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कैलकुलेटर वाली घड़ी

कैलकुलेटर वाली घड़ी

पूैैपू को इस बार जन्मदिन पर पापा ने एक सुंदर सी घड़ी दी थी। बड़े डायल की घड़ी, जिसमें कैलकुलेटर भी था। घड़ी देते हुए पापा ने कहा था, ‘जब कभी पार्टी में या किसी दोस्त के यहां जाओ तभी इसे पहनना।’ ‘जी पापा’ कहते हुए पैपू ने घड़ी को तुरंत पहन लिया और उसमें मौजूद फीचर्स को ध्यान से समझने लगा। थोड़ी देर में ही उसे समझ आ गया कि घड़ी में लगा कैलकुलेटर उसके लिए बेहद मददगार साबित होने वाला है। मैथ्स के जो सवाल वह हल नहीं कर पाता, उन्हें वह कैलकुलेटर की मदद से हल कर लेगा। इस तरह हर सवाल को सबसे पहले हल करने वाली पीहू को भी वह पछाड़ देगा।

मन ही मन यह सोच कर वह खुश था और बेसब्री से पापा के ऑफिस जाने का इंतजार कर रहा था, ताकि वह तुरंत अपनी बेस्ट फ्रेंड मीठी के घर जा सके। पापा के निकलते ही पैपू घड़ी पहन कर मीठी के घर पहुंच गया। ‘देख मीठी, पापा ने मुझे कैलकुलेटर वाली घड़ी दी है। अब हम दोनों मैथ्स के सवाल करने में इसकी मदद लिया करेंगे। हमें क्लास में मैम से डांट भी नहीं पड़ेगी और हम उस होशियार पीहू को भी पछाड़ देंगे।’ यह कहते समय पैपू की आवाज में अलग ही खुशी थी।
थोड़ी देर तक ध्यान से घड़ी को देखने के बाद मीठी बोली, ‘अच्छी है, पर मैं इसकी मदद नहीं लूंगी। मम्मी डांटेंगी। तुझे मदद लेनी है तो ले।’

‘तेरी मर्जी, तुझे मेरी बात नहीं माननी तो मत मान, लेकिन एग्जाम्स के बाद तुझे पछतावा होगा।’ उसके घर से निकलते हुए पैपू बोला।

अब पैपू कैलकुलेटर की मदद से मैथ्स के सवाल हल करने लगा। मैम जब भी कोई सवाल देतीं, वह सबसे पहले हल कर देता। धीरे-धीरे उसे कैलकुलेटर की आदत पड़ गई। सामान्य से जोड़-घटाव करने में भी उसे दिक्कत होने लगी। पर उसे इस बात से कोई फर्क भी नहीं पड़ रहा था। वह तो खुश था कि मैम की नजरों में उसकी गिनती अच्छे बच्चों में होने लगी है और पीहू के साथ-साथ मैम उसे भी पसंद करने लगी हैं।  

अगले दिन स्कूल पहुंचते ही सभी बच्चों को एग्जाम्स की लिस्ट मिली। सोमवार से एग्जाम्स थे और मैथ्स का एग्जाम सबसे आखिर में था। पैपू ने बाकी सभी एग्जाम्स की तो तैयारी की, लेकिन मैथ्स पर बिल्कुल ध्यान नहीं दिया। उसे लगा कि मैथ्स के एग्जाम में तो वह घड़ी के कैलकुलेटर से मदद ले लेगा।

सोमवार से एग्जाम शुरू होने के बाद एक-एक करके सारे एग्जाम्स होते जा रहे थे। शनिवार को मैथ्स के एग्जाम वाले दिन पैपू अपनी नई घड़ी पहनकर गया। उसे भरोसा था कि इसके सहारे वह सारे सवाल हल कर लेगा। उसका रिजल्ट बढ़िया रहेगा। लेकिन जैसे ही वह क्लास में घुसने लगा, टीचर ने उसे रोकते हुए कहा, ‘ठहरो, जरा यह घड़ी दिखाओ।’ घड़ी देखते ही उन्हें समझ आ गया कि इसमें कैलकुलेटर है। उन्होंने पहले तो पैपू को खूब डांटा, फिर घड़ी उतरवा कर अपने पास रख ली। मैडम की डांट और घड़ी उतरवाने की वजह से पैपू रुंआसा हो कर अपनी सीट पर चला गया। जैसे-तैसे वह दो-चार सवाल ही कर पाया, क्योंकि काफी समय से उसने कैलकुलेटर के बिना सवाल किए ही नहीं थे।

जल्द ही रिजल्ट भी आ गया। मैथ्स के पेपर में पैपू पास नहीं हो पाया। बाकी पेपरों में भी उसके नंबर कुछ खास अच्छे नहीं थे। पैपू रोने लगा। वह जानता था कि पापा उसे बहुत डांटेंगे। घर पहुंचने के बाद उसने खाना नहीं खाया। मम्मी के बहुत पूछने पर उसने सारी बात बताई। पैपू की बात सुन मम्मी के मुंह से सिर्फ इतना ही निकला, ‘सहज पके सो मीठा होए’ पैपू को इसका मतलब समझ नहीं आया। ‘

इसका क्या मतलब है मम्मी?’ उसने पूछा। ‘जो बच्चे शॉर्टकट नहीं अपनाते। स्टेप बाई स्टेप काम सीखते हैं, वे ही आगे बढ़ते हैं।’ मम्मी की बात सुनकर पैपू की नजरें झुक गईं। उसे अपनी गलती का एहसास हो गया। वह बोला, ‘मम्मा एनुअल एग्जाम तक मैं खूब मेहनत करके अपनी परफॉर्मेंस ठीक कर लूंगा। आप प्लीज, पापा से मत कहिएगा।’ ‘प्रॉमिस?’, मम्मी ने उसकी आंखों में झांकते हुए पूछा। उसने ‘हां’ में गर्दन हिलाई। मुस्कराते हुए मम्मी ने उसे गले से लगा लिया।    

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