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मधुमेह के विशेष अस्पताल में मधुमेह की ही दवा नहीं

पटना। कार्यालय संवाददाता First Published:19-10-2016 06:22:43 PMLast Updated:19-10-2016 06:30:18 PM

सूबे में मधुमेह के विशेष अस्पताल न्यू गार्डिनर रोड में मधुमेह की दवा उपलब्ध नहीं है, जिससे मरीजों को बाहर से दवा खरीदनी पड़ रही है। दरअसल, पटना के इनकम टैक्स चौराहा स्थित न्यू गार्डिनर रोड अस्पताल को मधुमेह के विशेष अस्पताल के रूप में विकसित किया गया है, लेकिन स्थास्थ्य विभाग की ओर दवाएं उपलब्ध नहीं कराई जा रही है। यही नहीं राज्य के 22 जिलों में स्थापित 46 डायबिटीज सेंटर में दवा नहीं उपलब्ध होने की वजह से मरीज परेशान हैं।

तेजी से बढ़ रही है बीमारी

सूबे में शहरी क्षेत्र में मधुमेह की बीमारी तेजी से बढ़ रही है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े इस बात की पुष्टि करते हैं। राज्य में मधुमेह पीड़ितों की संख्या नौ लाख है। 14 प्रतिशत रोग शहरी क्षेत्र में है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों11 प्रतिशत मधुमेह के रोगी हैं। 40 से 60 वर्ष उम्र के लोग इस बीमारी से ज्यादा ग्रसित हैं। मधुमेह के इलाज के लिए सात प्रकार की दवाएं प्रचलित हैं। 2012 में दवा खरीद के लिए राज्य स्वास्थ्य समिति में प्रस्ताव लाया गया, लेकिन मरीजों को आजीवन दवा खानी पड़ेगी इस बात पर डॉक्टरों में सहमति नहीं बनी। ऐसे में अस्पताल में मरीजों को दवा उपलब्ध कराना एक चुनौती हो जाएगा।

मधुमेह की दवा जरूरी दवाओं की सूची में नहीं

बाजार में मधुमेह की दवाएं बहुत महंगी नहीं है। सरकारी स्तर पर खरीद होने पर और सस्ती हो सकती हैं। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का यह भी कहना है कि मधुमेह की दवा जरूरी दवाओं की सूची में शामिल नहीं है, इसलिए इसकी खरीददारी बीएमएसआईसीएल द्वारा नहीं की जा रही है। अमूमन एक दवा की कीमत पांच से 60 रुपए है। डायबिटिक टेस्ट सेंटर में मरीजों की जांच, परामर्श और बीमारी से बचाव के लिए सामग्री तो दी जाती है, लेकिन दवा की व्यवस्था नहीं है।

जिले जहां स्थापित हैं, डायबिटिक सेंटर

रोहतास, कैमूर, भोजपुर, पटना, नालंदा, गया, नवादा, मुंगेर, भागलपुर, बांका, मुजफ्फरपुर, वैशाली, समस्तीपुर, सीतामढ़ी, पूर्वी चंपारण, पश्चिमी चंपारण, पूर्णिया, कटिहार, अररिया, गोपालगंज और शिवहर शामिल है।

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