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विजिलेंस विभाग को आरटीआई के तहत लाने की याचिका खारिज

मायावती सरकार के दौरान गोपनीय जांचों की जानकारी देने से विभाग ने किया था इंकार लखनऊ। विधि संवाददाता हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने विजिलेंस विभाग को जन सूचना अधिकार (आरटीआई) अधिनियम के तहत लाने की याचिका को खारिज कर दिया है। याचिका में वर्ष 2010 के उस अधिसूचना को निरस्त किए जाने की मांग की गई थी जिसके द्वारा विजिलेंस विभाग को आरटीआई एक्ट के बाहर कर दिया गया है। यह आदेश न्यायमूर्ति एसएन शुक्ला व न्यायमूर्ति एसके सिंह (प्रथम) की खंडपीठ ने रिटायर्स आईएएस अधिकारी सत्य नारायन शुक्ला की ओर से वर्ष 2012 में दाखिल एक याचिका पर दिया। याची की ओर से कहा गया था कि उसने विजिलेंस विभाग से वर्ष 2007 से वर्ष 2011 के दौरान उन मामलों की लिस्ट मांगी थी जिनमें विभाग ने गोपनीय जांच के उपरांत मुकदमा दर्ज करने की अनुमति मांगी लेकिन सरकार ने मना कर दिया। साथ ही जिनमें अनुमति छह महीने से अधिक समय से न दी गई हो और वे मामले जिन्हें खुली जांच के बाद सरकार ने खत्म कर दिया हो। विजिलेंस विभाग ने उक्त जानकारियां देने से यह कहते हुए इंकार कर दिया कि 22 सितम्बर 2010 को अधिसूचना जारी करते हुए, विजिलेंस विभाग को आरटीआई एक्ट से बाहर कर दिया गया है। इस पर याची ने उक्त याचिका द्वारा वर्ष 2010 के अधिसूचना को चुनौती दी, साथ ही मांगी गई जानकारी देने का आदेश देने की मांग की। सरकार ने किया विरोधयाचिका का विरोध करते हुए राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि जो जानकारियां मांगी गई हैं, वे वैश्वासिक क्षमता के तहत हैं, साथ ही थर्ड पार्टी इंफॉरमेशन है। इसके अलावा आरटीआई के तहत वही जानकारियां दी जाती हैं जो उपलब्ध और विद्यमान हों। जबकि याची द्वारा जो जानकारियां मांगी गई हैं, वे डाटा या सांख्यिकी के रूप में रखने की आवश्यकता विभाग को नहीं है। राज्य सरकार ने दलील दी कि याची द्वारा यह भी स्पष्ट नहीं किया गया कि उक्त जानकारियां किस प्रकार भ्रष्टाचार या मानवाधिकार के उल्लंघन से सम्बंधित हैं। न्यायालय ने दलीलों को सुनने के बाद याचिका को खारिज करते हुए अपने निर्णय में कहा कि इस जानकारियों का प्रकटीकरण सरकारी गोपनीयता के प्रावधानों का उल्लंघन है। अधिकारिक गोपनीयता अधिनियम के तहत ऐसे प्रकटीकरण अपराध भी हैं। विजिलेंस विभाग में उच्च गोपनीयता की आवश्यकता अधिसूचना का बचाव करते हुए सरकार ने अपनी दलील में कहा कि विजिलेंस विभाग का कार्य जानकारियां एकत्रित करना, आपराधिक मामलों की जांच करना व अभियुक्तों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल करना है जिसके लिए उच्च गोपनीयता की आवश्यकता होती है। यह विभाग आर्थिक अपराध शाखा और एंटी करप्शन ऑर्गेनाइजेशन से भिन्न है।

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  • Web Title:highcourt