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सजा पाने में पहले स्थान पर ‘दिल्ली पुलिस’
First Published:21-07-12 11:49 PM
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नई दिल्ली, जितेंद्र भारद्वाज

प्रस्तावित एक तरफ दिल्ली पुलिस को विश्व की बेहतरीन फोर्स बनाने की दिशा में गृह मंत्रालय नई योजनाएं तैयार कर रहा है। दूसरी ओर उसी पुलिस के खिलाफ देशभर में सबसे ज्यादा शिकायतें मिलती हैं। डय़ूटी में लापरवाही बरतने और अनुशासनहीनता के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। पिछले तीन वषों में शिकायतों का आंकड़ा दोगुना हो गया है। शिकायतें ही नहीं, बल्कि जिन पुलिसकर्मियों को सख्त सजा मिली है, उसमें भी दिल्ली पहले स्थान पर है। दिल्ली पुलिस की कार्यशैली का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि जहां वर्ष 2009 में पुलिस के खिलाफ 6155 शिकायतें, वर्ष 2010 में 6614 और वर्ष 2011 में यह आंकड़ा 12805 पर पहुंच गया है। वर्ष 2009 में केवल 260 पुलिसकर्मियों को सख्त सजा मिली थी, जबकि पिछले साल 861 पुलिसकर्मियों को यह सजा दी गई हैं। सिपाही से लेकर इंस्पेक्टर रैंक तक के पुलिसकर्मी लापरवाही की राह पर हैं।

सजा पाने का एक सबसे बड़ा कारण पुलिस द्वारा समय पर कार्रवाई न करना है। वर्ष 2011 में लोकसभा की कार्यवाही के दौरान पूछे गए एक सवाल के जवाब में कहा गया था कि दिल्ली पुलिस ने अवैध निर्माण के मामलों में न केवल ढिलाई बरती, बल्कि खुद भागेदारी भी की। प्रॉपर्टी नेक्सस के साथ भी उसके संबंध देखने को मिले। जानकारों का कहना है कि पहले एफआईआर दर्ज कराने को और फिर उस पर कार्रवाई के लिए पीडिम्त पक्ष को आला अफसरों का दरवाजा खटखटाना पड़ता है। यहीं से भ्रष्टाचार भी शुरू हो जाता है।

नए पुलिस आयुक्त नीरज कुमार ने अब पुलिस को ज्यादा से ज्यादा सहयोगी बनाने के लिए कई योजनाएं शुरू की हैं। इनमें फौरन कार्रवाई और नियमित जनसंपर्क शामिल है। अवैध निर्माण में दिल्ली पुलिस की भागेदारी पुलिस के खिलाफ शिकायतें कार्रवाई हुई वर्ष 2008 26 14वर्ष 2009 75 81वर्ष 2010 140 104वर्ष 2011(30 जून तक) 121 40 .............

शिकायतों की एक बड़ी वजह

 

ट्रांस पेरेंसी इंटरनेशनल. इंडिया सेंटर फॉर मीडिया रिसर्च की सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक देश में केवल 20 फीसदी पुलिसकर्मी भ्रष्टाचार को खत्म करने में विश्वास रखते हैं, जबकि 64 प्रतिशत पुलिसकर्मी इस बाबत कोई उत्साह नहीं दिखाना चाहते। 14 फीसदी जवान ऐसे थे, जिन्होंने मिली-जुली प्रक्रिया दी थी। पुलिस के साथ बातचीत करने या शिकायत दर्ज कराना, इसमें लोगों का अनुभव बेहद खराब रहा है।

74 प्रतिशत लोगों ने पुलिस के व्यवहार को खराब बताया था। 14 फीसदी लोगों का कहना है कि पुलिस का व्यवहार न अच्छा है और न ही बुरा। केवल 11 प्रतिशत लोगों ने कहा कि पुलिस के साथ हुई बातचीत से वे संतुष्ट हैं। 2011 में पुलिस कर्मियों के खिलाफ शिकायतें दिल्ली-12805 उत्तर प्रदेश-11971 मध्य प्रदेश-10683 पंजाब-5767 महाराष्ट्र-5541 इनके खिलाफ शुरू हुई अनुशासनात्मक कार्रवाई उत्तर प्रदेश-9683 पुलिसकर्मी दिल्ली-2624गुजरात-2277राजस्थान-2141पंजाब-1844इतने केसों में हुआ ट्रायल पूरा उत्तर प्रदेश-7181दिल्ली-2838राजस्थान-1054 झारखंड-857जम्मू-कश्मीर-763ये बने दंड के भागीदार, दिल्ली पुलिस पहले नंबर पर मामूली सजा सख्त सजा दिल्ली 1815 861पंजाब 1688 569झारखंड 152 566जम्मू-कश्मीर 371 522 उत्तर प्रदेश 6556 517 हुए नौकरी से बर्खास्त छत्तीसगढ़-252दिल्ली-162उत्तर प्रदेश-108पंजाब-98गुजरात-54

 
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