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झारखंड हाईकोर्ट ने जमशेदपुर गैस लीक मामले में केंद्र और राज्य सरकार से जवाब मांगा

जमशेदपुर में वि‌भिन्न कपिनयों से निकलने वाले गैस का उचित प्रबंधन नहीं होने के मामले पर हाईकोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार से चार सप्ताह में जवाब मांगा है। स्वत: संज्ञान लिए गए मामले के सुनवाई करते हुए कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश पीके मोहंती और जस्टिस आनंद सेन की अदालत ने यह निर्देश दिया।

अदालत ने अधिवक्ता वंदना सिंह को इस मामले का अमेकस क्यूरी भी नियुक्त किया। अखबारों में प्रकाशित खबर में एनडीआरएफ के उप कमांडेंट के हवाले से कहा गया है कि जमशेदपुर की किसी भी कंपनी में निकलने वाले गैस का प्रबंधन सही तरीके से नहीं किया जा रहा है। यहां की फैक्ट्रियों से कार्बन मोनोक्साइड, ब्लास्ट फरनेश गैस, अमोनिया और ऐसी ही कई खतरनाक गैस लीक होने और इससे जानमाल को नुकसान होने का खतरा बना रहता है। इसे देखते हुए एनडीआरएफ ने यहां इमरजेंसी कंट्रोल मॉनिटरिंग सेंटर खोलने का प्रस्ताव दिया है। राज्य सरकार को गुजरात मॉडल का डिजाइन और मॉडल भी दिने का निर्णय लिया गया है।

जमशेदपुर में कई बार हुआ है गैस लीक

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि जमशेदपुर में गैस लीक की कई घटनाएं हुई हैं। बावजूद इसे गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है।

कुछ प्रमुख घटना

27 मई 2008: क्लोरिन गैस लीक होने से टाटा मोटर्स कॉलोनी में 300 लोग प्रभावित

14 नवंबर2013: टाटा स्टील में गैस होल्डर में विस्फोट से एक की मौत 10 घायल

16 नवंबर 2015: अमोनिया सक्रबर के निकट विस्फोट से 19 कामगार घायल

26 अगस्त 2016: नासिग इस्पात में कार्बन मोनोक्साइड लीकेज से एक मरा, सात घायल

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