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सबूतों के अभाव में ससुराल पक्ष बरी
नई दिल्ली वरिष्ठ संवाददाता
First Published:23-06-12 10:29 PM
दहेज की मांग पूरी नहीं करने पर नवविवाहित बहू को आत्महत्या के लिए मजबूर करने के आरोपी ससुराल पक्ष के पांच लोगों को अदालत ने बरी कर दिया है। हालांकि अदालत ने समाजाजिक रीतियों पर सवाल भी उठाए हैं। अदालत ने कहा है कि हमारे समाज में बेटी को शादी के बाद पराया धन मान लिया जाता है। यही कारण है कि अगर वो ससुराल की प्रताड़ना की बात मायके वालों को बताती भी है, तो उसे यह कहकर समझाया जाता है कि अब वही उसका घर है। ऐसे में एक महिला के पास आत्महत्या जैसा कदम उठाने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचता।
रोहिणी स्थित एडिशनाल सेशन जज कामिनी लॉ की अदालत ने इस मामले में अभियोजन की कमजोर कड़ियों और मृतका के मायके वालों के उदासीन रवैये के कारण आरोपियों को बरी कर दिया है। लेकिन इस सब के लिए सामाजिक रीतियों को कटघरे में खड़ा किया है। अदालत ने उत्तरी-पश्चिमी दिल्ली निवासी महिला के पति और उसके ससुराल पक्ष के अन्य सदस्यों को दहेज हत्या के मामले से बेशक बरी कर दिया है। मगर पीड़िता के परिवार से प्रताड़ना की जानकारी होने के बावजूद इसकी शिकायत नहीं करने का कारण भी पूछा है।
दरअसल पीड़िता के परिवार ने उसकी मौत के बाद भी पुलिस से प्रताड़ना के संबंध में कोई बात नहीं कही। जिसका लाभ आरोपी पक्ष को मिला है। हालांकि कुछ समय बाद उन्होंने बेटी के ससुराल वालों पर दहेज प्रताड़ना व दहेज हत्या का आरोप लगाया था। जिसे अदालत ने निर्धारित अवधि से देरी होने पर खारिज कर दिया है। अदालत ने कहा है कि क्यों हमारा समाज संबंधों में खटास और अत्याचार के बाद लड़कियों को उन्हें निभाने की सलाह देता है। एक लड़की शादी खुशी पाने के लिए होती है ना कि अत्याचार सहने के लिए। पेश मामले में 4 जून 2006 को एक महिला ने अपने ससुराल में आत्महत्या कर ली थी। उससमय उस महिला की शादी को महज चार महीने पूरे हुए थे। पुलिस ने अदालत में कहा था कि शादी के बाद ही विवाहिता को कम दहेज लाने के कारण प्रताड़ित किया जाने लगा था। ससुराल वालों के अत्याचारों से तंग आकर उसने आत्महत्या कर ली थी।
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