सोमवार, 22 दिसम्बर, 2014 | 00:53 | IST
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लापरवाही के लिए बर्खास्त हुए तीन
First Published:30-12-12 10:42 PM

नई दिल्ली प्रमुख संवाददाता

दिल्ली सरकार ने चलती बस में नाबालिग लड़की के साथ छेड़छाड़ के मामले में मुख्य आरोपी सहित बस चालक और कंडक्टर को भी बर्खास्त कर दिया है। इन दोनों को अपनी जिम्मेदारी सही ढंग से पूरी न करते हुए मूकदर्शक बने रहने का खामियाजा नौकरी से हाथ धोकर भुगतना पड़ा। परवहिन मंत्री रमाकांत गोस्वामी ने बताया कि सरकार इस तरह के मामलों में किसी तरह की नरमी नहीं बरतेगी। उन्होंने कहा कि शनिवार रात कलस्टर सेवा की बस में हुई इस वारदात के दौरान बस चालक और कंडक्टर ने इस घिनौनी हरकत को रोकने के लिए कोई प्रयास नहीं किया।

जबकि डय़ूटी नियमों के मुताबिक नशे में धुत किसी भी व्यक्ति को बस में आने से से रोकने और ऐसी किसी घटना की स्थिति को रोकने की जिम्मेदारी चालक और परिचालक की है। इतना ही नहीं, 17 दसिंबर की घटना के बाद जारी किए गए निर्देशों में भी स्पष्ट रूप से कहा गया है कि ऐसी किसी घटना को रोक पाने की स्थिति में बस चालक को निकटतम पुलिस पिकेट या थाने में बस ले जानी होगी और कंडक्टर को पुलिस को फ ोन पर सूचना भी देनी होगी।

गोस्वामी ने कहा कि इस मामले में बस दो पुलिस पिकेट पार गई और न तो कंडक्टर ने पुलिस को सूचित किया और ना ही ड्राइवर ने बस को रोका। पुलिस बेरियर पर बस में लड़की को रोते देख पुलिस ने बस रोकी। उन्होंने कहा कि इसे लापरवाही मानते हुए बस चालक प्रहलाद और कंडक्टर तेजवीर को तत्काल प्रभाव से बर्खास्त कर दिया गया है। प्रहलाद पश्चिमी दिल्ली के बवाना का और तेजवीर हरियाणा के सोनीपत का रहने वाला है।

जबकि 16 वर्षीय लड़की के साथ छेड़छाड़ करने वाला मुख्य आरोपी रंजीत पालम का रहने वाला है और कलस्टर सेवा की किसी अन्य बस में कंडक्टर है। गोस्वामी ने कहा कि संबद्ध बस कलस्टर नंबर तीन पर चलती है। इसके संचालन का ठेका एबी ग्रेन कंपनी के पास है। उन्होंने कहा कि सोमवार को कंपनी की भी इस मामले में जिम्मेदारी तय की जाएगी इसके बाद ही कंपनी के विरुद्ध कोई कार्रवाई पर फैसला होगा। क्या है कलस्टर सेवा- दिल्ली परवहिन निगम (डीटीसी) की कलस्टर सेवा सरकार और निजी क्षेत्र की भागीदारी से चलती है।

इसमें दोनों पक्षों के बीच हुए समझौते के मुताबिक कलस्टर सेवा का संचालन निजी कंपनी करती है। सरकार की एजेंसी दिल्ली इंट्रीगेटेड मल्टीट्रांजिट ट्रांसपोर्ट सिस्टम (डिम्ट्स) किसी कंपनी को ठेका देने और इनके संचालन पर नगिरानी रखती है। फिलहाल तीन कलस्टर रूटों पर लगभग तीन सौ बसें चल रही हैं। सरकार का इस सेवा के तहत कुल 17 रूट पर लगभग 2000 बसें चलाने का लक्ष्य है। क्या हैं ताजा सुरक्षा इंतजाम- दिल्ली सरकार ने सार्वजनिक परवहिन में महिलाओं की सुरक्षा सुनशि्चित करने के लिए दो दिन पहले ही डीटीसी की रात्रि सेवा की बसों में होमगार्ड के जवान तैनात किए हैं।

साथ ही रात्रिसेवा में चल रही 42 बसों की संख्या भी बढ़ा कर 85 कर दी गई है। हालांकि दो दिन बाद ही हुई इस वारदात के लिए परवहिन मंत्री गोस्वामी ने बचाव में दलील दी है कि गार्ड की तैनाती रात्रिसेवा में की गई है। जबकि जिस बस में वारदात हुई वह रात्रिसेवा की बस नहीं थी। ऐसे में महिलाओं क ो रात में सुरक्षित यात्रा के लिए 11 बजने का इंतजार करना होगा। क्योंकि रात्रिसेवा रात 11 बजे से सुबह 5 बजे तक चलती है।

स्पष्ट है कि 11 बजे तक चलने वाली बसों में महिलाओं को सुरक्षित यात्रा के लिए कंडक्टर और ड्राइवर की कृपा पर निर्भर रहना होगा। रात्रिसेवा का हाल- सरकार रात्रि सेवा में सुरक्षा इंतजामों के दावे कितने भी कर ले लेकिन इन दावों की पोल रात्रिसेवा में लगीं खटारा बसें अपने आप खोल देती हैं। दूसरा इस सेवा में बसों की संख्या दोगुनी करने की जानकारी लोगों को देने के लिए सरकार की ओर से पर्याप्त प्रचार प्रसार भी नहीं किया गया।

डीटीसी के पुराने बेड़े की खस्ता हाल बसें रात्रि सेवा में लगानेका कोई कारण परवहिन विभाग के अधिकारियों के पास नही ंहै। विभाग की एकमात्र दलील है बसों की कमी। उनका कहना है कि दिन में सभी रूट पर नई बसें चल रही हैं ऐसे में रात को डिमांड कम होने के कारण पुरानी बसें लगाई जा रही हैं। कुल मिलाकर सुरक्षा के मामले में भी परवहिन विभाग मुनाफे की सोच से खुद को मुक्त नहीं कर पा रहा है।

लो फ्लोर का भी हाल दुरुस्त नहीं- रात्रिसेवा से इतर दिन में सड़कों पर दौड़ रही लो फलोर बसों का हाल भी किसी से छुपा नहीं है। हाल ही में हिंदुस्तान की पड़ताल में इन बसों की खामियां भी सामने आई थीं। दरवाजे बंद हुए बगैर भी दौड़ती हैं बसेंबगैर अग्नशिमन यंत्र के आग पर कैसे पाएंगे काबू हथौड़ा भी नहीं है अब बसों में इमरजेंसी गेट भी नहीं है दुरुस्तकई बसें पाई गई खस्ताहालफर्स्ट एड बॉक्स या तौलिया रखने की जगह यात्रियों की मदद के लिए लगा एलार्म भी नहीं करता काम लैपटॉप और मोबाइल चार्जिग बोर्ड भी काम का नहींं।

 
 
 
 
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