Image Loading Early waking-day bath became centenarians Shukla - Hindustan
रविवार, 26 मार्च, 2017 | 01:07 | IST
Mobile Offers Flipkart Mobiles Snapdeal Mobiles Amazon Mobiles Shopclues Mobiles
खोजें
ब्रेकिंग
  • पढ़ें रात 11 बजे की टॉप खबरें, शुभरात्रि
  • अंकराशि: जानिए कैसा रहेगा आपके लिए 26 मार्च का दिन
  • जरूर पढ़ें: दिनभर की 10 बड़ी रोचक खबरें
  • प्राइम टाइम न्यूज़: पढ़े अबतक की 10 बड़ी खबरें
  • करीना से अपने रिश्ते पर पहली बार बोले शाहिद, 'सबसे बड़ा राज...', यहां पढ़ें बॉलीवुड...
  • हिन्दुस्तान जॉब : 12वीं पास के बच्चों को नौकरी देगा एचसीएल, क्लिक कर पढ़े
  • सीएम बनने के बाद पहली बार गोरखपुर पहुंचे योगी, हुआ भव्य स्वागत, पढ़ें राज्यों से...
  • यूपी सीएम ने कहा, कैलाश मानसरोवर यात्रियों को एक लाख का अनुदान देंगे, पूरी खबर...
  • इलाहाबाद: कौशाम्बी के पिपरी इलाके में छेड़खानी से दुखी बीए की छात्रा ने...
  • कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए 1 लाख रुपये सरकार देगी: सीएम योगी आदित्यनाथ
  • सीएम योगी आदित्य नाथ ने कहा- केंद्र की तरह यूपी में भी विकास को आगे बढ़ाना है
  • टॉप 10 न्यूज़: पढ़े अबतक की देश-विदेश और मनोरंजन की बड़ी खबरें
  • गैजेट-ऑटो अपडेट: पढ़ें अभीतक की 8 बड़ी खबरें
  • जेटली मानहानि मामला: पटियाला हाउस कोर्ट में सीएम अरविंद केजरीवाल और अन्य आप...
  • अभिनेता रजनीकांत ने तमिल समर्थक संगठनों के विरोध के मद्देनजर अपनी श्रीलंका...
  • स्पोर्ट्स अपडेटः 'चाइनामैन' कुलदीप के बारे में Interesting facts. पढ़ें, क्रिकेट की अभी तक...
  • बिहार में बदला मौसम का मिजाज, उत्तर बिहार में आंधी-तूफान, बारिश और ओला वृष्टि से...

जल्दी जागने-रोज नहाने से शतायु बने शुक्ल

मेदिनीनगर। सतीश सुमन First Published:19-10-2016 09:55:30 PMLast Updated:19-10-2016 10:00:23 PM

ब्रह्ममुहूर्त में जगने, रोज नहाने और सात्विक भोजन को संस्कार बनाने वाले युगल किशोर शुक्ल ने अपने जीवन का शतक पूरा कर लिया है। भारत को आजाद होने के साथ ही श्री शुक्ल 1948 में शिक्षक बने और राष्ट्र निर्माण में जुट गए।

वर्ष 1983 में सेवानिवृत्त होकर पैतृक गांव लेस्लीगंज के चौरा में रहने लगे। वह 90 साल की उम्र तक साइकिल चलाते थे और करीब 27 किलोमीटर दूर मेदिनीनगर आते-जाते रहे। हफ्ते भर पहले से उन्हें बुढ़ापा सताने लगा और अब उन्होंने बिस्तर पकड़ लिया है।

स्कूल और घर दोनों जगह कड़ा अनुशासन का पालन करने वाले और परिणाम के प्रति हमेशा तत्पर रहने वाले शुक्ल की वास्तविक उम्र फिलवक्त 102 वर्ष है। पलामू के मेदिनीनगर, महुआडांड़, कोनवाई, पांकी आदि बुनियादी विद्यालयों में सेवा देने वाले श्री शुक्ल अति बुजुर्ग होने के बावजूद हफ्ते भर पहले तक बैंक, एटीएम, मोबाइल, पेंशन आदि के काम खुद करते रहे। इतना ही नहीं, वह देश-दुनिया की खबरें भी रेडियो से सुनना कभी नहीं भूलते।

शुक्ल के बड़े पुत्र मदन शुक्ल भी शिक्षक के तौर पर बेहतरीन सेवा देने के लिए राष्ट्रपति पुरस्कार से नवाजे जा चुके हैं। वह भी 2006 में सेवानिवृत हो चुके हैं। शुक्ल के पोते चंद्रशेखर शुक्ल वर्तमान में पलामू जिला कांग्रेस के अध्यक्ष हैं। चंद्रशेखर शुक्ल बताते हैं कि चार बजे सुबह जगना और स्नान कर लेना, छह-सात बजे तक नाश्ता, 12 बजे तक भोजन और फिर शाम में छह बजे तक खाना उनके दादा जी की दिनचर्या रही है। उनके डर से घर में लहसुन-प्याज भी लोग नहीं खाते थे। उम्र में कुछ महीने की बड़ी श्री शुक्ल की पत्नी नागवंशी देवी बताती हैं कि जीवन में वह कभी बीमार नहीं पड़े। शुक्ल शिक्षक बनने के काफी पहले हायर सेकेंडरी पास कर चुके थे और बाद में स्नातक भी किया।

जरूर पढ़ें

 
Hindi News से जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
Web Title: Early waking-day bath became centenarians Shukla
 
 
 
अन्य खबरें
 
From around the Web
जरूर पढ़ें
क्रिकेट स्कोरबोर्ड
संबंधित ख़बरें