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HT समिट: एक साल बाद देश के पास स्वच्छ, मजबूत व बड़ी अर्थव्यवस्था होगी : जेटली

नई दिल्ली। विशेष संवाददाता First Published:02-12-2016 11:16:21 AMLast Updated:02-12-2016 09:36:00 PM
HT समिट: एक साल बाद देश के पास स्वच्छ, मजबूत व बड़ी अर्थव्यवस्था होगी : जेटली

नोटबंदी को लेकर शुरुआती दिक्कतों को स्वीकार करते हुए वित्त मंत्री अरुण जेटली ने शुक्रवार को कहा कि एक साल बाद देश के पास एक बड़ी अर्थव्यवस्था होगी, जिसमें जीडीपी उच्च स्तर पर होगी और वह साफ सुथरी होगी। नकदी की कमी और बैंकों से लेकर एटीएम में लगी लंबी कतारों पर जेटली ने कहा कि जब कोई बड़ा बदलाव होता है तो थोड़ी उथलपुथल होती है लेकिन इसका आगे बड़ा फायदा होगा।

दो बड़े सुधार हुए :एचटी लीडरशिप समिट के उद्घाटन सत्र में वित्त मंत्री ने नोटबंदी से लेकर जीएसटी तक उठ रहे तमाम सवालों के बेबाकी से जवाब दिए। उन्होंने कह कि दो साल से उनसे पूछा जाता था कि बिग बैंग (बड़े) सुधार कहां हैं? अब वे सामने आ गए हैं। पहला 500 व 1000 के नोट बंद करना, जिससे देश में कालाधन पर रोक लगेगी और दूसरा जीएसटी को लाना जिसके जरिए देश में व्यापक कर सुधार करना शामिल हैं। इन दोनों कामों से सारे लेनदेन आयकर के तहत होंगे और देश एक स्वच्छ व मजबूत अर्थव्यवस्था की तरफ बढ़ेगा।

तीन माह की दिक्कत : नोटबंदी से लोगों को रही दिक्कतों के बारे में वित्त मंत्री ने कहा कि ऐसा नहीं है कि सरकार ने कोई तैयारी नहीं की। नकदी की कमी और लंबी लाइनों का अंदाजा था। आज भी लोग लाइन में हैं। वे कह रहे है कि उनको परेशानी है, लेकिन सरकार ने जो फैसला किया है उससे खुश हैं। यह समस्या केवल तीन माह की है। इसके बाद एक साल के भीतर देश में स्वच्छ व बड़ी अर्थव्यवस्था दिखेगी, जिसमें नोटों से ज्यादा डिजिटल लेनदेन होगा। उन्होंने कहा कि ज्यादा कर आएगा, दरें कम होंगी, बैंकों में ज्यादा धन होगा, जिससे सस्ता कर्ज उपलब्ध होगा।

तमगा बरकरार रहेगा : जेटली ने कहा कि बीते दो साल से भारतीय अर्थव्यवस्था लगातार उच्च आर्थिक वृद्धि हासिल कर रही है। उसका दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था का तमगा बरकरार है। इस साल भी भारत संभवत: सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था बना रहेगा।

बुवाई अधिक : नोटबंदी के विपरीत असर को नकारते हुए जेटली ने कहा कि रबी मौसम की बुवाई पिछले साल से अधिक हुई है, जबकि आटोमोबाइल क्षेत्र में बिक्री मिली जुली रही है।

कच्चा खाता-पक्का खाता नहीं चलेगा : जेटली ने देश को डिजिटल अर्थव्यवस्था की तरफ ले जाने की बात करते हुए स्पष्ट किया कि नोट पर्याप्त मात्रा में जारी किए जाएंगे, लेकिन 8 नवंबर को जिस संख्या में थे, उतने नहीं होंगे। उन्होंने मौजूदा खरीद फरोख्त के तरीकों पर प्रहार करते हुए कहा कि जब आप प्रॉपर्टी खरीदते हैं तो कुछ नकद व कुछ चेक से देते हैं। व्यापार करते हैं तो कुछ कच्चा खाता और कुछ पक्का खाता होता है। क्या विकसित अर्थव्यवस्था में इस तरह का व्यवहार होता है?

लोग डिजिटल हो रहे : वित्त मंत्री ने कहा कि लोग पहले से ही डिजिटल लेनदेन की तरफ आगे बढ़ रहे हैं। देश में 80 करोड़ क्रेडिट और डेबिट कार्ड में से 45 करोड़ कार्ड सक्रिय हैं। इसके अलावा 23 करोड़ ई-वॉलेट भी हैं जो कि पिछले डेढ़ साल में शुरू हुए हैं।

जीएसटी के बाद व्यापक असर दिखेगा : वित्त मंत्री ने कहा कि नोटबंदी के बाद जीएसटी के अमल में आने से अर्थव्यवस्था और सामाजिक तंत्र दोनों में ही बड़ा बदलाव दिखेगा। नए नोट छापने का काम पूरा होने और जीएसटी लागू होने के बाद देश में व्यापार व लोगों के जीवन जीने के तौर तरीकों में व्यापक बदलाव आएगा। तब नए परिवेश में ज्यादा खर्च डिजिटल तरीकों से होगा। अधिक सक्षम कर प्रशासन होगा जिसमें कर चोरी मुश्किल होगी। नई व्यवस्था में हर स्तर पर लेनदेन का पता होगा।

राजनीतिक चंदे को पारदर्शी बनाना अगला कदम : वित्त मंत्री ने संकेत दिए कि नोटबंदी व जीएसटी के बाद अगला कदम राजनीतिक चंदे को ज्यादा पारदर्शी बनाने का होगा। भाजपा ने लंबे समय से केवल चेक से ही चंदा लिया है। चंदा देने वाले खुद कहेंगे कि वे केवल चेक से ही दे सकेंगे, उसके बाहर से धन कहां से लाएं?

भाजपा नेताओं के मोबाइल पर कटाक्ष हुए थे : जेटली ने कहा कि 1996 में जब भाजपा की बैठक में पहली बार बड़े नेताओं के लिए सात मोबाइल फोन खरीदे गए थे तो उस बैठक में प्रस्ताव में चर्चा उन फोन की हुई थी। 15 साल पहले तब के संचार मंत्री रामविलास पासवान ने कहा था कि मोबाइल फोन अमीरों के लिए हैं, लेकिन आज वह आम आदमी की जरूरत हो गए हैं। बदलाव का हमेशा शुरू में विरोध होता है और बाद में स्वीकार्यता।

HT लीडरशिप समिट में वित्त मंत्री की प्रमुख बातें

  • संविधान संशोधन के अनुसार, जीएसटी को लागू करने में ज्यादा देर नहीं की जा सकती।
  • नोटबंदी से थोड़ी उथल-पुथल हो सकती है लेकिन दीर्घकालीन लाभ होंगे।
  • भारत पिछले साल की तरह इस साल भी दुनिया की सबसे तीव्र रफ्तार से वद्धि कर रही प्रमुख अर्थव्यवस्था हो सकता है।
  • अर्थव्यवस्था पर नोटबंदी के असर के बारे में वित्त मंत्री ने कहा कि रबी की बुवाई पिछले साल से अधिक है, वाहनों की बिक्री का रुझान मिला जुला है।
  • देश ने नोटबंदी का आम तौर पर स्वागत किया है, इस तिमाही में प्रतिकूल प्रभाव का अनुमान लगाना अभी मुश्किल है, इसका असर जरूर होगा लेकिन यह ज्यादा दिन नहीं रहेगा
  • नोटबंदी से कारोबार और व्यापार बढ़ेगा लेकिन उसमें इस्तेमाल होने वाली नकदी का स्तर घटेगा।
  • 16 सितंबर 2016 को हुए संविधान संशोधन के मुताबिक मौजूदा इनडायरेक्ट टैक्स सिस्टम को वर्ष के दौरान चलाया जा सकता है। 16 सितंबर 2017 से पहले जीएसटी लागू करना संवैधानिक बाध्यता

  • जीएसटी और नोटबंदी दोनों ही अर्थव्यवस्था की तस्वीर बदलने वाले होंगे, लेकिन सुधारों का विरोध करने वाले राज्यों को लेकर निवेशक सतर्कता बरतेंगे।

  • एक साल के अंदर भारत ऊंची जीडीपी वाली साफ सुथरी बड़ी अर्थव्यवस्था होगी जिसमें ब्याज दरें भी तर्कसंगत होंगी।

  • देश में करेंसी की कमी न हो, इसलिए 2,000 रुपये के नोट पहले छापे गए।

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