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राष्ट्रपति चुनावः चुनौती को सोनिया के नेतृत्व में एकजुटता की कोशिश

राष्ट्रपति चुनावः चुनौती को सोनिया के नेतृत्व में एकजुटता की कोशिश

उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में भाजपा की भारी जीत के बाद विपक्ष में इस बात की भावना तेजी से बढ़ रही है कि राष्ट्रपति चुनाव से पहले एकता स्थापित करने के प्रयास तेज किए जाएं।

माकपा महासचिव सीताराम येचुरी ने चुनाव में संयुक्त उम्मीदवार उतारने की संभावना तलाश करने के लिए कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात की। वहीं राजद प्रमुख लालू प्रसाद ने बिहार की तर्ज पर महागठबंधन बनाने की चर्चा की। उधर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भाजपा का मुकाबला करने के लिए क्षेत्रीय पार्टियों से एकजुट होने की अपील की। 

येचुरी ने सोनिया से गुरुवार को मुलाकात की। इसके पहले सोनिया ने बिहार के मुख्यमंत्री एवं जदयू अध्यक्ष नीतीश कुमार से भी मुलाकात की थी। येचुरी ने बैठक के बाद कहा कि एक संयुक्त उम्मीदवार के बारे में चर्चा के लिए हम सभी धर्मनिरपेक्ष विपक्षी दलों के साथ मुलाकात कर रहे हैं। 

वाम दल से जुड़े एक सूत्र ने कहा कि येचुरी और सोनिया गांधी ने ऐसा उम्मीदवार खड़ा करने की संभावना पर चर्चा की जो कि सभी धर्मनिरपेक्ष विपक्षी पार्टियों को मंजूर हो। सोनिया ने इस संबंध में माकपा नेता के सुझाव पर सकारात्मक जवाब दिया।

माकपा ने इस मुद्दे पर राकांपा प्रमुख शरद पवार और राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव से भी अनौपचारिक चर्चा की है। उन्होंने बताया, विपक्षी पार्टियां जल्द ही मुलाकात कर इस विषय पर चर्चा कर सकती हैं। 

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हालांकि जदयू प्रवक्ता केसी त्यागी ने कल कहा था कि कुमार और सोनिया की बैठक में राष्ट्रपति चुनाव के मुद्दे  पर चर्चा नहीं हुई थी। उन्होंने कहा कि पार्टी का मानना है कि एक मजबूत संयुक्त विपक्षी उम्मीदवार राष्ट्रीय हित में हैं।

उधर पटना में, लालू ने विपक्षी दलों के व्यापक गठबंधन पर बल दिया। उन्होंने कहा कि जब कभी सामाजिक न्याय या क्षेत्रीय राजनीतिक दल एक साथ आए हैं, हमें जीत मिली है। उन्होंने कहा कि हम चाहते हैं कि सांप्रदायिक और फासीवादी बलों को हराने के लिए मायावती, कांग्रेस, ममता बनर्जी, अखिलेश एक साथ आएं। 

लालू ने बिहार में राजद, जदयू और कांग्रेस गठबंधन का जिक्र किया जिसे 2015 में विधानसभा चुनाव में भारी जीत मिली थी और गठबंधन ने भाजपा के रथ को रोक दिया था। इस बीच ममता बनर्जी ने भाजपा का मुकाबला करने के लिए क्षेत्रीय पार्टियों से एकजुट होने की अपील की। 

उन्होंने आरोप लगाया कि भगवा पार्टी ने अपना विरोध करने वालों के खिलाफ प्रतिशोध की राजनीति का सहारा लिया है और वह देश को खतरनाक रास्ते पर ले जाना चाहती है।  

अगले छह साल के लिए तृणमूल कांग्रेस का अध्यक्ष फिर से चुने जाने के कुछ ही देर बाद ममता ने कोलकाता में पार्टी कार्यकर्ताओं से कहा कि देश में राजनीति के नाम पर जो हो रहा है वह राजनीति नहीं हैं। वक्त का तकाजा है कि सभी क्षेत्रीय पार्टियां एकजुट हों।

उन्होंने कहा कि मैं कुछ नहीं चाहती। मैं चाहती हूं कि आप सभी (क्षेत्रीय पार्टियां) प्रगति करें, मैं आपके समर्थन में हूं। मैं यह संदेश हर पार्टी को दे रही हूं। साथ आइए, एकजुट होइए, मेरी पार्टी आप सब के साथ खड़ी है।

ममता ने कहा कि भाजपा ने प्रतिशोध की राजनीति का सहारा लिया है। वह देश के संघीय ढांचे को तोड़ना चाहती है। भाजपा हमारी पार्टी के खिलाफ है क्योंकि हम लोगों के बारे में बात करते हैं। उन्होंने पार्टी के लोगों से नहीं डरने की अपील करते हुए कहा कि वे हमारे नेताओं के खिलाफ सीबीआई का इस्तेमाल कर हमें खत्म करना चाहते हैं लेकिन वे लोग खुद ही खत्म हो जाएंगे। तृणमूल कांग्रेस पलटवार करेगी। उन्होंने 2019 के लोकसभा चुनाव पर नजरें टिकाते हुए कहा कि चाहे जो कुछ भी साजिश हो, आप को जमीनी स्तर पर जाना होगा और कार्यकर्ताओं से मिलना होगा। हम हर किसी को साथ लेकर लड़ेंगे। उल्लेखनीय है कि राष्ट्रपति चुनाव जुलाई में होने हैं।

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  • Web Title: effort of solidarity for presidential election started by opposition parties