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चांद के दीदार के बाद पति के हाथ से पानी पीकर सुहागिनों ने किया व्रत पूरा

चांद के दीदार के बाद पति के हाथ से पानी पीकर सुहागिनों ने किया व्रत पूरा

भारतीय संस्कृति में पति के प्रति समर्पण और स्नेह का त्योहार करवाचौथ बुधवार को विवाहिताओं ने उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया। इन महिलाओं ने पूरे दिन कठिन व्रत किया। बुजुर्ग महिलाओं के बीच बैठकर कथाएं सुनी और भगवान की पूजा-अर्चना की। पूजा में सुहागिनों ने पति की दीर्घायु और खुद के अखंड सौभाग्य की कामना की। रात में चांद का दीदार करके पति के हाथ से पानी पीकर व्रत पूरा किया।

शहर में बुधवार को हर जगह करवा चौथ की रौनक देखने को मिली। सौलह श्रंगार में सजी विवाहित महिलाओं ने दिन भर का निर्जला व्रत रखा और दोपहर बाद विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। सजने-संवरने के लिए महिलाओं मॉल्स और मॉर्केट में दोपहर तक भीड़ रही। शाम को सोलह श्रृंगार करके चांद निकलने का इंतजार किया। चांद निकलने के बाद परम्परा के मुताबिक अर्घ्य दिया। कुछ महिलाओं ने छलनी में पति और चांद का दीदार किया। पति की लंबी उम्र की कामना के साथ सुहागिनों ने व्रत खोला।

युवाओं ने आधुनिकता के साथ मनाया करवा चौथ का त्योहार

विवाहिताओं के अलावा कुछ अविवाहित युवतियों ने इस व्रत को रखा और नवविवाहिताओं के साथ उनके पतियों ने भी इस व्रत को किया। करवाचौथ पर आधुनिकता का खूब रंग देखने को मिला। हालांकि त्योहार में आए इस बदलाव से महिलाएं खासी खुश हैं। पहले इस व्रत को केवल विवाहित महिलाएं ही रखती थीं। अब इसे कुछ अविवाहित युवतियां भी रखती हैं। पेशेवर युवक-युवतियां और नववाहित जोड़े परम्पराओं से दूर पूजा और करवा चौथ का व्रत खोलने के बाद रेस्टोरेंट और होटल्स में डिनर के लिए डेबल बुक की गई। मॉल प्रबंधक अनिल गिरि ने बताया कि करवा चौथ के बाद शाम को लोगों की खूब भीड़ जुटी। जोड़ों ने साथ मिलकर लजीज खाने का मजा लिया।

सोसाइटियों में सजी संगीत की महफिल

ऊंची-ऊंची अट्टालिकाओं में भी करवाचौथ का त्योहार धूमधाम से मनाया गया। अधिकांश सोसाइटियों में संगीत की महफिल सजी। ताकि चांद दिखने तक व्रतधारी महिलाओं का समय आसानी से कट सके। महिलाओं ने सामूहिक पूजन के बाद बॉलीवुड गीतों में खूब ठुमके लगाए। साथ ही चंद्रमा निकलने के बाद सामूहिक रूप से अर्घ्य दिया। 
100 साल बाद एक महासंयोग
ज्योतिषाचार्य पंडित केके शास्त्री के मुताबिक करीब सौ साल बाद एक महासंयोग बना है। करवा चौथ के दिन गणेश चतुर्थी और श्री कृष्ण का रोहिणी नक्षत्र भी है। व्रत करने वाली महिलाओं को सौ व्रतों का वरदान मिलेगा। भगवान कृष्णकी महिलाओं पर विशेष कृपा रही। भगवान कृष्ण ने द्रोपदी को कार्तिक मास की कृष्ण चतुर्थी को व्रत करने की सलाह दी। 

...सजना है मुझे-सजना के लिए

...सजना है मुझे-सजना के लिए, साठ के दशक की हिन्दी फिल्म का यह गाना उस दौर की महिलाओं के लिए शब्दों जरिए प्रेम की अभिव्यक्ति व्यक्त करने का माध्यम बना। अब समय बदल चुका है अब महिलाएं पूरे सोलह श्रंृगार के साथ कई दिन पहले से सजने का दौर शुरू करती है। पति की दीर्घायु और उसकी सुख-स्मृद्धि की कामना के लिए मनाया जाने वाला करवाचौथ का पर्व अब सजना के लिए सजनी के सजने का पर्व बन चुका है। बुधवार को शहर के ब्यूटी पॉर्लर्स पर महिलाओं की भीड़ रही। कई पार्लर्स ने टैंट लगाकर अतिरिक्त इंतजाम किए। सड़क किनारे बैठे मेहंदी वालों के पास सुबह से ही खासी भीड़ देखने को मिली। महिलाएं सुबह से ही मेहंदी लगाने के लिए उत्साहित दिखीं। पांच नंबर बाजार में मेंहदी लगा रहीं ऊषा ने बताया कि मेहंदी लगाने का सिलसिला पांच दिन पहले से चल रहा है।

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  • Web Title:karva chauth vrat traditionally celebrated in faridabad