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वीजा संकट : अमेरिका में रहने वाले भारतीय अपने देश में ढूंढ़ रहे नौकरी

वीजा संकट : अमेरिका में रहने वाले भारतीय अपने देश में ढूंढ़ रहे नौकरी
  • एल1, ईबी5 वीजा बन सकते हैं विकल्प : विशेषज्ञ
  • ट्रंप ने एच1बी वीजा के समीक्षा आदेश पर हस्ताक्षर किए
  • भारतीय कंपनियों की कठिनाई बढ़ेगी : एसोचैम

 

अमेरिका में रह रहे अधिकतर नौकरीपेशा भारतीय अब भारत में नौकरी ढूंढ रहे हैं ताकि स्वदेश वापस लौट सकें। डोनाल्ड ट्रंप के सत्ता संभालने के बाद से अमेरिका में रह रहे भारतीयों द्वारा भारतीय कंपनियों में नौकरी के लिए आवेदन की संख्या में भारी इजाफा हुआ है।

दिसंबर से मार्च के बीच ऐसे आवेदनों में 10 गुना वृद्धि दर्ज की गई है। कंसल्टिंग फर्म डेलॉइट टॉच तोहमात्सू के मुताबिक दिसंबर 2016 में अमेरिका में नौकरी कर रहे 600 लोगों ने भारत में नौकरी के लिए अप्लाई किया। वहीं मार्च तक यह संख्या बढ़कर लगभग सात हजार तक पहुंच गई। अमेरिकी नागरिकता और अप्रवासन कार्यालय के मुताबिक 2018 के लिए एच-1बी कार्य वीजा के आवेदन में पांच साल में पहली बार गिरावट दर्ज की गई है।

गौरतलब है कि ट्रंप प्रशासन लगातार स्थानीय लोगों को नौकरी में प्रथमिकता देने की बात करता रहा है। साथ ही एच-1बी वीजा नियम को और कड़ा करने पर विचार किया जा रहा है। इसका असर भारतीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर व कुशल कामगारों पर पड़ रहा है। इसलिए अमेरिका में रह रहे भारतीय वापस भारत आने के इच्छुक हैं। ट्रंप द्वारा एच-1बी वीजा नियम में बदलाव का असर इनफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी आउटसोर्सिग कंपनियों जैसे टाटा कंसल्टेंसिंग सर्विस लिमिटेड और कागनिजेंट टेक्नोलॉजी सल्यूशन कॉर्प कंपनियों पर पड़ सकता है।

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साल 2018 के लिए अमेरिका में एच1बी वीजा की सीमा तय कर दी गई है। लेकिन आव्रजन विशेषज्ञों के अनुसार, आवेदन करने वालों के लिए एल1 और ईबी5 वीजा जैसे अन्य विकल्प भी मौजूद हैं। एल1 वीजा विदेशी कामगार को अमेरिका में प्रबंधकीय, कार्यकारी या विशेषीकृत श्रेणी में अस्थाई तौर पर भेजता है। एच1बी और एल1 वीजा कर्मचारियों के लिए है। जबकि ईबी5 वीजा के लिए लक्षित रोजगार क्षेत्र (टीईए) में पांच लाख डॉलर और गैर टीईए क्षेत्र में एक लाख डॉलर का निवेश करने की जरूरत पड़ती है। ईबी5 और एल1 ए वीजा से अमेरिका में स्थाई तौर पर रहा जा सकता है।

साल 2018 के लिए अमेरिका में एच1बी वीजा की सीमा तय कर दी गई है। लेकिन आव्रजन विशेषज्ञों के अनुसार, आवेदन करने वालों के लिए एल1 और ईबी5 वीजा जैसे अन्य विकल्प भी मौजूद हैं। एल1 वीजा विदेशी कामगार को अमेरिका में प्रबंधकीय, कार्यकारी या विशेषीकृत श्रेणी में अस्थाई तौर पर भेजता है। एच1बी और एल1 वीजा कर्मचारियों के लिए है। जबकि ईबी5 वीजा के लिए लक्षित रोजगार क्षेत्र (टीईए) में पांच लाख डॉलर और गैर टीईए क्षेत्र में एक लाख डॉलर का निवेश करने की जरूरत पड़ती है। ईबी5 और एल1 ए वीजा से अमेरिका में स्थाई तौर पर रहा जा सकता है।

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एच1बी वीजा कार्यक्रम के नियमों को सख्त बनाने वाले शासकीय आदेश पर मंगलवार को हस्ताक्षर किया। इसका मकसद वीजा दुरुपयोग रोकना और ‘बाय अमेरिकन, हायर अमेरिकन’ नीति को लागू करना है। यह वीजा कार्यक्रम भारतीय आईटी कंपनियों एवं पेशेवरों में सबसे ज्यादा लोकप्रिय है। ट्रंप ने स्नैप ऑन इंक कंपनी के विस्कोंसिन के केनोशा स्थित मुख्यालय में यह हस्ताक्षर किया। इस मौके पर उन्होंने कहा, इस आदेश से हमने विश्व को एक सशक्त संकेत दिया है। हम अपने कामगारों और रोजगारों को सुरक्षित करने जा रहे हैं।

बाय अमेरिकन, हायर अमेरिकन
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एच1बी वीजा कार्यक्रम के नियमों को सख्त बनाने वाले शासकीय आदेश पर मंगलवार को हस्ताक्षर किया। इसका मकसद वीजा दुरुपयोग रोकना और ‘बाय अमेरिकन, हायर अमेरिकन’ नीति को लागू करना है। यह वीजा कार्यक्रम भारतीय आईटी कंपनियों एवं पेशेवरों में सबसे ज्यादा लोकप्रिय है। ट्रंप ने स्नैप ऑन इंक कंपनी के विस्कोंसिन के केनोशा स्थित मुख्यालय में यह हस्ताक्षर किया। इस मौके पर उन्होंने कहा, इस आदेश से हमने विश्व को एक सशक्त संकेत दिया है। हम अपने कामगारों और रोजगारों को सुरक्षित करने जा रहे हैं।

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बुधवार को संकेत दिया कि वह अपनी अमेरिका यात्र के दौरान अमेरिकी अधिकारियों के साथ एच1बी वीजा का मुद्दा उठा सकते हैं। जेटली ने कहा, आईटी उद्योग का मुद्दा उचित अधिकारियों के साथ विचार-विमर्श का मुद्दा है। विचार-विमर्श कर लेने के बाद इसकी जानकारी दी जाएगी।
वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बुधवार को संकेत दिया कि वह अपनी अमेरिका यात्र के दौरान अमेरिकी अधिकारियों के साथ एच1बी वीजा का मुद्दा उठा सकते हैं।

जेटली ने कहा, आईटी उद्योग का मुद्दा उचित अधिकारियों के साथ विचार-विमर्श का मुद्दा है। विचार-विमर्श कर लेने के बाद इसकी जानकारी दी जाएगी।
नई दिल्ली। औद्योगिक संगठन एसोचैम ने एक पेपर में बुधवार को कहा कि अमेरिका के एच1बी वीजा नियमों को सख्त करने से भारतीय आईटी कंपनियों को बढ़ते खर्चो का सामना करना पड़ेगा। उन्हें स्वदेश में कई कर्मचारियों को नौकरी से निकालना भी पड़ सकता है। पेपर के मुताबिक, कंप्यूटर जगत में 86 फीसदी एच-1बी वीजा भारतीयों को जारी होता रहा है। अब यह 60 फीसदी या उससे भी कम हो सकता है। इससे अमेरिका में भारतीयों द्वारा कमाए जाने वाले और स्वदेश भेजे जाने वाले धन में कमी होगी, जिससे भुगतान संतुलन में आठ से 10 फीसदी की कमी आएगी।

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औद्योगिक संगठन एसोचैम ने एक पेपर में बुधवार को कहा कि अमेरिका के एच1बी वीजा नियमों को सख्त करने से भारतीय आईटी कंपनियों को बढ़ते खर्चो का सामना करना पड़ेगा। उन्हें स्वदेश में कई कर्मचारियों को नौकरी से निकालना भी पड़ सकता है। पेपर के मुताबिक, कंप्यूटर जगत में 86 फीसदी एच-1बी वीजा भारतीयों को जारी होता रहा है। अब यह 60 फीसदी या उससे भी कम हो सकता है। इससे अमेरिका में भारतीयों द्वारा कमाए जाने वाले और स्वदेश भेजे जाने वाले धन में कमी होगी, जिससे भुगतान संतुलन में आठ से 10 फीसदी की कमी आएगी।

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  • Web Title:indo american searching jobs in india after h1b visa issue