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व्यक्ति पूज्य व श्रद्धेय हो सकता है, पूर्ण नहीं

श्री हनुमंत कथा

-बीबी कालेजियेट में चल रहे श्री हनुमंत कथा के तीसरे दिन उमड़े श्रद्धालु

-वृंदावन से आये प्रदीप भैया ने सुनाया अशोक वाटिका का प्रसंग

मुजफ्फरपुर। हिन्दुस्तान प्रतिनिधि

व्यक्ति पूज्य व श्रद्धेय हो सकता है। लेकिन कभी भी पूर्ण नहीं हो सकता। इसलिए किसी व्यक्ति विशेष को मत पकड़िए, बस धर्म को पकड़ें। ये बातें गुरुवार को बीबी कॉलेजिएट मैदान में चल रहे श्री हनुमंत कथा के तीसरे दिन व्यासपीठ से कथावाचक प्रदीप भैया ने कहीं। उन्होंने श्रोताओं से कहा कि आप कथा को श्रवण करें। कथावाचक को नहीं। समाज की विडंबना है कि लोग कथा के सूत्र को नहीं पकड़ते, बल्कि बाबा व संतों के पीछे चलने लगते हैं। कथा का महत्व समझने पर ही भगवान की कृपा होती है।

प्रदीप भैया ने अशोक वाटिका प्रसंग का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने कहा कि रावण माता सीता का हरण कर लंका ले आया था। लेकिन माता सीता ने एक बार भी नजर उठाकर रावण को नहीं देखा। यदि माता सीता ने मृग की माया में पड़ कर प्रभु श्रीराम को दूर नहीं किया होता, लक्ष्मण रेखा को पार नहीं किया होता तो रावण उन्हें उठा कर नहीं ले जा सकता था।

उन्होंने कहा कि पुत्र कितना भी बड़ा हो जाए लेकिन वह माता के समक्ष छोटा ही रहता है। माता सीता से मिलने के बाद हनुमान ने पूरे लंका को जला डाला। इसके बाद माता सीता को चिंता होने लगी। यही एक माता का पुत्र के प्रति प्रेम होता है। कथा के बीच में भजन मंडली भजन प्रस्तुत कर रही थी। इन भजनों पर महिला व पुरुष श्रोता झूम रहे थे।

पूर्व में भाजपा अध्यक्ष व कथा समिति के संयोजक राम सूरत राय, विधान पार्षद डॉ. नरेंद्र प्रसाद सिंह, अनिल कुमार, रवींद्र कुमार, सीमा बंधु, अनिल सिन्हा व डॉ. कृष्ण मोहन प्रसाद ने व्यासपीठ की पूजा की। कथा के दौरान भाजपा राष्ट्रीय मंत्री सह बेगूसराय के एमएलसी रजनीश कुमार, कुढ़नी विधायक केदार गुप्ता सहित कई गणमान्य उपस्थित थे।

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