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इन 13 प्वाइंट्स में जानें, पानी की कमी से कैसा होगा हमारा भविष्य

इन 13 प्वाइंट्स में जानें, पानी की कमी से कैसा होगा हमारा भविष्य

हम रोजाना कई लीटर पानी फिजूल खर्च कर जाते हैं, लेकिन इसका परिणाम भविष्य में बेहद भयावह हो सकती है। संयुक्त राष्ट्र की विश्व जल विकास रिपोर्ट-2015 के अनुसार, यदि जल संरक्षण प्रबंधन में सुधार नहीं लाया गया तो 2030 तक पृथ्वी को 40 प्रतिशत स्वच्छ जल की कमी का सामना करना पड़ेगा। इस नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार दुनिया की जरूरतें पूरी करने के लिए पर्याप्त पानी है, लेकिन उसके सही प्रबंधन की आवश्यकता है। आइए जानते हैं इस रिपोर्ट के जरिए...

ये प्वाइंट्स है बेहद महत्वपूर्ण

1. 'एक सतत विश्व के लिए जल' नामक इस रिपोर्ट के अनुसार भारत में लगभग 9.7 करोड़ लोगों को पीने का स्वच्छ पानी मिलता है।

2. लगातार बढ़ रही जनसंख्या के कारण कृषि तथा ऊर्जा क्षेत्रों पर अधिकतम उत्पादन के लिए दबाव बना है।

3. 2050 में पूरे विश्व की खाद्य जरूरतें पूरी करने के लिए कृषि क्षेत्र को 60 प्रतिशत अधिक खाद्यान्न उत्पादन करना होगा। विकासशील देशों में तो 100 प्रतिशत अधिक खाद्यान्न उत्पादन करना होगा और इसके लिए कृषि को भारी मात्रा में पानी की जरूरत होगी।

4. विनिर्मित वस्तुओं की मांग में भी वृद्धि हो रही है, जिसके कारण जल संसाधनों पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा।

5. विनिर्माण क्षेत्र में विश्व में पानी की मांग वर्ष 2000 की तुलना में 2050 में 400 प्रतिशत बढ़ जाएगी।

6. 2050 में विश्व में पानी की मांग 55 प्रतिशत बढ़ जाएगी। यह मांग विनिर्माण, तापीय बिजली और घरेलू इस्तेमाल के लिए बढ़ेगी।

7. आने वाले वर्षों में जल प्रबंधन यदि ठीक तरह से नहीं किया गया तो पेयजल से लेकर सिंचाई व उद्योगों के लिए जल की पर्याप्त आपूर्ति करना कठिन हो जाएगा।

8. पानी को लेकर लोगों की सोच और व्यवहार नहीं बदला तो विश्व में अगले 15 वर्षों में पानी की जरूरत की तुलना में आपूर्ति 40 प्रतिशत कम हो जाएगी। 

9. रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि अत्यधिक सिंचाई, जलाशयों में अनियंत्रित रूप से कीटनाशकों व रसायनों को छोड़ना तथा अपशिष्ट जल संयंत्रों की कमी आने वाले समय में स्वच्छ जल की भयंकर कमी की ओर संकेत करते हैं।

10. रिपोर्ट के अनुसार भारत, नेपाल, बांग्लादेश और चीन कृषि कार्यों के लिए विश्व के लगभग आधे भूजल का इस्तेमाल करते हैं। 

11. एशियाई देशों में सिंचाई के लिए इस पानी के इस्तेमाल से अर्थव्यवस्था को 10 से 20 अरब डॉलर का लाभ होता है। 

12. भारत में भूमिगत जल का दोहन 20वीं सदी के उत्तरार्द्ध में बढ़ा है। भारत में 1960 में 10 लाख ट्यूबवेल थे, जिनकी संख्या वर्ष 2000 में बढ़कर 1.9 करोड़ हो गई। लेकिन इससे देश के राजस्थान तथा महाराष्ट्र जैसे कई क्षेत्रों में जल की समस्या भी सामने आई।

13. यह अंतर्राष्ट्रीय मत है कि सतत विकास के कई लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए जल तथा स्वच्छता जरूरी है, जो उल्लेखनीय तौर पर जलवायु परिवर्तन, कृषि, खाद्य सुरक्षा, स्वास्थ्य, ऊर्जा, समानता, लिंग तथा शिक्षा से जुड़े हैं।

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  • Web Title:learn about these 13 points how our water will be lacking in water
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