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वाहनों के ई चालान में 34 जिले फिसड्डी निकले

परिवहन विभाग में भ्रष्टाचार रोकने की कवायद पर चेकिंग दलों ने लगाया ब्रेक

प्रमुख सचिव परिवहन की समीक्षा बैठक में खुली आरटीओ प्रवर्तन की पोल

ई-चालान में लखनऊ, कानपुर देहात अव्वल तो कानपुर व बाराबंकी रहा फिसड्डी

लखनऊ। निज संवाददाता

आरटीओ द्वारा वाहन चेकिंग के नाम पर हो रहे भष्टाचार को जड़ से खत्म करने की कवायद पर ब्रेक लग गया है। राजधानी सहित प्रदेश भर में बड़े ही जोर-शोर के साथ शुरू की ई-चालान व्यवस्था दिन-प्रतिदिन कोसों दूर चली गई। ई चालान के संबंध में हुई समीक्षा बैठक में 34 जिले के चेकिंग दलों ने ई चालान करने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई। ऐसे में चेकिंग दल वाहनों को मैनुअल चालान के जरिए बंद करके राजस्व वसूली में व्यस्त है। और वाहन स्वामी गाड़ी छुड़ाने के लिए आरटीओ कार्यालय का चक्कर लगाने को मजबूर है।

परिवहन विभाग के अधिकारी बतातें है कि ई चालान व्यवस्था का मकसद था कि गाड़ी मालिक से मौके पर ही जुर्माना जमा कराकर छोड़ दिया जाए। ताकि गाड़ी मालिक को भी अपनी गाड़ी छुड़ाने के लिए बेवजह आरटीओ कार्यालय का चक्कर न लगाने पड़े। और तीन बार लगातार गाड़ी पकड़े जाने का रिकार्ड ई चालान में दर्ज हो सके। जिससे गाड़ी का परमिट रद्द करने के संबंध में सभी रिकार्ड ई चालान से उपलब्ध हो जाए। मगर यहां तो चेकिंग दल मैनुअल रजिस्ट्रर से वाहनों का चालान करके भष्टाचार के जड़ को और मजबूत कर रहे है। ऐसे में अवैध वाहनों के धरपकड़ प्रक्रिया में पारदर्शिता आ सके। इसके लिए आरटीओ के चेकिंग दल ई चालान करने से दूर भाग रहे है।

एआरटीओ प्रथम की अगुवाई में लखनऊ रहा प्रथम

एआरटीओ प्रवर्तन प्रथम प्रवीर कुमार सिंह की अगुवाई में लखनऊ अव्वल रहा। चेकिंग दलों ने मिलकर राजधानी में तकरीबन पौने दो सौ ई-चालान करके खुब वाहवाही बटोरी है। इसी क्रम में बढ़िया प्रदर्शन करने वाले अन्य जनपदों में कानपुर देहात, उरई व फैजाबाद का भी नाम शामिल है। वहीं 34 जनपद ऐसे रहे जहां पर एआरटीओ प्रवर्तन टीम ने ई-चालान करने में दिलचस्पी ही नहीं दिखायी। वहीं घटिया प्रदर्शन करने वाले जनपदों में कानपुर नगर, रायबरेली, उन्नाव, हरदोई व बाराबंकी सहित तमाम अन्य जिलों का एआरटीओ प्रवर्तन दस्ता रहा।

जून तक सौ फीसदी ई चालान का दिया लक्ष्य

ई चालान के संबंध में संपन्न हुई समीक्षा बैठक में जून तक हर हाल में सौ फीसदी ई चालान से वाहनों का चालान करने का लक्ष्य चेकिंग दलों को दिया गया है। अब सवाल यह उठता है कि जब एक साल में लक्ष्य के नजदीक नहीं पहुंच सके चेकिंग दल तो अगले एक महीने में कैसे लक्ष्य को कैसे पूरा करेंगे? अब इस लक्ष्य को पूरा करने को लेकर चेकिंग दलों में खलबली मच गई है।

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  • Web Title:E-invoice 34 district of vehicles turned out to be the worst performers