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लविवि रिचर्ड ए. हॉल

वरिष्ठ संवाददाता First Published:19-10-2016 08:03:39 PMLast Updated:19-10-2016 08:10:25 PM

आज का हजरतगंज, 1940 के न्यूयॉर्क जैसा

-अमरीका के रिचर्ड ए हॉल ने लविवि छात्रों से की स्मार्टसिटी पर बात

लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय व यूएस एम्बेसी नई दिल्ली की ओर से बुधवार को यहां 'कॉन्टेक्सट बेस्ड मोबिलिटी फॉर स्मार्ट सिटीज: इंटीग्रेशन ऑफ स्मार्ट सिटी ट्रांसपोर्टेशन मोड्स' विषय पर एक विशेष सत्र का आयोजन किया गया।

अमरीका से आए रिचर्ड ए हॉल ने यहां छात्रों से स्मार्टसिटी पर बात की और यह भी बताया कि स्मार्टसिटी में ट्रांसपोर्टेशन के माध्यम पर कहां-कहां और किन बदलावों की जरूरत है, यह भी बताया। सबसे पहले उन्होंने स्पष्ट रूप से यह कहा कि किसी भी शहर की प्लानिंग कोई बाहर से आकर नहीं कर सकता। कोई नया शहर बस रहा हो तो बात और है लेकिन पुराने शहर को नए दृष्टिकोण से प्लान नहीं किया जा सकता, बल्कि जो है उसी में बेहतरी के रास्ते निकालने होंगे। उन्होंने कहा कि यहां का हजरतगंज चौराहा वैसा ही लगता है जैसे 1940 में न्यूयॉर्क हुआ करता था। अमरीका में अब ट्रैफिक ग्रिड सिस्टम पर चलता है यानी हर सड़क पर पहले पैदल चलने वालों के लिए फिर साइकिल के लिए फिर गाड़ियों के लिए लेन बने हैं क्योंकि वहां सड़क केवल गाड़ियों के लिए नहीं होती। जबकि यहां सड़क पर सबकुछ एकसाथ चलता है, इसीलिए लोगों को ज्यादा सावधान रहकर भी चलना पड़ता है। पुराने लखनऊ की बात करें तो यहां इमारतें तोड़ना या गलियां खत्म करना विकल्प नहीं है क्योंकि इससे शहर की आत्मा खत्म हो जाएगी, बल्कि उन्हीं गलियों को खोलकर नए रास्ते बनाए जाने चाहिए।

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