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मां-पुत्री की हत्या, चार व्यक्तियों की आजीवन कारावास सजा बरकरार
नयी दिल्ली, एजेंसी First Published:30-11-12 06:26 PM

दिल्ली उच्च न्यायालय ने महिला और उसकी पुत्री की करीब छह वर्ष पहले हत्या के जुर्म में चार मुजरिमों की आजीवन कारावास की सजा बरकरार रखी है। न्यायमूर्ति संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति एस पी गर्ग की पीठ ने हत्या के लिए दोषी करार दिये गए भास्कर महालिक, भगवान महालिक, निरंजन महालिक और जगबंधू दास की अपील खारिज करते हुए निचली अदालत का फैसला बरकरार रखा। इन चारों मुजरिमों ने ही दोनों महिलाओं की उनके घर में डकैती करने के बाद हत्या कर दी थी। दोनों मां-पुत्री उच्चतम न्यायालय में वकालत करती थीं।
    
पीठ ने कहा कि डकैती और हत्या किसी संदेह से परे साबित हुआ है। परिस्थितिजन्य सबूतों से स्पष्ट रूप से सभी आरोपियों के डकैती और हत्या में शामिल होने की पुष्टि होती है। लूटी गई वस्तुएं पुलिस द्वारा आरोपियों की ओर से उपलब्ध करायी गई जानकारी के आधार पर उनके आवास से बरामद की गई। पीठ ने कहा, साक्ष्य कानून की धारा 114 (ए) के तहत सुरक्षित रूप से एक वैध अनुमान लगाया जा सकता है कि याचिकाकर्ताओं ने ना केवल डकैती की बल्कि पीडिम्तों की हत्या भी की।
    
निचली अदालत ने चारों को दिसम्बर 2010 में स्वर्ण महाजन और उसकी पुत्री अनुराधा महाजन की हत्या का दोषी ठहराया था। अदालत ने हालांकि पांचवें आरोपी सुरेंद्र पाल को पर्याप्त सबूत के अभाव में बरी कर दिया था। पाल ने लूटपाट का सामान प्राप्त किया था।
 
चारों दोषी 11-12 मार्च 2006 की रात को दक्षिण दिल्ली के सिद्धार्थ इंक्लेव स्थित पीडिम्तों के घर में घुसे थे और डकैती के बाद दोनों की हत्या कर दी थी।

 
 
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