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पांच साल से चल रहा दुष्कर्म का केस
First Published:19-12-2012 11:45:54 PMLast Updated:00-00-0000 12:00:00 AM

गाजियाबाद। वरिष्ठ संवाददाता

दुष्कर्म के केस में यदि सुनवाई तेजी से हो तो पीड़ित को इंसाफ भी जल्दी मिले, लेकिन इंसाफ की जद्दोजहद में कई वर्ष बीत जाते हैं। कानून के जानकारों का मानना है कि ऐसे मामलों में क्योंकि कोई गवाह मिलना मुश्किल होता है, इसलिए ज्यादा दिक्कत आती है। अधविक्ता सिंधुप्रभा झा के मुताबिक लोनी थानाक्षेत्र में वर्ष 2005 में हुए दुष्कर्म के एक मामले की सुनवाई कई वर्षो से चल रही है। गवाह मिलना मुश्किल है, इसलिए इंसाफ में देरी की संभावनाएं भी बढ़ जाती हैं।

17 वर्षीय किशोरी को घर में अकेला पाकर पड़ाेस के एक लड़के ने उससे दुष्कर्म किया था। युवती अपने लिए इंसाफ मांग रही है। आरोपी जमानत पर बाहर है। पीड़िता ने अभी तक शादी नहीं की है। वह अपने साथ हुए अत्याचार के आरोपियों की सजा की मांग कर रही है। अधविक्ता का कहना है कि अक्सर गवाहों की अनुपस्थिति में अभियुक्त बरी हो जाते हैं। कोर्ट में चल रहे केसों पर ही नजर डालें तो इस साल 30 सितंबर तक दुष्कर्म के 90 मामलों में आरोपियों को कोर्ट ने साक्ष्य के अभाव में बरी किया है।

दुष्कर्म के केस में निर्णय बेहद पेचीदा माना जाता है क्योंकि सिर्फ महिला की गवाही ही आरोपी के खिलाफ होती है। हालांकि यह सजा दिलाने के लिए काफी है, लेकिन कई बार मेडिकल रिपोर्ट भी आरोपी को बचाने में काफी रहती है। सबसे अधिक परेशानी दुष्कर्म के प्रयास मामले में होती है। ं।

 
 
 
 
 
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