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2012 में किया था फ्लैट देने का वादा, अभी तक नहीं मिले फ्लैट्स

2012 में किया था फ्लैट देने का वादा, अभी तक नहीं मिले फ्लैट्स

मोहन नगर की पाश्र्वनाथ एक्जोटिका सोसाइटी में बिल्डर ने बायर्स को 2012 में फ्लैट्स देने का वायदा किया था। मगर अभी तक नहीं मिला है। वहीं बिल्डर की निजी वेबसाइट पर भी फ्लैट्स 2014 तक तैयार होने का अपडेट किया गया है।

पाश्र्वनाथ एक्जोटिका सोसाइटी का काम पिछले तीन साल से बंद है। सोसाइटी की रखवाली के लिए गार्ड तैनात किए गए है। इस सोसाइटी में फ्लैट्स बुक कराने वाले लोगों ने बताया कि उन्होंने 2007 में फ्लैट बुक कराया था। बिल्डर ने फ्लैट बुक कराते समय 2012 तक फ्लैट देने को कहा। मगर जब वह मौके पर पहुंचे तो कोई काम नहीं हो रहा था।

खरीददारों का आरोप है कि बिल्डर ने जीडीए से 844 फ्लैट्स का अप्रूवल लिया था। मगर बाद में फ्लैट्स की संख्या 1800 हो गई। बिल्डर तीन बीएचके, चार बीएचके और पांच बीएचके फ्लैट्स की बुकिंग करते जा रहा था। ऐसे में तकरीबन 700-800 लोगों ने अपने फ्लैट्स बुक कराए हैं।  ये सभी दिल्ली, गाजियाबाद, कानपुर, यूपी, नोएडा सहित अन्य शहरों के रहने वाले हैं। जो खरीदार लगातार साइट पर आते रहें। उन सभी ने मिलकर एक एसोसिएशन बनाई इसके बाद बिल्डर के खिलाफ रणनीति तैयार की गई। 

जब नहीं हुआ काम पूरा तो जीडीए ने अलॉटमेंट किया रद्द 

एसोसिएशन के सह सचिव ने बताया कि बिल्डर ने जब तय समय पर काम पूरा नहीं किया तो 2015 में गाजियाबाद डिवेलपमेंट प्राधिकरण ने इस सोसाइटी का अलॉटमेंट रद्द कर दिया। वहीं जीडीए के अधिशासी अभियंता वीके सोहनकर ने बताया कि यह मामला बिल्डर और बायर्स के बीच का है। जीडीए का इसमें कोई लेना देना नहीं है। 

नहीं मानी हार, लगातार आते रहें साइट पर 

एसोसिएशन के सह सचिव विजय गोयल ने बताया कि उन्होंने बिल्डर से 2007 में चार बीएचके फ्लैट खरीदा था। उस समय बिल्डर ने 2010 तक फ्लैट देने का वायदा किया था। मगर जब भी वह साइट पर आते तो काम बंद मिलता और बिल्डर आश्वासन देकर अपना पल्ला झाड़ लेता। इसके बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी और वह लगातार बिल्डर की साइट पर आते रहें और एक-दूसरे बायर्स से मिलकर 70 लोगों की टीम बना ली। 

ऐसे हुए एकजुट 

गाजियाबाद के कवि नगर में रहने वाले डॉक्टर वैभव ने बताया कि उन्होंने 2008 में चार बीएचके फ्लैट बुक किया था उन्हें भी आश्वासन दिया गया था कि 2010 तक फ्लैट दे दिया जाएगा। मगर नहीं मिला। इसके साथ ही उनके आस-पास रहने वाले सुभाष वर्मा,केपी अग्रवाल, कपिल मेहता सहित अन्य लोगों ने फ्लैट बुक कराया था। मगर साइट पर काम न होने से सभी घबरा गए और हर रविवार को प्रदर्शन करने लगे। मगर बिल्डर ने काम शुरू नहीं किया। ऐसे में बाद लोगों ने सुप्रिम कोर्ट जाने का निर्णय लिया। 

इस आदेश के बाद दूसरे बिल्डर ले सीख 

एओए फेडरेशन के संयोजक आलोक कुमार ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने पाश्र्वनाथ एक्जॉटिका बिल्डर को आदेश दिया है। इससे गाजियाबाद के दूसरे बिल्डर को भी सीख लेनी चाहिए। ताकि वे बायर्स को तय समय सीमा में फ्लैट दे सकें। 

ये है मामला 

सुप्रीम कोर्ट ने पाश्र्वनाथ एक्जॉटिका बिल्डर को 10 दिसंबर तक 10 करोड़ रुपए जमा कराने का निर्देश दिया है। बिल्डर ने इससे पहले भी सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री में 12 करोड रूपए जमा करा चुका है। कोर्ट ने 70 खरीदारों को कहा है कि वे दस्तावेजों का सत्यापन कराकर अपने पैसे सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री से ले सकते हैं। इस मामले की अगली सुनवाई 14 दिसंबर को होगी। 

इन सालों में लोगों ने बुक कराया फ्लैट 
-2007
-2008
-2009 
-2010 

ये दिखाए थे सपने 

-स्वीमिंग पुल की सुविधा 
-लिफ्ट की सुविधा 
-24 घंटे पावर बैकअप 
-कार पार्किंग
-जिम की सुविधा 
-क्लब हाउस 
-24 घंटे पेय जल आपूर्ति 
-बच्चों के लिए खेलने की व्यवस्था 
-ईको बैलेसिंग सिस्टम

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  • Web Title:trans hindon flat buyers claims that they were cheated
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