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पोल खोलः कश्मीर में हिंसा के लिए इन 3 तरीकों से PAK करता है फंडिंग

पोल खोलः कश्मीर में हिंसा के लिए इन 3 तरीकों से PAK करता है फंडिंग

पिछले साल 8 जुलाई को आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिद्दीन के आतंकी बुरहान वानी की सेना के साथ मुठभेड़ में मौत के बाद कश्मीर घाटी में हिंसा की घटनाएं बढ़ी हैं। इन सबके पीछे पाकिस्तान के नापाक इरादे किसी से छिपे नहीं हैं। पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई और वहां के आतंकी संगठन कश्मीर में हिंसा के लिए आर्थिक मदद पहुंचाते हैं।

कश्मीर के मसले पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कोई समर्थन न मिलते देख पाकिस्तान सीमा पार से आतंकवाद को बढ़ावा देकर और घाटी के पत्थरबाजों को फंडिंग देकर इस मसले को 'जिंदा' रखना चाहता है। घाटी में आए दिन होने वाली पत्थरबाजी की घटनाओं में 'पाकिस्तान का पैसा' लगा है।

हम आपको बताते हैं कि सीमा पार से किस तरह घाटी में हिंसा के लिए रुपये कश्मीर भेजे जाते हैं। 

1- पत्थरबाजों को होती है कैसलेश फंडिंग 

हाल ही में एक न्यूज चैनल की पड़ताल में दावा किया गया था कि पाकिस्तान घाटी में पत्थरबाजों को कैशलेस फंडिंग कर रहा है। न्यूज चैनल ने अपने खुफिया सूत्रों के हवाले से दावा किया कि पाकिस्तान इन पत्थरबाजों को पैसा देने के लिए उसी वस्तु विनिमय प्रणाली का सहारा ले रहा है, जिसके जरिए लोग पहले व्यापार करते थे। वस्तु विनिमय प्रणाली में लोग सामान का आदान-प्रदान करते हैं। ठीक इसी तरह पाकिस्तान भी पथराव करने वाले नौजवानों को फंडिंग करता है।  

चैनल के मुताबिक, कई ट्रक पाक अधिकृत कश्मीर (PoK) से श्रीनगर सामान लेकर आते-जाते हैं। इन्हें ट्रकों के जरिए पत्थरबाजों को पैसा पहुंचाया जाता है। मान लीजिए एक ट्रक मुजफ्फराबाद से 5 लाख रुपए का सामान लेकर श्रीनगर के लिए रवाना हुआ, लेकिन जब यह वापस श्रीनगर से मुजफ्फराबाद जाता है तो इस पर सिर्फ 2 लाख रुपए का सामान होता है। इस तरह से तीन लाख रुपए श्रीनगर में पत्थरबाजों तक पहुंच जाता है। 

चैनल ने सूत्रों के हवाले से बताया कि भारतीय सुरक्षा एजेंसियों को हाल ही में पाकिस्तान की इस नापाक चाल के बारे में पता चला है, जिसके बाद से श्रीनगर और मुजफ्फराबाद के बीच आने-जाने वाली गाड़ियों की जांच पड़ताल की जा रही है।

2- हवाला के जरिए हर साल 100 करोड़ रुपये भेजे जाते हैं कश्मीर
जुलाई 2016 में आईबी की एक रिपोर्ट में बताया गया था कि घाटी में हिंसा के लिए करीब 100 करोड़ रुपये हर साल हवाला के जरिए पाकिस्तान से कश्मीर भेजा जाता है। यह फंड सीधे तौर पर अलगाववादियों को मिलता है, तब वे युवाओं को सुरक्षा बलों के खिलाफ होने वाले विरोध प्रदर्शनों के लिए रुपये बांटते हैं। अलगाववादी पत्थरबाजी के लिए भी युवाओं को रुपये बांटते हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, प्रशिक्षित आतंकी भी पुलिस और सुरक्षा बलों को निशाना बनाने वाले प्रदर्शनों में शामिल होते हैं। 

आईबी के सूत्रों के अनुसार, आईएसआई आतंक के फंडिंग के लिए हिजबुल कमांडर सलाहुद्दीन और जमात उद दावा के सरगना हाफिज सईद के आतंकी नेटवर्क का इस्तेमाल कर रहा है।           

3- धर्मार्थ संगठनों के जरिए हिंसा के लिए कश्मीर भेजा जाता है 'चंदा'
एनआईए के एक अधिकारी अतुल गोयल ने इस साल मार्च में अयोजित 19वें एशियाई सुरक्षा सम्मेलन में बताया था कि पाकिस्तान के आतंकी संगठन अपने धर्मार्थ संगठनों के जरिए पाक में लाखों रुपये का चंदा उगाही करते हैं, फिर उसे अपने लोगों के जरिए कश्मीर भेज देते हैं। 

आतंकी संगठन जमात उद दावा और लश्कर ए तैयबा 'फलह ए इंसानियत' धर्मार्थ संगठन और जैश ए मोहम्मद 'अल रहमत ट्रस्ट' चलाते हैं। इनके जरिए वे धर्म के नाम पर चंदा मांगते हैं और फिर उसे कश्मीर में आतंक के लिए इस्तेमाल करते हैं।

आपको बता दें कि फलह ए इंसानियत पाकिस्तान में तेजी से बढ़ने वाला संगठन है। 

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  • Web Title:violence in kashmir pakistan funding terror in three ways