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राकेश अस्‍थाना को मिला CBI निदेशक का अतिरिक्त प्रभार

नई दिल्ली, एजेंसी First Published:02-12-2016 04:28:59 PMLast Updated:02-12-2016 09:49:52 PM
राकेश अस्‍थाना को मिला CBI निदेशक का अतिरिक्त प्रभार

सीबीआई निदेशक अनिल सिन्हा आज अपने पद से सेवानिवत्त हो गये। सरकार ने गुजरात काडर के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी राकेश अस्थाना को CBI निदेशक का अतिरिक्त प्रभार सौंप दिया। सरकार ने अभी जांच ब्यूरो के लिए पूर्ण कालिक प्रमुख की घोषणा नहीं की है।

गुजरात काडर के 1984 बैच के अधिकारी अस्थाना को दो दिन पहले सीबीआई में अतिरिक्त निदेशक के रूप में प्रोन्नत किया गया था। इससे पहले, विशेष निदेशक आर के दत्ता, जो जांच ब्यूरो के प्रमुख के पद की दौड़ में थे, को विशेष सचिव के तौर पर गृह मंत्रालय भेज दिया गया था। मंत्रालय में पहली बार दूसरे विशेष सचिव का पद सृजित किया गया है।

दस साल में पहली बार ऐसा हुआ है कि निवर्तमान सीबीआई प्रमुख के उत्तराधिकारी का चयन नहीं किया गया है। सिन्हा ने आज दो साल का अपना कार्यकाल पूरा किया। कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग का आदेश कहता है, सक्षम प्राधिकार ने आईपीएस (बिहार 1979) अनिल कुमार सिन्हा के अपना कार्यकाल पूरा करने के तत्काल बाद प्रभाव से और अगले आदेश तक के लिये केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के निदेशक पद का अतिरिक्त कार्यभार आईपीएस (गुजरात 1984) राकेश अस्थाना को बतौर सीबीआई के अतिरिक्त निदेशक सौंपने को मंजूरी प्रदान की है।

ऐसे चुना जाता है सीबीआई का प्रमुख-

सीबीआई प्रमुख का चयन एक कॉलेजियम करता है जिसमें प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता या विपक्ष के सबसे बड़े दल के नेता और प्रधान न्यायाधीश होते हैं। अभी कॉलेजियम की बैठक नहीं हो पायी है। साठ वर्षीय सिन्हा ने तब सीबीआई की कमान संभाली थी जब जांच ब्यूरो पिंजरे में बंद तोता और बंद जांच एजेंसी जैसे तीखे कटाक्षों का सामना कर रहा था। सिन्हा ने सीमित सोशल सर्किल के साथ मीडिया से दूर रहकर एजेंसी के कामकाज को संभाला एवं उसे आगे बढ़ाया।

इन हाई प्रोफाइल कैसों पर कर चुके हैं काम-
सिन्हा एजेंसी के मदु भाषी लेकिन दृढ़ नेता साबित हुए जिन्होंने शीना बोरा हत्याकांड एवं विजय माल्या धन गड़बड़ी कांड जैसे कई महत्वपूर्ण मामलों की जांच का मार्गदर्शन किया। माल्या मामले में सिन्हा ने यह तय किया कि इस तड़क-भड़क वाले शराब कारोबारी के खिलाफ बंद पड़ चुकी उसकी किंगफिशर एयरलाइंस को मिले धन की कथित रूप से अदायगी नहीं किये जाने को लेकर मामला दर्ज हो जबकि बैंक शिकायत लेकर सीबीआई नहीं पहुंची थी।

सिन्हा ने शीना बोरा हत्याकांड की जांच सीबीआई को सौंपे जाने के बाद अपनी टीमों को इस मामले में पीटर मुखर्जी की भूमिका खंगालने का निर्देश दिया। उन्होंने यह पक्का किया कि सीबीआई सार्वजनिक बैंकों की गैर निष्पादित संपत्तियों के ढेरों मामलों की सघनता से तहकीकात हो जबकि बैंक संभावित मध्य मार्ग बंद हो जाने के डर से इन मामलों की जांच शुरू किये जाने के पक्ष में नहीं थे।

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