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कर्नाटक सरकार-सुप्रीम कोर्ट के बीच टकराव बढ़ने के आसार

बेंगलुरु, एजेंसी First Published:23-09-2016 09:55:38 PMLast Updated:23-09-2016 09:55:38 PM
कर्नाटक सरकार-सुप्रीम कोर्ट के बीच टकराव बढ़ने के आसार

कर्नाटक विधानसभा के विशेष सत्र में सरकार से कावेरी जल का इस्तेमाल केवल पेयजल जरूरतों को पूरा करने का आह्वान करते हुए एक प्रस्ताव पेश किया गया। इसका तात्पर्य है कि कर्नाटक तमिलनाडु के लिए पानी छोड़ने के सुप्रीम कोर्ट के नवीनतम निर्देश का पालन नहीं कर सकता है। इससे माना जा रहा है कि कर्नाटक सरकार और सुप्रीम कोर्ट के बीच टकराव बढ़ सकता है।

गंभीर कठिनाई की दशा का उल्लेख करते हुए प्रस्ताव में कहा गया है कि यह अनिवार्य है कि सरकार यह सुनिश्चित करे कि कावेरी बेसिन के गांवों एवं शहरों तथा बेंगलुरु की पीने के पानी की जरूरतों को पूरा करने को छोड़कर अन्य किसी जरूरत के लिएर वर्तमान भंडार से पानी नहीं छोड़ा जाए। इस प्रस्ताव पर सभी दलों ने सहमति जताई।

प्रस्ताव के मुताबिक, यदि बेंगलुरु समेत कावेरी बेसिन के सभी क्षेत्रों के लोगों की पेयजल जरूरतों को पूरा करने के सिवा किसी अन्य जरूरत के लिए कावेरी बेसिन के चार जलाशयों में पानी घटा तो राज्य के लोगों के हित खतरे में पड़ जाने की आशंका है। प्रस्ताव में सुप्रीम कोर्ट के उस निर्देश का जिक्र नहीं है, जिसमें कर्नाटक को तमिलनाडु के लिए रोज 6000 क्यूसेक पानी छोड़ने का निर्देश है।

कावेरी निगरानी समिति ने 19 सितंबर को कर्नाटक को 21 से 30 सितंबर के दौरान 3000 क्यूसेक पानी रोज छोड़ने को कहा था, लेकिन कोर्ट ने 20 सितंबर को यह मात्रा दोगुनी कर दी, क्योंकि तमिलनाडु ने अपनी सांबा धान फसल को बचाने के लिए पानी की जरूरत का उल्लेख किया था। कोर्ट ने साथ ही केंद्र को कावेरी जल विवाद पंचाट के निर्देश के तहत चार हफ्ते में कावेरी जल प्रबंधन बोर्ड गठित करने का निर्देश दिया।

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Web Title: karnataka cauvery water supreme court
 
 
 
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