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युवा मस्तिष्क को जगाना जरूरी : सच्चिदानंद

रांची। प्रमुख संवाददाता First Published:23-09-2016 11:46:00 PMLast Updated:23-09-2016 11:48:25 PM

गुलाम भारत में संसाधनों का जिस तरह दोहन हो रहा था, वैसी स्थितियां एक बार फिर आ गई हैं। एकीकृत विकास के लिए वैश्विक पूंजी का मूल्यांकन जरूरी है। इसके बिना अपने विकास की परिकल्पना को लागू नहीं किया जा सकता। यह कहना है जेएनयू के स्कूल ऑफ सोशल साइंसेस सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ रीजनल डेपलपमेंट के प्रो सच्चिदानंद सिन्हा का।

सेंट जेवियर्स कॉलेज में शुक्रवार को पीजी भूगोल विभाग की ओर से आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार की शुरुआत हुई। इसका विषय है- एकीकृत विकास, पर्यावरण चिंता और सामाजिक परिवर्तन। सम्मेलन में मुख्य अतिथि रांची विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ रमेश कुमार पांडेय के अलावा आईआईपीए मुंबई के प्रो आरबी भगत, प्रो राम कुमार तिवारी, कॉलेज के प्राचार्य डॉ फादर निकोलस टेटे, डॉ नोबोर लकड़ा, सेमिनार के आयोजन सचिव डॉ शिव कुमार व अन्य शिक्षकों समेत विद्यार्थी और शोधार्थी मौजूद थे।

मुख्य वक्ता प्रो सच्चिदानंद ने कहा कि विकास की परिकल्पना और गति में एक बहुत बड़ा तबका छूटता जा रहा है। नव माल्थसवाद हमारे ऊपर हावी है, जो यह बताता है कि विकास का मतलब जनसंख्या कम करो। हमारे विकास की अवधारणा में ज्यादा उत्पादन के लिए विदेशी पूंजी अनिवार्य होता जा रहा है। नतीजतन हम अपनी मर्जी से सांस भी नहीं ले सकते। उन्होंने पाठ्यक्रमों, व्याख्यानों के जरिए युवा मस्तिष्क को जागृत करने पर जोर दिया, ताकि वे मुद्दों से न भटकें।

विकास निचले पायदान से हो

इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर पॉपुलेशन साइंसेस, मुंबई के प्रो आरबी भगत ने कहा कि विकास अर्थशासि्त्रयों की चर्चा का विषय बन गया है। जबकि इसमें समाजशासि्त्रयों, राजनीतिविज्ञानियों, भूगोलविदों की भी भागीदारी उतनी ही जरूरी है। योजनाओं में इन्हें शामिल करना होगा।

विकास के रास्तों का विश्लेषण जरूरी

आरयू के वीसी डॉ रमेश कुमार पांडेय ने कहा कि पर्यावरण मानकों में हम पिछड़े हैं, तो विकास के रास्तों का विश्लेषण करना होगा। कहा कि पर्यावरण का मुद्दा मानव निर्मित है। दुर्गा पूजा, गणेश चतुर्थी में प्रतिमा विर्सजन से नदी तालाब प्रदूषित हो रहे हैं। वन्यजीव घट रहे हैं। ठंडे मौसम के कारण रांची में चाय का उत्पादन होता था। अब हालात उलट हैं।

विकास स्थानीय स्तर पर भी हो

आरयू के पीजी भूगोल विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ रामकुमार तिवारी ने कहा कि विकास का सौंदर्य सिर्फ राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ही नहीं, स्थानीय स्तर पर भी होना चाहिए। तभी मेक इन इंडिया, स्टार्टअप इंडिया जैसी पहल सार्थक होगी। झारखंड में ऐसा भी समाज है जहां गरीबी बरकरार है, उनका विकास हो।

पत्रिका का विमोचन

मौके पर सेंट जेवियर्स कॉलेज के भूगोल विभाग की वार्षिक पत्रिका ‘वसुंधरा के पहले अंक का विमोचन किया गया। साथ ही, एब्सट्रैक्ट वाल्यूम का भी विमोचन किया गया। सेमिनार में झारखंड के अलावा पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, उत्तराखंड, बिहार, गुजरात, उत्तरप्रदेश, दिल्ली, छत्तीसगढ़ के प्रतिभागी हिस्सा ले रहे हैं। 21 विषयों पर 200 से अधिक शोधपत्र प्रस्तुत किए जाएंगे। पहले दिन तीन तकनीकी सत्रों में 70 से अधिक शोधपत्र प्रस्तुत किए गए। कार्यक्रम में रेक्टर फादर हेनरी बारला, प्रो वीपी शरण, डॉ एके सिन्हा, डॉ मनोहर लाल, डॉ अजय श्रीवास्तव, डॉ आरआर श्रीवास्तव व शिक्षकगण मौजूद थे। संचालन डॉ कमल कुमार बोस ने किया।

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Web Title: Sustainable Development Is Need Of Hour
 
 
 
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