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फिर थमेगा नोएडा का विकास
First Published:11-12-12 12:53 AM

नोएडा। वरिष्ठ संवाददाता। चेयरमैन राकेश बहादुर व सीईओ संजीव सरन के स्थानांतरण से एक बार फिर शहर में विकास कार्यो की रफ्तार धीमी हो जाएगी। दरअसल दोनों अधिकारियों का मामला न्यायालय में होने के कारण चेयरमैन और सीईओ के कार्यकाल को लेकर अनशि्चितता बनी हुई थी। जिससे बोर्ड बैठक लगातार टलती आ रही है। नए अधिकारियों के आने तक बोर्ड बैठक फिर टलेगी।

इससे शहर के प्रमुख प्रोजेक्टों पर मुहर लगने में देरी होगी। नोएडा का इतहिास रहा है कि यहां आए हर अधिकारी ने अपने हिसाब से योजनाओं को क्रियांवित किया है। नए अधिकारियों सत्ता परविर्तन के बाद आए दोनों अधिकारियों ने बसपा शासन काल में जारी हुए सभी टेंडरों को रद्द कर दोबारा से स्टीमेट तैयार कराए थे। यही वजह थी कि दोनों अधिकारियों ने मई में दूसरा कार्यकाल शुरू किया था, मगर दोबारा से प्रस्ताव तैयार होने व टेंडर जारी होने से विकास की रफ्तार को गति देने में तीन से चार महीने का समय लग गया था।

नए अधिकारियों ने भी ऐसा किया तो शहर मेंविकास कार्यो की रफ्तार थम सकती है। नोएडा में करीब सात माह पूर्व दोबारा तैनाती पाने वाले दोनों अधिकारियों की प्राथमिकता शहर की यातायात व्यवस्था को दुरुस्त करना था। अपने पिछले कार्यकाल में सेक्टर-18 के सौंदर्यीकरण के लिए तैयार की गई योजना को मूर्त रूप देने के लिए दोनों अधिकारियों ने फिर से कवायद शुरू कर दी थी। एनएच-24 पर नोएडा-गाजियाबाद के बीच अंडरपास बनाने की योजना पर भी काम चल रहा है।

बोर्ड बैठक नहीं होने से नोएडा सिटी सेंटर से सेक्टर 62 मेट्रो तक विस्तार को बोर्ड की मंजूरी नहीं मिल पा रही है। नए अन्तरराज्यीय बस अड्डे के लिए नई जमीन और किसानों से जुड़े मसले भी बोर्ड बैठक के इंतजार में लटके हुए हैं। इसके अलावा उन सात विदेशी होटलों के अस्तित्व पर भी खतरा मंडराने लगा है, जिन्होंने सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार प्राधिकरण में अतिरिक्त रकम जमा, करा प्लॉट प्राप्त कर लिया।

 
 
 
 
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