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आखिरी पल में मां ने थामा था बेटी का हाथ
First Published:30-12-2012 10:42:34 PMLast Updated:00-00-0000 12:00:00 AM

 नई दिल्ली, वरिष्ठ संवाददाता

दिल्ली में अंतिम संस्कार के बाद छात्रा की तेरहवीं बलिया में ही होगी। रविवार सुबह अंतिम संस्कार के बाद परिजनों ने अपने गृहजनपद जाने की तैयारियां शुरू कर दी। अंतिम संस्कार संबंधी सभी कार्यक्रम पूरे कर परिजन 22 जनवरी को वापस दिल्ली लौट आएंगें। हिन्दुस्तान से बात करते हुए छात्रा के भाई ने बताया कि दीदी की उससे अकसर झगड़ा रहता था, फिर भी वह अपनी सारी बातें घर में बतानी थी।

यही कारण था कि परिवार के सभी लोग उसके दोस्त से भी परिचित थे। भाई ने बताया कि वह दीदी की मौत सिंगापुर में हुई इस बात का दुख नहीं है, लेकिन इस बात से सबको गहरा धक्का लगा है कि कि वहां जाने के बाद उसने कुछ भी नहीं कहा। वह जो सफदरजंग की आईसीयू में इशारे से या कभी लिखकर अपनी बात कहती थी, वह भी वहां नहीं हुआ। पीड़िता की गंभीर हालत देख माउंट एलिजाबेथ के डॉक्टरों ने आईसीयू के दरवाजे परिजनों के लिए खोल दिए थे, मां ने एक घंटे तक बेटी का हाथ अपने हाथ में रखे रखा।

उम्मीद थी कि इस दौरान वह कुछ कहेगी, लेकिन आखिरी सांस में भी उसकी सेहत ने उसकी जुबान का साथ नहीं दिया। भाई ने बताया कि उसने अपने दोस्त के बारे में परिवार को बता रखा था, बावजूद इसके वह परिवार की आर्थिक जिम्मेदारी उठाने को प्राथमिकता मानती थी, यही कारण था कि एक महीने पहले ही उसने भाई से कहा कि था कि अब मैं भी कमाने लगूंगी तो कोई दिक्कत नहीं होगी। मालूम हो कि एक महीने बाद ही उसकी इंटर्नशिप पूरी होने वाली थी, जिसके बाद उसे वेतन मिलने लगता।

मालूम हो कि उत्तमनगर के छात्रा के जिस घर में आज सन्नाटा पसरा था, वही घर कभी भाई बहन के प्यार भरे झगड़े का भी गवाह रहा है। इससे पहले पीड़िता के अंतिम संस्कारण में शामिल होने से बलिया से बड़े चाचा दिल्ली पहुंच गए थे।

 
 
 
 
 
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