शनिवार, 30 मई, 2015 | 03:50 | IST
 |  Site Image Loading Image Loading
Image Loading    केजरीवाल को सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट का डबल झटका, एलजी ही करेंगे नियुक्ति   क्या दाऊद को जल्द भारत ला रही सरकार बीएमडब्ल्यू ने पेश किया ग्रान कूपे का नया मॉडल  चीन में आमिर का एलियन अवतार हुआ हिट चीन में आमिर का एलियन अवतार हुआ हिट सायना की हार के साथ भारतीय चुनौती समाप्त 26 लड़कियों से रेप के आरोपी टीचर को मौत की सजा दिल्ली एयरपोर्ट पर रेडियोएक्टिव पदार्थ लीक से मचा हड़कंप, काबू में लीकेज स्पेलिंग बी प्रतियोगिता में फिर से भारतीयों का बोलबाला सरकारी नौकरीः 400 से ज्यादा दसवीं पास से लेकर इंजीनियर तक वैकेंसी
यहां भी महफूज नहीं हैं लड़कियां
First Published:25-12-12 11:28 PM

गाजियाबाद। वरिष्ठ संवाददाता

महिलाओं के लिए शहर का माहौली भी महफूज नहीं है। यहां पर लड़कियां शाम छह बजे के बाद घर से अकेला निकलने में डरती हैं। अगर वह अकेले निकलती हैं तो असामाजिक तत्व उन पर भद्दे कमेंट करते हैं और वह छेड़छाड़ करने से भी बाज नहीं आते हैं।

शहर से दिल्ली पढ़ने के लिए जाने वाली लड़कियों के लिए बस-ट्रेन में सफर करना भी दुश्वार है। वहां भी उनका शारीरिक शोषण होता है। ऐसी घटनाओं का शिकार दो लड़कियों ने हिन्दुस्तान को ईमेल भेजकर अपनी आपबीती बताई है। उनकी आपबीती सुनकर किसी के भी रोंगटे खड़े हो सकते हैं। ------मनचलों ने धक्का दे दिया, लोग तमाशबीन बने रहेमैं प्रताप वहिार में रहती हूं। लॉ की छात्रा हूं। यहां लाल टंकी के पास असामाजिक तत्वों का जमावड़ा लगा रहता है।

ये लोग यहां बैठकर नशा करते रहते हैं और आती-जाती लड़कियों पर भद्दे कमेंट करते हैं और छेड़छाड़ से भी बाज नहीं आते हैं। लोग खड़े रहते हैं, लेकिन कोई कुछ नहीं करता है। शाम छह बजे के बाद यहां से निकलने में डर लगाता है। कई बार विजय नगर चौकी में इसकी शिकायत की गई, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। एक बार तो लाल टंकी के पास कुछ लड़कों ने मुझे धक्का दे दिया। वहां बहुत लोग खड़े रहे, लेकिन किसी ने मदद नहीं की।

पुलिस चौकी जाकर खुद इसकी शिकायत की, लेकिन कार्रवाई नहीं हई। ------ट्रेन और बसों में रोज होती हूं छेड़छाड़ का शिकारमैं गाजियाबाद में रहती हूं और दिल्ली विश्वविद्यालय के एक कॉलेज में पढ़ती हूं। मुझे रोजाना बस या ट्रेन से सफर करना पड़ता है। रोज शारीरिक शोषण का शिकार होती हूं। ट्रेनों में लेडीज कोच होते हैं, लेकिन उनमें पुरुषों की संख्य ज्यादा हेाती है। अगर किसी से कुछ कहो तो वह बदसलूकी करने लगते हैं। दिल्ली और नई दिल्ली स्टेशन तो लड़कियों के लिए बने ही नहीं हैं।

स्टेशन पर कोई भी छेड़छाड़ कर देता है। एक बार मैं नई दिल्ली रेलवे स्टेशन के पूछताछ केंद्र पर गई तो वहां लोगों ने घेरकर मेरे साथ छेड़छाड़ शुरू कर दी। किसी तरह मैं वहां से निकली। पुरानी दिल्ली के बस स्टैंड पर नशेडिम्यों का जमावड़ा लगा रहता है। एक बार मैं अपनी फ्रेंड के साथ जा रही थी। एक युवक ने कमेंट किया तो फ्रेंड ने जवाब दिया। इस पर वहां मौजूद लोगों ने युवक को कुछ नहीं कहा और उल्टे हमें समझाने लगे।

अब कॉलेज जाने का मन नहीं करता है।

 
 
 
 
 
जरूर पढ़ें
Image Loadingअंतिम 11 में जगह मिलने की नहीं थी उम्मीद : सरफराज
इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) में अपने प्रदर्शन से प्रभावित करने वाले रॉयल चैलेंजर्स बेंगलोर (आरसीबी) के सबसे युवा बल्लेबाज सरफराज खान का कहना है कि उन्हें क्रिस गेल, ए.बी. डीविलियर्स और विराट कोहली जैसे विध्वंसक बल्लेबाजों के बीच अंतिम 11 में जगह मिलने का यकीन नहीं था और नम्बर छह की बेहद महत्वपूर्ण स्थान पर मौका दिये जाने से उनका आत्मविश्वास सातवें आसमान पर है।
 
क्रिकेट स्कोरबोर्ड