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कही अनकही कहानियों में है समाज के कई रूपों का वर्णन

निज संवाददाता First Published:19-10-2016 06:51:42 PMLast Updated:19-10-2016 07:00:13 PM

-डॉ. डीएस शुक्ला की पहली कहानी पुस्तक का विमोचन

-17 कहानियों के संग्रह पर लेखकों ने डाला प्रकाश

लखनऊ।

कही अनकही कहानियों में 17 कहानियों का वर्णन किया गया है। जिसमें दो पौराणिक हैं। इन सभी कहानियों में समाज के कई रूपों को बखूबी लिखा गया है। इस पुस्तक को पढ़ने के बाद कहा जा सकता है कि इसे किसी अनुभवी लेखक ने लिखा है। यह कहना था नई दिल्ली से आए लेखक आर सी त्रिपाठी का जो कि बुधवार को मोतीमहल लॉन के पुस्तक मेले में लेखक डॉ. डीएस शुक्ला की पहली पुस्तक कही अनकही कहानियां पुस्तक के विमोचन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत करने पहुंचे थे।

इस अवसर पर उन्होंने कहा कि इस पुस्तक में भीष्म की पीड़ा को नए नजरिए से दिखाया गया है। इसके साथ ही समाज में स्त्री के स्थान और मनोविकारों पर भी प्रकाश डाला गया है। उन्होंने कहा कि पुस्तक में कैसे प्रशासन की व्यवस्था चलती है, यह भी बेहद विस्तार से शामिल किया गया है। समारोह में मौजूद लखनऊ विश्वविद्यालय के पूर्व हिंदी विभागाध्यक्ष व डीन सूर्य प्रसाद दीक्षित ने पुस्तक की अन्य कहानियों जैसे दहेज अपशब्द, मासूम शिकार, किराए की कोख और बिल्ली जैसी कहानियों की चर्चा की। उन्होंने कहा कि सभी कहानियों में लेखक की संवेदना व भावना साफ तौर पर पढ़ने के लिए मिलती है। इस अवसर पर लेखक डॉ. डीएस शुक्ला ने कहा कि यह पहली पुस्तक है,जिसको इतने बड़े मंच पर विमोचित करने का अवसर मिल रहा है। उन्होंने कहा कि सभी कहानियों के पात्र वास्तविक हैं। सभी कहानियां उनके निजी जिंदगी के अनुभवों पर आधारित हैं। जिसे उन्होंने अपने शब्दों में सजा कर पेश किया है। इस अवसर पर उनकी पुस्तक को मेले में घूमने आए लोगों ने खरीदा भी और उसकी सराहना की।

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