा। फिर बारी आयी संगठन प्रभारी की।

केंद्र और राज्य के बीच संगठन में सेतु की तरह भूमिका निभानेवाले प्रदेश प्रभारी त्रिवेंद्रम सिंह रावत ने भी एक तरह से झारखंड को गुडबॉय कर दिया। वह उत्तराखंड से आते हैं और इस बार विधानसभा चुनाव में वहां से अपनी किस्मत आजमा रहे हैं।

भाजपा के सांगठनिक ढांचे में संगठन महामंत्री का पद और भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। सिद्धांत में भले ही अध्यक्ष का पद ऊंचा रहता हो, लेकिन दल के अंदर प्रभाव संगठन महामंत्री का ही बढ़कर होता रहा है। परदे के पीछे से संगठन महामंत्री की भूमिका जनसंघ काल से ही कार्यकर्ता समझते रहे हैं। संगठन महामंत्री संघ से आते हैं, इसलिए संगठन में उनकी भूमिका भी कुछ अलग हटकर होती है। कार्यकर्ता संगठन महामंत्री के ही करीब अपने को मानता है। उसके समक्ष अपना सुख-दुख रखता है। लेकिन यहां तो पार्टी कार्यकर्ता टूअर की तरह होकर रह गया है। संगठन और सरकार के बीच तालमेल तो बढ़िया है, लेकिन संगठन का प्रभाव सरकार के सामने फीका है। झारखंड भाजपा के आम कार्यकर्ता केंद्र से आस लगाए बैठे हैं कि झारखंड को कोई संगठन महामंत्री मिले, जो सचमुच पार्टी के साथ-साथ उनका खयाल रखे।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:state bjp runs without mahamantri and prabhari