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कैसे बढ़ेगा INDIA? खिलाडि़यों के मेवे-फल खा जाते हैं अधिकारी और कोच

नई दिल्ली, लाइव हिन्दुस्तान टीम First Published:17-02-2017 01:09:46 PMLast Updated:17-02-2017 01:19:42 PM
कैसे बढ़ेगा INDIA? खिलाडि़यों के मेवे-फल खा जाते हैं अधिकारी और कोच

देश के नाम पदक जीतने के लिए खिलाड़ी दिन-रात ग्राउंड्स में पसीना बहाते हैं लेकिन जब उनकी खुराक ही पूरी नहीं होगी तो एनर्जी कैसे मिलेगी और फिर पदक जीतने का सपना कैसे पूरा होगा? एथलिट्स ने खेल मंत्रालय से शिकायत की है कि कोच और अधिकारी उनके मेवे और ताजे फल खा जाते हैं। इस शिकायत पर मंत्रालय ने क्वालिटी काउंसिल ऑफ इंडिया को भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) के 18 केंद्रों की जांच करने का आदेश दिया है।

एक अंग्रेजी समाचार पत्र में छपी खबर के अनुसार, जिन खिलाडि़यों को सरकार से मिलने वाले काजू-बादाम नहीं मिलते हैं उनमें अधिकतर जूनियर एथलिट्स हैं। साई को लिखे अपने शिकायत पत्र में खिलाडि़यों ने आरोप लगाया है कि उनके कोच और प्रशासनिक अधिकारी उनके न्यूट्रिशन कोटे का 50 फीसदी अपने पास ही रख लेते हैं।

खेल सचिव इंजेती श्रीनिवास ने कहा कि कुछ ऐसे मामले हैं जहां से उनको बेनामी शिकायतें मिली हैं, उस पर तत्काल कार्रवाई की गई है। क्वालिटी काउंसिल ऑफ इंडिया को केंद्रों की जांच के लिए कहा गया है। वे उन केंद्रों का सभी कोणों से जांच करेंगे। यह जांच केवल उन शिकायतों पर ही नहीं है, जांच के कई मापदंड हैं, उनमें से वह भी एक है।

साई की वेबसाइट के अनुसार, देश भर में 56 प्रशिक्षण केंद्र हैं, जिनमें 5394 प्रशिक्षु खिलाड़ी हैं। उनमें 3807 लड़के और 1587 लड़कियां हैं। उन सभी की उम्र 12 से 18 साल के बीच है। ड्राई फ्रूट्स खिलाडि़यों के खान-पान का अहम हिस्सा है। खासतौर पर वे खिलाड़ी जो पहलवानी, मुक्केबाजी और डिस्कस थ्रो से जुड़े हुए हैं।

साई केंद्र पर प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले हर खिलाड़ी को सरकार की तरफ से प्रतिदिन की खुराक और एनर्जी सप्लिमेंट्स मिलता है। खिलाड़ी की खुराक कोच, फिजियोथेरेपिस्ट और कुछ मामलों में न्यूट्रिशनिस्ट तय करते हैं। उसके अनुसार ही साई केंद्र के प्रमुख कैटरर को ऑर्डर करते हैं।

एक अधिकारी ने बताया कि सीनियर खिलाडि़यों के साथ ऐसा नहीं होता है क्योंकि उनको पहले से ही पता होता है कि उनको क्या-क्या चीजें कितनी मात्रा मिलनी हैं। लेकिन जूनियर खिलाडि़यों के साथ ऐसा नहीं है। उनके कोच उनको बताते हैं कि वे क्या खाएं और कितना खाएं।

खिलाडि़यों की तरह कोच को भी सरकार की ओर से मेवे मिलते हैं। लेकिन साई अधिकारियों ने बताया कि कुछ ऐसे भी मामले हैं, उनमें कोच कैटरर से मेवे के बदले रुपये देने को कहते हैं।

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