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परिजनों को नहीं मिल सका शव
First Published:27-11-12 10:26 PM

पोस्टमार्टम में लगातार की जा रही देरी के चलते आखिरकार बुजुर्ग के परिजनों को अंतिम संस्कार के लिए शव तक भी नहीं मिला। उन्होंने तीन दिन तक मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज स्थित शवगृह के बाहर मौजूद होकर शव मिलने का इंतजार किया, लेकिन उनके हाथ मायूसी ही लगी। बताया जाता है कि वह इतने गरीब थे कि वह अपने रहने का इंतजाम तक नहीं कर सकते थे। इस घटना को लेकर कुछ लोगों की जब प्रतिक्रिया ली गई तो उन्होंने इसे बेहद अमानवीय बताया।

पेश है प्रतिक्रिया एंरवि- अमीर लोग तो अपना प्रभाव डालकर प्रशासन से काम करवा लेते हैं, लेकिन गरीब लोग तो केवल गुहार ही लगा पाते हैं। अधिकांश समय गरीब लोगों को निराशा ही हाथ लगती है। राजन- 90 वर्षीय बुजुर्ग की मौत के बाद उसके शव का पोस्टमार्टम 12 दिनों तक टालना एक अमानवीय घटना है। यदि यह किसी अमीर आदमी का शव होता तो उसके शव का पोस्टमार्टम बहुत पहले हो गया होता। राखी- यह बड़े दुख की बात है कि परिजनों को 90 वर्षीय इस बुजुर्ग का शव तक नहीं मिला।

यदि यह पोस्टमार्टम परिजनों की मौजूदगी में कर दिया गया होता तो वह कम से कम अंतिम संस्कार तो कर पाते। दीपक गुप्ता- अमीर व गरीब के बीच का यह फर्क हमेशा ही देखने को मिलता है। यह घटना दर्शाती है कि किस तरह गरीब का जीते हुए ही नहीं बल्कि मौत के बाद भी अपमान ही होता है।

 
 
 
 
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