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मैं का भाव छोड़ने पर ईश्वर प्राप्ति संभव: आचार्य श्रीकृष्ण

अरसंडे श्री दुर्गा मंदिर परिसर में श्रीमद्भागवत कथा का दूसरा दिनरांची। कथावाचक आचार्य श्रीकृष्ण ने कहा कि मैं का भाव छोड़ने पर ही मनुष्य ईश्वर प्राप्ति कर सकता है। जब तक मैं का भाव साथ रहेगा तब तक प्रभु का अनुभव नहीं हो सकता है।

आचार्य श्रीकृष्ण गुरुवार को कांके ब्लॉक चौक अरसंडे स्थित श्री दुर्गा मंदिर परिसर में प्रवचन कर रहे थे। महिला सत्संग की ओर से आयोजित संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के दूसरे दिन उन्होंने मैं था हरि नहीं भजन से उक्त बातों को स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि जीवन में सफलता के लिए अनुशासन जरूरी है। आत्मा अविनाशी है। आत्मा न तो जन्म लेती है और न ही इसका नाश होता है। शरणागति करने वाले की परमपिता सदा रक्षा करते हैं। कथा के दूसरे दिन आचार्य ने नारद-रति कपिल संवाद, चौबीस अवतार विराट वर्णन एवं सुकदेव आगमन आदि प्रसंग पर प्रवचन दिया। सम्पूर्ण पांडित्य का गोमुख वशिष्ठ जी हैं। श्रीराम-कृष्ण की स्तुति हमारे जीवन को शृंगारित कर देती है। कुंती स्तुति पर उन्होंने कहा कि उपदेश जब समझ में आएगा जब जिज्ञासु होकर बैठेंगे और कथा श्रवण करेंगे। उन्होंने कहा कि भगवत प्राप्ति की व्याकुलता अगर जीवन में आ गई है तो यह जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि है। मनुष्य को स्वयं पर और अपनी इंद्रियों पर नियंत्रण रख कर द्वंदों से ऊपर उठ कर स्वकर्तव्य को पूरा करना चाहिए। यही मनुष्य का सच्चा कर्म है। सच्चा कर्म जब होता है तो वही भक्ति में परिवर्तित हो जाता है

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  • Web Title:I give a sense of God realization possible: Krishna Acharya