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वकीलों ने अधिवक्ता संशोधन विधेयक-2017 की प्रतियां जलाकर किया विरोध प्रदर्शन

वकीलों ने अधिवक्ता संशोधन विधेयक-2017 की प्रतियां जलाकर किया विरोध प्रदर्शन

अधिवक्ता संशोधन विधेयक-2017 के विरोध में शुक्रवार को जिला न्यायालय परिसर में वकीलों ने विधेयक की प्रतियां जलाकर प्रदर्शन किया। केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और गुस्साएं वकीलों ने भोजनावकाश के बाद कार्य स्थगन कर दिया। वकीलों ने संशोधित विधेयक को न्यायपालिका पर हमला करार देते हुए ज्ञापन राष्ट्रपति को भेजने की बात कही। वकीलों के कार्यस्थगन से कुछ मुवक्किलों को खासी दिक्कत हुई।  

केंद्र सरकार द्वारा अधिवक्ता विधेयक में किए गए संशोधन प्रस्तावों को वकीलों को अनुकूल नहीं मान रहे हैं। वरिष्ठ अधिवक्ता ओपी शर्मा, जिला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष संजीव चौधरी, सतेंद्र भड़ाना, एमएस नागर, हेमराज, जेपी अधाना, शिवदत्त वशिष्ठ, सतवीर शर्मा, दलपत सिंह, सुखराम जाखड, अनिल पाराशर, नकुल चपराना, दिनेश चंदीला व नवीन गुप्ता की टोलियों ने केंद्र सरकार से इस प्रस्ताव को तुरंत जलाने की मांग की। विधि आयोग की सिफारिशों को तुरंत खारिज किया जाए। इन प्रस्तावों पर चर्चा के बाद वकीलों की अलग-अलग टोलियों अदालत परिसर के पूर्वी प्रवेशद्वार पर पहुंच गई और केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और संशोधित विधेयक प्रस्ताव की प्रतियों में एक-एक कर आग लगा दी। सतेंद्र भड़ाना ने कहा कि शनिवार को उच्च न्यायालय विधिज्ञ परिषद की बैठक होगी। इसमें आगे की रणनीति बनेगी। अगर इस प्रस्ताव का निरस्त नहीं किया गया तो दो मई को देशव्यापी हड़ताल होगी। 

प्रदर्शनकारियों में राधेश्याम पाराशर, एमएस़ राकेश, दिनेश चंदीला, भारत भूषण, मुकेश भारद्वाज, प्रदीप परमार, सुरेंद्र शर्मा, योगेश शर्मा, मनोज अरोड़ा, कृपाराम, राहुल शर्मा, महेंद्र चौधरी, सतीश चौहान, संजय दीक्षित, रामशरण रोतेला, पवन कौशिक, विक्रम सिंह, सचिन पाराशर, राहुल सेठी, रेखा चौधरी, वंदना सिंह जादौन, आई़डी शर्मा, सतपाल नागर, कुलदीप जोशी, विपिन वर्मा, कुंदन सिंह व एमपी सिंह आदि शामिल रहे। 

वकीलों के कार्य स्थगन से हलकान रहे मुवक्किल
वकीलों के विरोध प्रदर्शन और कार्य स्थगन से मुवक्किलों को खासी दिक्कतें का सामना करना पड़ा। सुनवाई पूरी नहीं होने पर मुवक्किलों को एक बार फिर अपने मुकदमें में अगली तारीख लेकर मायूस वापस लौटना पड़ता है। दूर दराज से आने वाले मुुवक्किल खासे परेशान हुए। वकीलों ने दोपहर बाद अदालत में जाने से मना कर दिया। ऐसे में मुवक्किलों को मुकदमे में अगली तारीख लेकर वापस मायूस लौटना पड़ा। 

वकीलों के मुताबिक संशोधित विधेयक की सिफारिशों पर एक नजर 
-काम में लापरवाही करने और अनुशासन तोड़ने पर वकीलों पर कार्रवाई होगी
-वकीलों को उपभोक्ता आयोग द्वारा तय नियमों के मुताबिक हर्जाना देना होगा
-कोई भी न्यायाधीश या न्यायिक पदाधिकारी लापरवाही या अनुशासनहीनता पर वकील का लाइसेंस रद्द कर सकता है
-हड़ताल करने पर कार्रवाई या जुर्माना हो सकता है
-राज्य विधिज्ञ परिषद के आधे से अधिक सदस्य उच्च न्यायालय द्वारा नामित किए जाएंगे, इसमें डॉक्टर, इंजीनियर, कारोबारी आदि शामिल किए जाएंगे
-भारतीय विधिज्ञ परिषद के सदस्यों के लिए चुनाव नहीं होंगे
-उच्चतम न्यायालय के एक न्यायाधीश, केंद्रीय निगरानी आयुक्त, सीए के अपीलीय पदाधिकारी द्वारा परिषद के आधे से अधिक सदस्य नामित किए जाएंगे

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  • Web Title:lawyers protested by burning copies of advocates amendment bill-2013