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पेंशन, एरियर व सेवा पुस्तिका के लिए भटक रहे लेखपाल

राजधानी में 2005 में भर्ती हुए करीब 40 लेखपालों की तनख्वाह से हर माह सीपीएफ (कॉन्ट्रीब्यूटरी प्राविडेंट फंड)  के लिए 10 प्रतिशत पैसा कटता तो जरूर है लेकिन यह कहां जमा हो रहा है, कितना है इसकी कोई भी जानकारी लेखपालों के पास नहीं है। बीते दस वर्षों से नई पेंशन योजना के तहत सीपीएफ की पासबुक इन लेखपालों को आज तक नहीं मिली है।  यहीं नहीं आधा दर्जन रिटायर लेखपाल बीते छह महीने से पेंशन के लिए मारे- मारे घूम रहे हैं।

सेवा पुस्तिकाएं, जीपीएफ व एरियर जैसी समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं। लेखपाल संघ के जिलाध्यक्ष सुशील शुक्ला बताते हैं कि सीपीएफ पास बुक बनाई ही नहीं गई है। यही वजह ही लेखपालों के पास भविष्य में काम आने वाले पैसे का कोई हिसाब-किताब नहीं है। लेखपाल संघ ने बुधवार को इन सभी समस्याओं से प्रशासन अवगत कराया।

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  • Web Title:pension arrears and service manual for the wandering accountant