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राज्यपाल की अपेक्षा नेता विरोधी दल के संबंध में समिति उचित फैसला लेगी

- संविधान विशेषज्ञ डा. सुभाष कश्यप ने अपने अभिमत से अवगत करायाविशेष संवाददाता- राज्य मुख्यालयराज्यपाल राम नाईक ने विधान सभा में नेता विरोधी दल को तय करने के विषय पर विधान सभा में कल हुई संक्षिप्त चर्चा पर संतोष व्यक्त किया है। उन्होंने अपेक्षा की है कि विधान सभा की नियम संबंधी समिति विचार-विमर्श कर इस विषय में उचित फैसला लेगी। राज्यपाल का मानना है कि निवर्तमान विधान सभा अध्यक्ष द्वारा विधान सभा में नेता विरोधी दल का नाम तय करना जनतांत्रिक सिद्धांतों के विरूद्ध है। राज्यपाल ने कहा है कि चुनाव के बाद नवगठित विधान सभा में नेता विरोधी दल को पूर्व या नवनिर्वाचित अध्यक्ष द्वारा नामित किए जाने के बारे में उत्तर प्रदेश में अब तक अलग-अलग परिपाटी अपनाई जाती रही है। इसके स्थान पर एक सुस्पष्ट, संविधान सम्मत व स्वस्थ लोकतांत्रिक परिपाटी स्थापित होनी चाहिए। उन्होंने कहा है कि वर्ष 1957 से अब तक चली आ रही भ्रमपूर्ण स्थिति और अपनाई गई अलग-अलग परिपाटी पर विराम लग सके और इस संबंध में उत्तर प्रदेश में भी एक सुस्पष्ट परिपाटी स्थापित की जा सके, जो लोकतंत्र व संविधान की भावना के अनुरूप हो।श्री नाईक ने नेता प्रतिपक्ष को निवर्तमान विधान सभा अध्यक्ष द्वारा तय करने के संबंध में संसदीय प्रक्रिया के विशेषज्ञ व पूर्व महासचिव लोकसभा डा. सुभाष सी कश्यप से परामर्श प्राप्त किया था। डा. कश्यप ने परामर्श में मुख्य रूप से निम्न बिन्दुओं को स्पष्ट किया है कि निवर्तमान विधान सभा अध्यक्ष द्वारा नेता विरोधी दल को तय करना जल्दबाजी में लिया गया फैसला है। निवर्तमान विधान सभा अध्यक्ष जो कि नवगठित विधान सभा का सदस्य भी न निर्वाचित हुआ हो, को नेता विरोधी दल को तय करने का निर्णय नए विधान सभा अध्यक्ष के लिए छोड़ देना चाहिए था। विधान सभा सचिवालय उत्तर प्रदेश संसदीय अनुभाग द्वारा 27 मार्च 2017 को अधिसूचना जारी की गयी थी कि नवगठित 17वीं विधान सभा के लिए राम गोविन्द चौधरी को नेता विरोधी दल के रूप में नामित किया गया है। राज्यपाल ने इसे असंवैधानिक व अलोकतांत्रिक पाते हुए संविधान के अनुच्छेद 175(2) के तहत नवगठित विधानसभा के 28 मार्च 2017 और 30 मार्च 2017 को संदेश भेजे थे। 17 मार्च 2017 को 16 वीं विधानसभा का विघटन हो गया था और 22 मार्च 2017 को राज्यपाल ने 17वीं विधानसभा के लिए प्रोटेम स्पीकर को नियुक्त किया था। नई विधान सभा की प्रथम बैठक 28 मार्च 2017 को होनी थी लेकिन इससे पूर्व ही 16वीं विधान सभा के अध्यक्ष द्वारा 27 मार्च 2017 को विधान सभा सदस्य व नेता समाजवादी पार्टी राम गोविन्द चैधरी को नेता विरोधी दल के रूप में नामित कर दिया गया था।

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