शनिवार, 01 नवम्बर, 2014 | 19:28 | IST
  RSS |    Site Image Loading Image Loading
Image Loading    पार्टी में सभी तबकों को शामिल किया जाना चाहिए: मोदी  मथुरा में भाजपा युवा मोर्चा का पुलिस पर पथराव, दर्जनों जख्मी मुख्यमंत्री कार्यालय में बदलाव करना चाहते हैं फड़नवीस  चीन ने पूरा किया चांद से वापसी का पहला मिशन  आज चार राज्य मना रहे हैं स्थापना दिवस  जम्मू-कश्मीर में बदले जा सकते हैं मतदान केंद्र 'एक भारत, श्रेष्ठ भारत' का वीडियो यूट्यूब पर हिट दिग्विजय सिंह की सलाह, कांग्रेस की कमान अपने हाथ में लें राहुल गांधी 'दिल्ली को फिर केंद्र शासित बनाने की फिराक में भाजपा' जनता सब देख रही है, बीजेपी हल्के में न लेः उद्धव ठाकरे
जीवन जीने की कला सिखाती है गीता
First Published:23-12-12 09:39 PM

गाजियाबाद। हमारे संवाददाता

नंदग्राम स्थित संत आसाराम आश्रम में रविवार को गीता जयंती का कार्यक्रम श्रद्धाभाव के साथ मनाया गया। गीता जयंती के उपलक्ष्य पर संत आसाराम बापू की सुपुत्री प्रेरणामुर्ती भारती श्रीजी के पावन सानिध्य में सत्संग का आयोजन किया गया। भक्तों में सत्संग का रस बिखेरते हुए उन्होंने कहा कि गीता प्राणीमात्र को जीवन जीने की कला व अमरता का वरदान देती है। जैसे मनुष्य पुराने वस्त्रों को त्यागकर दूसरे नए वस्त्रों को ग्रहण करता है। वैसे ही जीवात्मा पुराने शरीर को त्यागकर दूसरे नए शरीर को प्राप्त होता है, इसलिए मृत्यु से डरों मत और डराओं मत।

उन्होंने कहा कि गीता बीते हुए शोक को हटा देती है। भविष्य के भय को उखाड़ फेंकती है। बड़े से बड़ा नास्तिक की गीता से मुक्ति नशि्चित है। यह भगवान के श्रीमुख से दिया गया ज्ञान है। उन्होंने बताया कि गीता यह नहीं कहती कि तुम यह करों या वह करो। ऐसी वेशभूषा पहनो, ऐसा तिलक करो, ऐसा नियम करो, ऐसा मजहव पालो। कितने ही जन्मों का कर्म हो, कितने ही पाप-ताप हो, नासमझी और ज्ञान की अशुद्धि हो, एक बार गुरु मंत्र मिल गया और गल गए तो आत्म ज्ञान के रास्ते बेड़ा पार हो जाएगा। इस मौके पर आश्रम समिति की ओर से एससी गौड़, एमपी शर्मा, पवन झा, शवशिंकर यादव, ब्रजेश वर्मा, डॉ. नरेंद्र शर्मा, पूर्णिमा ग्रोवर सहित तमाम लोग मौजूद थे।

 
 
 
 
टिप्पणियाँ