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पर्यवेक्षकों की रिपोर्ट पर कांग्रेस देगी लोकसभा चुनाव में टिकट
लखनऊ, एजेंसी First Published:29-11-12 09:52 AMLast Updated:29-11-12 10:04 AM
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उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में आपसी गुटबाजी और गलत टिकट वितरण के कारण हार का सामना करने वाली कांग्रेस अब अगले लोकसभा चुनाव में ऐसी गलती दोहराना नहीं चाहती। इसीलिए शीर्ष नेतृत्व ने वर्ष 2014 में प्रस्तावित लोकसभा चुनाव के उम्मीदवारों के चयन के लिए पर्यवेक्षकों की नियुक्ति की है।

विधानसभा चुनाव में करारी हार के लिए कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने सार्वजनिक तौर पर उम्मीदवारों के चयन में गलती को एक प्रमुख वजह माना था। कांग्रेस नेतृत्व नहीं चाहता कि लोकसभा चुनाव में पार्टी का हाल विधानसभा जैसा हो। इसलिए पार्टी पुरानी गलती को अब नहीं दोहराना चाहती।

कांग्रेस नेतृत्व ने उत्तर प्रदेश में उम्मीदवारों के चयन के लिए दूसरे राज्यों के विधायकों को सभी आठ जोनों में बतौर पर्यवेक्षक नियुक्त किया है, जिसकी रिपोर्ट के आधार पर उम्मीदवारों का फैसला किया जाएगा।

मालूम हो कि कांग्रेस नेतृत्व ने आगामी लोकसभा चुनाव से पहले संगठन को मजबूत करने के लिए उत्तर प्रदेश को आठ जोन में बांटकर वहां एक-एक अध्यक्ष नियुक्त किया है।

एक वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने कहा कि कांग्रेस नेतृत्व की पूरी कोशिश है कि पार्टी आगामी लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में उसी तरह करिश्माई प्रदर्शन दोहराए, जो उसने 2009 के लोकसभा चुनाव में किया था।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष निर्मल खत्री ने बताया कि नियुक्त किए गए पर्यवेक्षक अपने-अपने प्रभार में पड़ने वाले लोकसभा क्षेत्रों में भ्रमण करके पार्टी नेताओं, कार्यकर्ताओं के साथ-साथ आम लोगों से मिलकर उनका मन टटोलेंगे और आगामी लोकसभा चुनाव के लिए उपयुक्त सम्भावित प्रत्याशियों के नामों की सूची पार्टी नेतृत्व को जल्द सौंपेंगे।

पश्चिमी क्षेत्र में पड़ने वाले जोन एक में मध्य प्रदेश के विधायक राजवर्धन सिंह और जोन दो में बिहार के विधायक जावेद अहमद, बुंदेलखण्ड में पड़ने वाले जोन तीन में महाराष्ट्र के विधायक असलम शेख, पूर्वाचल में पड़ने वाले जोन चार में पश्चिम बंगाल के विधायक सौमित्र खान और जोन पांच में पंजाब के विधायक अश्विनी शेकरी, उत्तर मध्य में पड़ने वाले जोन सात में पंजाब के पूर्व विधायक राणा के. पी. सिंह, मध्य क्षेत्र में पड़ने वाले जोन आठ में दिल्ली के विधायक अनिल चौधरी को नियुक्त किया गया है। जोन छह में फिलहाल पर्यवेक्षक की तैनाती नहीं हुई है।

कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता वीरेंद्र मदान ने कहा कि पर्यवेक्षकों की नियुक्ति से शीर्ष नेतृत्व को यह पता चल सकेगा कि उस क्षेत्र में किन-किन नेताओं को कार्यकर्ता और आम लोग उम्मीदवार के तौर पर चाहते हैं। साथ ही पार्टी के वर्तमान सांसदों को लेकर उनकी क्या राय है? इस प्रक्रिया से कुछ वर्तमान सांसदों के टिकट कट भी सकते हैं।

जानकारों का कहना है कि उत्तर प्रदेश में जिस तरह कांग्रेस का संगठन कमजोर है और पार्टी के बड़े नेताओं के बीच आपसी गुटबाजी है, उससे पार्टी के सामने अपनी 22 लोकसभा सीटों पर जीत दर्ज करके उन्हें बचाए रखना ही एक बड़ी चुनौती होगी।

 
 
 
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