रविवार, 02 अगस्त, 2015 | 03:45 | IST
 |  Site Image Loading Image Loading
Image Loading    बिहार का चुनाव बना प्रतिष्ठा का प्रश्न, झारखंड के भाजपाइयों ने डाला बिहार में डाला याकूब को फांसी दिए जाने के विरोध में सुप्रीम कोर्ट के डिप्टी रजिस्ट्रार ने दिया इस्तीफा दिल्ली में तेज हुआ पोस्टर वार, केजरीवाल सरकार के विज्ञापनों के खिलाफ भाजपा ने लगाए पोस्टर पूर्व गृह मंत्री सुशील शिंदे ने कहा, मैंने संसद में हिंदू आतंकवाद शब्द का इस्तेमाल कभी नहीं किया  पाकिस्तानी रेंजर्स ने किया सीजफायर का उल्लंघन, बीएसफ ने दिया करारा जवाब खेल रत्न के लिए सानिया के नाम की सिफारिश भाजपा सांसद वरुण गांधी का बयान, 94 फीसदी दलित, अल्पसंख्यक समुदाय को मिली फांसी की सजा विमान हादसे में ओसामा बिन लादेन के परिवार के सदस्यों की मौत  10 रुपए में ऐप उपलब्ध कराएगा गूगल प्ले  ISIS की शर्मनाक हरकत: चार साल के बच्चे को दी तलवार और कहा...मां का सिर काट डालो
कहीं भी सुरक्षित नहीं हैं महिलाएं
First Published:19-12-2012 11:45:54 PMLast Updated:00-00-0000 12:00:00 AM

गाजियाबाद। ट्रांस हिंडन

दिल्ली में बस में हुई वारदात को लेकर सभी सकते में हैं। महिलाओं के साथ हो रही इस प्रकार की घटनाओं से सभी आहत हैं। इस तरह की आए दिन होने वाली घटनाओं से दहशत इस कदर है कि महिलाएं अपने को रात ही नहीं दिन भी सुरक्षित महसूस नहीं करती। कामकाजी महिलाओं के साथ छात्राओं के साथ छेड़ाखानी आम बात हो चली है।

घर से बाहर निकलना अभशिाप बन गया है-महिलाएं अब कहीं भी सुरक्षित नहीं हैं।

अपने घर से निकलने के बाद कौन क्या कहता है कई बार तो सुनने के बाद भी नजरअंदाज करना पड़ता है। सुनसान क्षेत्र में तो महिलाओं व लड़कियों का निकलना भी दुश्वार है। घर से बाहर निकलना मानो महिलाओं के लिए अभशिाप बन गया है। प्रशासन को इतना कड़ा कदम उठाना चाहिए कि कोई भी गलत हरकत करने वाले दोबारा ऐसे करने के लिए सोच भी न सके। सविता त्यागी (शिक्षिका)-------छेड़खानी होता देखने वालों को आना होगा आगे दिल्ली से गाजियाबाद आने में प्राइवेट वाहनों का इस्तेमाल करना सबसे बड़ा खतरा है।

अपने वाहन के बावजूद भी लोग गंदे कमेंट करने से नहीं कतराते। महिलाओं के लिए बसें बिल्कुल सुरिक्षत नहीं हैं। बसों में सरेआम महिलाओं व लड़कियों से छेड़ाखानी हो जाती है, लेकिन कोई विरोध नहीं करता। इसके लिए लोगों को जागरूक करने की जरूरत हैं। डा. सुनैना त्रिसल (शिक्षिका, सरकारी कॉलेज)-----कड़ा कानून बने तो कुछ राहत मिले हमारा कानून इतना लचीला है कि महिलाओं से छेड़ाखानी करने वाले गिरफ्त में नहीं आ पाते। इसके लिए कड़े कानून बनने चाहिए, ताकि महिलाओं के साथ छेड़खानी करने वालों की सजा देख दूसरा कोई ऐसा करने की हिम्मत न उठा सके।

घर से बाहर निकलो तो रिक्शा, ऑटो कोई सुरक्षित नहीं है। बाजार में जाओ तो वहां भी आवारा लोगों की कमी नहीं है। समाज के माहौल को देख घरवाले शाम के समय तो घर से बाहर जाने की इजाजत तक नहीं देते। इस प्रकार की घटनाओं से महिलाओं के कैरियर पर भी प्रभाव पडेम्गा। ललिता (विधि छात्रा)-----छेड़छाड़ व फब्तियां तो रोज की बातमेट्रो हो, बस स्टैंड या फिर मुख्य सड़कों पर लड़कियां कहीं भी सुरक्षित नहीं रह गई हैं। दफ्तर से घर के बीच कब और कहां कौन सी घटना घट जाए कोई नहीं जानता।

ईव टीजिंग और कमेंट तो रोज की बात है। नौकरीपेशा लड़कियों के साथ आए दिन होने वाली इस तरह की घटनाएं शर्मनाक हैं। नेहा मेहता (जनरल मैनेजर, टूर एंड ट्रेवल्स कंपनी)-----विरोध करने पर अकेली पड़ जाती हैं लड़कियांबसों, मेट्रो ऑटो हर जगह असामाजिक तत्वों से दो-चार होना पड़ता है। बात बढ़ने पर अगर कोई लड़की विरोध करने की कोशशि भी करे तो कोई भी साथ देता नहीं देता। लड़कियों के आसपास सभी लोग तमाशबीन बने रहते हैं। यही इस तरह के अपराधों के बढ़ने की मुख्य वजह है।

वैशाली (शिक्षिका, प्राइवेट इंस्टीट्यूट)-----रोजाना बढ़ रहे अपराधियों के हौसलेआए दिन अपराधियों के हौसले बुलंद होते जा रहे हैं। लड़कियां इस तरह की घटनाओं के खिलाफ आवाज उठाएं, यह बेहद जरूरी है, लेकिन इससे भी ज्यादा जरूरी है, सार्वजनिक स्थानों पर लड़कियों की सुरक्षा। दिल्ली की घटना से पता चलता है कि किसी के मामले में कोई पड़ना ही नहीं चाहता। इसी के चलते अपराधियों को शह मिलती है। स्निग्धा उपाध्याय (डीयू की छात्रा )।

 
 
 
 
 
जरूर पढ़ें
क्रिकेट
Image Loadingआक्रामक शैली बरकरार रखें कोहली: द्रविड़
राहुल द्रविड़ को बतौर टेस्ट कप्तान श्रीलंका में पहली पूर्ण सीरीज खेलने जा रहे विराट कोहली के कामयाब रहने का यकीन है और उन्होंने कहा कि कोहली को अपनी आक्रामक शैली नहीं छोड़नी चाहिए।
 
क्रिकेट स्कोरबोर्ड
 
Image Loading

जब बीमार पड़ा संता...
जीतो बीमार पति से: जानवर के डॉक्टर को मिलो तब आराम मिलेगा!
संता: वो क्यों?
जीतो: रोज़ सुबह मुर्गे की तरह जल्दी उठ जाते हो, घोड़े की तरह भाग के ऑफिस जाते हो, गधे की तरह दिनभर काम करते हो, घर आकर परिवार पर कुत्ते की तरह भोंकते हो, और रात को खाकर भैंस की तरह सो जाते हो, बेचारा इंसानों का डॉक्टर आपका क्या इलाज करेगा?