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प्यारा पम्मी

प्यारा पम्मी

बिन्दु और बन्टी में गहरी दोस्ती थी। दोनों सातवीं क्लास में पढ़ते थे। बिन्दु थोड़े चिड़चिड़े स्वभाव का था तो बन्टी खुशमिजाज। जब भी बिन्दु किसी बात को लेकर चिढ़ जाता तो बंटी उसे कुछ ऐसी बात कह देता कि उसे हंसी आ जाती थी। एक दिन बिन्दु को स्कूल से होमवर्क में मिले मैथ के कुछ सवाल समझ नहीं आ रहे थे तो उन्हें समझने के लिए उसने बन्टी से बात की। बन्टी ने उसे अपने घर पर बुलाया। बिन्दु जब बन्टी के घर पहुंचा तो उसने देखा कि गेट के अंदर से एक प्यारा सा डॉगी झांक रहा है। डॉगी बिन्दु को देखते ही भौंकने लगा, उसके बाद वह भौंकते हुए घर के अंदर चला गया। बिन्दु ने बेल बजाई तो बन्टी डॉगी के साथ बाहर आया। बिन्दु डर रहा था कि कहीं यह डॉगी उसे काट न ले। लेकिन बन्टी ने अपने डॉगी को उसी समय समझाया, ‘देखो डिंगी, ये मेरा दोस्त है। इस पर कभी नहीं भौंकना। चलो शेकहैंड करो।’ डिंगी ने बिन्दु के आगे अपना पंजा कर दिया और बिन्दु ने डरते-डरते उससे हाथ मिलाया। अब जब कभी बिन्दु बन्टी के घर आता तो बेधड़क होकर आता और आते ही सबसे पहले डिंगी को पुकारता- ‘डिंगी, कहां हो, फटाफट आओ’ और डिंगी आवाज सुनते ही फौरन दौड़ कर आता और आते ही अपने पिछले दोनों पैरों से खड़े होकर आगे के दोनों पंजे बिन्दु के हाथ में रख देता। बीच-बीच में वह डॉगी कुछ ऐसी हरकतें भी करता, जिन्हें देखकर बन्टी और बिन्दु दोनों ही हंसते। 
बिन्दु को डिंगी डॉगी बहुत अच्छा लगने लगा था। उसने एक दिन अपने मन में सोचा कि पापा अपने ऑफिस चले जाते हैं और मैं और मेरी बहन भी स्कूल चले जाते हैं। घर पर मम्मा ही अकेली रह जाती हैं। अकेले में वह कितनी बोर हो जाती होंगी? तो क्यों न पापा से कहकर एक प्यारा सा डॉगी मंगाया जाए। डॉगी होगा तो मम्मा बोर नहीं होंगी। दूसरा, घर की भी देखभाल होती रहेगी। शाम को पापा घर आए तो बिन्दु ने डॉगी की चर्चा छेड़ दी। उसने बन्टी के डॉगी की बड़ी तारीफ की और कहा कि पापा, हमारे घर भी एक डॉगी होना चाहिए। मम्मा ने तुरंत बिन्दु को डांटने के अंदाज में कहा -  ‘उसकी देखभाल कौन करेगा? वह जो रोजाना गंदगी करता है उसकी सफाई कौन करेगा? और सबसे बड़ी बात कि अगर उसने किसी आने-जाने वाले को काट लिया तो... पता है न पूरे पांच इंजेक्शन लगते हैं! डॉगी के खाने-पीने का ध्यान...और अगर वह बीमार हो गया तो डॉक्टर को दिखाओ सो अलग। बहुत झंझट वाला काम है। इसके बारे में सोचना भी मत।’ बिन्दु कुछ दिन तो चुप रहा, लेकिन फिर एक दिन उसने पापा से कहा- ‘पापा, मेरे कई दोस्तों के घर में डॉगी हैं। किसी को कोई परेशानी नहीं होती, सब मैनेज हो जाता है। मैं भी सफाई कर दिया करूंगा। अगर कोई मेहमान आता है तो हम डॉगी को पहले ही समझा देंगे कि वह उन पर भौंके नहीं।’ इस बार बिन्दु की बहन रिया भी उसकी हां में हां मिला रही थी। बिन्दु और रिया ने जैसे तैसे मम्मा को डॉगी के लिए मना ही लिया। 
एक दिन अचानक पापा एक छोटा और सफेद डॉगी ले आए। बिन्दु और रिया उसे देख कर इतने खुश हुए कि ऐसी खुशी मम्मा-पापा ने उनके चेहरे पर पहली बार देखी थी। आखिर बच्चों की खुशी में ही तो मम्मा-पापा की खुशी होती है। 
डॉगी का नाम पम्मी रखा गया। शुरू-शुरू में उसने बहुत तंग किया। पहनने के कई कपड़े मुंह से खींच-खींच कर फाड़ दिए। परदों पर लटक-लटक कर उन्हें चीर दिया। कहीं पर भी गंदगी कर देना, धुले बर्तनों में मुंह डाल देना, चीजों को इधर-उधर ले जाकर उन्हें काट देना, ऐसी कई सारी हरकत वह करने लगा था। एक दिन तो बिस्तर पर चढ़ कर ही गंदगी कर दी। मम्मा बहुत परेशान हो गईं। एक दिन उन्होंने पापा को बोल ही दिया, ‘इसे किसी को दे दो या कहीं छोड़ आओ। मेरे से अब बर्दाश्त नहीं होगा। यह डॉगी बहुत नुकसान कर रहा है।’ पापा ने मम्मा को समझाया- शुरू-शुरू में ये बहुत तंग करते हैं, बाद में सब समझ जाते हैं।
कुछ दिनों बाद पम्मी की शरारत वाली हरकतें कम होने लगी थीं। पापा और बिन्दु दोनों उसे ट्रेनिंग जो देने लगे थे। अब वह मम्मा को भी अच्छा लगने लगा था। वह अजीब हरकतें कर-कर के उनका खूब मनोरंजन करता था। उसकी वजह से मम्मा के अकेलेपन की बोरियत दूर हो गई थी। 
एक दिन की बात है, एक बिल्ली अचानक घर में किसी खिड़की के रास्तेे अंदर घुस आई। वह चुपके से किचन में गई और फ्रिज खोलकर दूध पर हाथ साफ करना चाह रही थी कि पम्मी की नजर उस पर पड़ गई। वह तुरंत भौंकता हुआ उसकी ओर दौड़ा। बिल्ली यह देख तुरंत भाग गई और फिर दोबारा आने की उसकी हिम्मत नहीं हुई । अब पम्मी घर का वफादार सदस्य बन गया था। एक दिन बिन्दु के मामा-मामी घर आए। उन्होंने दरवाजे पर बेल बजाई तो पम्मी दौड़ा-दौड़ा गेट पर आया। उन्हें देखकर वह उन पर खूब भौंका। भौंकने की आवाज सुनकर बिन्दु आया तो उसने देखा कि गेट पर मामा-मामी खड़े हैं। उसने पम्मी को डांटा और कहा- ‘ये मेरे मामा-मामी हैं। इन पर कभी मत भौंकना।’ यह सुन पम्मी चुप हो गया और बिन्दु के मामा-मामी के पैरों में लिपटने लगा, जैसे कि वह उनसे माफी मांग रहा हो कि आगे से ऐसी गलती नहीं होगी। पम्मी बिन्दु के सभी रिश्तेदारों को जान गया था और जब भी कोई रिश्तेदार घर आता तो पम्मी तुरंत पीछे के दोनों पैरों पर खड़ा होकर आगे के दोनों पंजों से हाथ जोड़ने वाली नमस्कार की मुद्रा में आ जाता था। बिन्दु के मौसाजी ने अभी नई कार खरीदी थी। वह कार लेकर घर आए और उस दिन वहीं रुक गए। कार घर के गेट के सामने ही खड़ी कर दी गई थी। रात के करीब तीन बजे होंगे। दो चोर कार चोरी करने के इरादे से उसका शीशा खोलने की कोशिश कर रहे थे। बस शीशा खुलने ही वाला था कि पम्मी घर के अंदर से गेट के पास आया और उसने कार का शीशा खोलते लोगों को देखते ही भौंकना शुरू कर दिया। पम्मी की भौंकने की आवाज सुनते ही घर में सभी लोग जग गए और गेट की तरफ आए। यह देख चोर तुरंत भाग लिए। बिन्दु के मौसाजी ने पम्मी को गोद में उठा लिया और कहा- यह तो वाकई कमाल का प्यारा डॉगी है। इसने मेरी कार चोरी होने से बचा ली। 
पम्मी के इस तरह के कामों से मम्मा बहुत खुश थीं। पापा ने एक दिन मजाक में उनसे कह ही दिया कि पम्मी को हम जिससे लेकर आए हैं, वह उसे वापस मांग रहा है। मम्मा ने तुरंत इंकार कर दिया और कहा कि पम्मी को हम किसी को नहीं देंगे। यह हमारा डॉगी है। अब हम जहां भी जाएंगे, पम्मी को साथ लेकर जाएंगे। अब पम्मी उनका प्यारा डॉगी जो बन गया था।        

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