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नंद कुमार के अगवा बेटे के लौटने की खबर
 
महिला सीएमओ ने आत्महत्या की
First Published:21-07-12 11:49 PM
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 नई दिल्ली वरिष्ठ संवाददाता

बहन और उसके बच्चों के लिए बड़े अरमान से तीज का शगुन लेकर डॉक्टर जुगल किशोर अपनी बहन डा. सुषमा रानी सिंह के घर गए थे। घेवर और मीठाइयों के साथ ही उन्होंने ढेर सारा प्यार भांजा-भांजी को दिया। लेकिन उन्हें इस बात का अहसास नहीं था कि चंद घंटों बाद ही यह शगुन अपशगुन में बदल जाएगा और उन्हें बहन की मौत की खबर मिलेगी। डा. कि शोर के अनुसार शुक्रवार की शाम करीब साढ़े सात बजे वे अपनी बहन के घर गए थे और एक घंटे वहां ठहरने के बाद चले आए थे। उन्होंने बताया कि पिछले करीब सात-आठ वर्षो से बहन-जीजा के बीच संबंध अच्छे नहीं थे। शुक्रवार को भी घरेलू बातों पर ही उनमें काफी झगड़ा हुआ था जिसके बाद अंसारी ने खुद को कमरे में बंद कर लिया था।

पति ने किया खंडन :पति के अनुसार दोनों के बीच संबंध काफी अच्छे थे और शुक्रवार को भी हंसी-खुशी के साथ उन्होंने मायके से आए तीज की मीठाइयों को स्वीकार किया था। हांलांकि खलील अंसारी ने इससे ज्यादा और कुछ नहीं बोला।

एम्स में जुटे वकील :अंसारी की पत्नी की मौत की खबर सुनने के बाद भारी संख्या में अधिवक्ता एक-एक कर के एम्स के शवगृह में पहुंच गए थे। बार काउंसिल के पदाधिकारी भी इसमें शामिल थे।

डा. किशोर ने की थी बोर्ड से पोस्टमार्टम की मांग :शव के एम्स शवगृह पहुंचने के बाद शनिवार को जब कार्रवाई शुरू हुई तो मृतका के भाई डा. किशोर ने बोर्ड से पोस्टमार्टम कराने की मांग की। ऐसे में दोपहर बाद करीब दो बजे से पोस्टमार्टम शुरू हुआ। फिर पुलिस कार्रवाई पर उठे सवाल, 100 नंबर भी घेरे में- फोन पर सूचना देने पर थाने को कॉल करने की दी सलाहनई दिल्ली वरिष्ठ संवाददातापुलिस की कार्रवाई फिर एक बार सवालों के घेरे में है। डा. जुगल किशोर के अनुसार रात को आत्महत्या का केस पहुंचने के बाद भी पुलिस सही समय पर नहीं पहुंची। जो लोग वहां पहुंचे वे थाने के क्षेत्र को लेकर भिड़े हुए थे। इसके बाद उन्होंने पुलिस कंट्रोल रूम को 100 नंबर पर सूचना दी। लेकिन वहां से भी गैर जिम्मेदाराना जवाब मिला। डॉक्टर के अनुसार उन्हें थाना पुलिस को कॉल करने की सलाह दी गई।

इसके बाद काफी जोर देने पर उन्होंने कॉल सुनी और पुलिस की टीम को भेजा गया। यही नहीं सुबह नौ बजे वे पोस्टमार्टम हाउस पहुंच गए थे, जबकि पुलिस दोपहर बाद करीब दो बजे अस्पताल पहुंची। इससे पहले मालवीय नगर में जब एक महिला ने अपने दो बच्चों को मार कर आत्महत्या कर ली थी, उस समय भी पुलिस कंट्रोल रूम की भूमिका पर सवाल उठाए गए थे। महिला के परिजनों ने आरोप लगाया था कि पुलिस ने सही समय पर कार्रवाई नहीं की थी। सुसाइड नोट पर उठ रहे सवाल :मौके से मिला सुसाइड नोट पुलिस ने शनिवार को दो बजे मृतका के परिजनों को सौंपा। सुसाइड नोट देखते ही परिजनों ने साफ कह दिया कि यह नकली है। डा. जुगल किशोर और उनकी बहन संतोष ने कई सवाल उठाए हैं। वहीं पुलिस की ओर से पेश सुसाइड नोट में किसी व्यक्ति पर धोखा देने का आरोप डा. सुषमा की तरफ से लगाया गया है। उसमें रुपये के लेन-देन के चलते धोखा देने का भी जिक्र किया गया है।

साथ ही अंगदान की गुजारिश भी की गई है। पुलिस ने इसी सुसाइड नोट के आधार पर अज्ञात के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है।सुसाइड नोट पर मृतका के परिजनों ने उठाए सवाल- सुसाइड नोट पर तारीख 20 जनवरी, 2012 क्यों थी ?- सुसाइड नोट हिंदी में था, जबकि डा. सुषमा अंग्रेजी में लिखती थीं।- उसमें जो साइन थे वह भी हिंदी थे और नाम गलत लिखा था।- ऐसे में सवाल उठता है कि क्या एक सीनियर डॉक्टर को अपना नाम भी लिखना नहीं आता?- सुसाइड करने से पहले कोई दो पन्ने का नोट क्यों लिखा?- रात की घटना थी तो सुसाइड नोट दोपहर दो बजे क्यों सामने लाया गया?‘पुलिस कानून के तहत कार्रवाई कर रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। इसके साथ ही परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर भी गौर किया जा रहा है। परिजनों के आरोप भी जांच का बिंदु हैं। अभी कोई भी टिप्पणी करना बहुत जल्दबाजी होगी।’अजय चौधरी, एडिशनल सीपी, साउथ ईस्टं

 
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टिप्पणियॉ पढ़े(1)
मेरी तरफ से सी की आत्मा की शांति के लिए ये शोक संदेश है मेरी दिल्ली पुलिस से गुजारिश है कि वो जो भी कार्यवाही करे वो न्याय के प्रति जिसकी भी गलती हो उसे सजा दो और उनके बच्चों को कृपया सांत्वना दें कि वो अपने साथ हुए इस हादसे को कुदरत का फैसला समझकर जिंदिगी से लड़ने की कोशिश करें मै एक आम नागरिक की हैसियत से ये गुजारिश कर रहा हूँ
By deepak sarswat (23rd-July-2012 05:33:PM)
 
 

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