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सेना भें भर्ती होकर देश सेवा करना चाहता था गुलवेज
First Published:27-12-12 11:35 PM

नई दिल्ली, कार्यालय संवाददाता

बचपन से ही धर्म-कर्म में पूरी आस्था रखने वाला गुलवेज अहमद सेना में भर्ती होकर देश सेवा करना चाहता था लेकिन नियति ने उसे हमसे छीन लिया। गुलवेज के बारे में बात कर भावुक होते हुए उसके छोटे चाचा चांद ने कहा कि वह काफी होनहार था और सेना में भर्ती होता चाहता था। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय पर्वतारोही शिविर में हिस्सा लेने के बाद गुलवेज काफी उत्साहित था। उन्होंने कहा कि बचपन से ही धर्मकर्म में अस्था रखने वाले गुलवेज महज कम उम्र में ही पवित्र कुरान शरीफ को याद कर लिया और हाफिज बन गया था।

कढ़ाई का काम करने वाले हाजी कपिल का 18 वर्षीय बेटा गुलवेज पिछले सात सालों से रमजान के महीने में मस्जिद में रोजा इफ्तार के बाद पढ़ी जाने वाली नमाज (तरावी) पढ़ाता था। उसके चाचा ने बताया कि एनसीसी के इस कैंप को लेकर भी वह काफी उत्साहित था और पढ़ाई में अव्वल आने के कारण उसे कई बार पुरस्कार भी दिए गए। उसकी मौत से उसका परिवार शोक में डूबा हुआ है। बलदेव पार्क के मकान संख्या सी-29, गली संख्या-12, ओल्ड गोविन्दपुरा निवासी हाजी कफिल अपनी पत्नी जहांआरा, बेटा शावेज अहमद, शोएब अहमद, फैसल अहमद व एक बेटी फरीन के साथ रहते हैं।

हाजी कफिल के चार पुत्र व एक पुत्री में दूसरे नंबर का 18 वर्षीय बेटा गुलवेज अहमद हमेशा से देश सेवा करने और सेना में भर्ती होने का सपना देखा करता था। कम उम्र में हाफिज बनने की वजह से हाजी कपिल व उसके परिवार को गुलवेज पर नाज था। इसके पहले भी गुलवेज एनसीसी की ओर से कैम्प में जा चुका है। गुलवेज के मौसा फईमउद्दीन ने बताया कि गुलवेज हरदिल अजीज और होशियार था। वह किसी को भी अपना बना लेता था।

पड़ोसी आदिल, मोहम्मद अयूब, गुड्डू का कहना था कि गुलवेज हरफन मौला शख्स था, गुलवेज को हम कभी भूल नहीं पाएंगे। उसकी कमी हम लोगों को हमेशा खलती रहेगी।

 
 
 
 
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