चौटाला को मिली छह हफ्ते की जमानत
IPL स्पॉट फिक्सिंग मामले में विंदू दारा सिंह गिरफ्तार चेन्नई में सट्टेबाजी मामले में प्रमुख आरोपी गिरफ्तार आइगेट ने यौन उत्पीड़न केस में CEO को किया बर्खास्त इलाहाबाद हाईकोर्ट ने खारिज की राजेश तलवार की याचिका भारत-चीन सीमा संबंधी मुद्दों का समाधान खोजने में सक्षम IPL मैचों पर रोक लगाने से सुप्रीम कोर्ट का इंकार
IPL मैचों पर रोक लगाने से सुप्रीम कोर्ट का इंकार
IPL मैचों पर रोक लगाने से सुप्रीम कोर्ट का इंकार
IPL मैचों पर रोक लगाने से सुप्रीम कोर्ट का इंकार
महंत देवेंद्र दास को वारंट
देहरादून। कार्यालय संवाददाता
First Published:30-04-12 11:35 PM
श्री गुरु राम राय इंस्टीटय़ूट ऑफ मेडिकल एंड हेल्थ साइंसेज (एसजीआरआर आईएमएचएस) की एमसीआई से मान्यता के मामले में अदालत ने चेयरमैन महंत देवेंद्र दास को वारंट जारी कर दिया है।
सीबीआई के विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट योगेन्द्र कुमार सागर की अदालत ने महंत देवेन्द्र दास को समन भेजकर 30 अप्रैल को तलब किया था, लेकिन सोमवार को वह कोर्ट में पेश नहीं हुए। अगली कार्यवाही 11 मई को होगी।
एमसीआई (मेडिकल कॉउंसिल आफ इंडिया) की टीम ने वर्ष 2010 में संस्थान के एमबीबीएस के पांचवे बैच के रिन्यूवल के लिए निरीक्षण किया। निरीक्षण में कई खामियां पाईं और मानक पूरे नहीं होने संबंधी रिपोर्ट केंद्र को भेजी। इंस्टीटय़ूट को रिन्यूवल के लिए व्यवस्थाएं सुधारने का समय दिया गया। 10 मार्च 2010 को प्राचार्य ने पत्र लिखकर कमियां दूर करने का दावा किया। आरोप है कि इंस्टीटय़ूट ने एमसीआई टीम के कुछ अफसरों से सांठगांठ करके केंद्र को गलत रिपोर्ट भेजी। सीबीआई जांच में कई अनियमितता सामने आईं। एसजीआरआर के चेयरमैन महंत देवेंद्र दास समेत इंस्टीटय़ूट व एमसीआई के आठ अफसरों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया है। महंत देवेन्द्र दास को सीबीआई कोर्ट ने समन भेजा था। जबकि संस्थान के तीन अफसरों के खिलाफ वारंट जारी किए थे। तीन अफसरों का सरेंडर, जमानत मिली
संस्थान के तीन अफसरों ने सोमवार को सीबीआई के विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट योगेन्द्र कुमार सागर की अदालत में सरेंडर कर दिया। अदालत ने मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डॉ. वेदप्रकाश, डिप्टी एमएस डॉ. बीके बिहारी व प्रिंसीपल एसके घिल्डियाल के खिलाफ वारंट जारी किए थे। तीनों को जमानत मिल गई है।
सीबीआई के सहायक लोक अभियोजक दीप नारायण ने अदालत में दलील दी कि इंस्टीटय़ूट ने एमसीआई टीम के अफसरों से सांठगांठ कर मान्यता के लिए एक बड़े फर्जीवाड़े को अंजाम दिया। वहीं बचाव पक्ष के अधिवक्ता प्रवीण सेठ ने कहा कि सीबीआई इस प्रकरण में जांच पूरी कर चुकी है। चाजर्शीट भी अदालत में दाखिल की जा चुकी है। उनके मुवक्किल कोई पेशेवर अपराधी नहीं हैं और उन्हें जमानत दी जानी चाहिए। अदालत ने हर आरोपित को 50-50 हजार रुपए के दो-दो जमानती पेश करने पर रिहा कर दिया। सुबह से शाम तक
डटा रहा स्टाफ
कोर्ट परिसर में सुबह ही काफी भीड़ लग गई थी। मेडिकल कॉलेज का स्टाफ व एसजीआरआर एजुकेशन मिशन से जुड़े अधिकारी सुबह से शाम तक वहीं डटे रहे। अधिकारी संस्थान को फोन पर लगातार पल-पल का अपडेट देते रहे। जमानत के लिए जरूरत छह लोगों की थी, लेकिन कई अधिकारी-कर्मचारी जमानत के लिए खड़े हो गए। छात्रों का लग
गया जमावड़ा
दोपहर बाद संस्थान के काफी छात्र भी कचहरी पहुंच गए। काफी संख्या में एमबीबीएस छात्र सीबीआई कोर्ट के बाहर खड़े थे। शिक्षकों के समझाने पर वहां से वापस लौट गए। जब तक संस्थान के अधिकारियों की जमानत पर फैसला नहीं हुआ, छात्र कचहरी परिसर में जमा रहे। छात्रों ने यह भी बताया कि सोमवार को उनकी छुट्टी कर दी गई थी। दिनभर तैनात रही पुलिस
कचहरी परिसर में तनाव की स्थिति को देखते हुए पुलिस बल को भी तैनात किया गया था। यहां तक की शहर कोतवाल भी डय़ूटी पर दिनभर कचहरी में ही रहे। कोर्ट कंपाउंड में संस्थान के सैकड़ों छात्र इकट्ठा हो गए थे। उनकी मौजूदगी को लेकर भी लगातार पुलिसकर्मी आशंकित रहे। इसी कारण डेढ़ सेक्शन पीएसी, चीता फोर्स व दो दारोगा तैनात रहे।
एमसीआई (मेडिकल कॉउंसिल आफ इंडिया) की टीम ने वर्ष 2010 में संस्थान के एमबीबीएस के पांचवे बैच के रिन्यूवल के लिए निरीक्षण किया। निरीक्षण में कई खामियां पाईं और मानक पूरे नहीं होने संबंधी रिपोर्ट केंद्र को भेजी। इंस्टीटय़ूट को रिन्यूवल के लिए व्यवस्थाएं सुधारने का समय दिया गया। 10 मार्च 2010 को प्राचार्य ने पत्र लिखकर कमियां दूर करने का दावा किया। आरोप है कि इंस्टीटय़ूट ने एमसीआई टीम के कुछ अफसरों से सांठगांठ करके केंद्र को गलत रिपोर्ट भेजी। सीबीआई जांच में कई अनियमितता सामने आईं। एसजीआरआर के चेयरमैन महंत देवेंद्र दास समेत इंस्टीटय़ूट व एमसीआई के आठ अफसरों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया है। महंत देवेन्द्र दास को सीबीआई कोर्ट ने समन भेजा था। जबकि संस्थान के तीन अफसरों के खिलाफ वारंट जारी किए थे। तीन अफसरों का सरेंडर, जमानत मिली
संस्थान के तीन अफसरों ने सोमवार को सीबीआई के विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट योगेन्द्र कुमार सागर की अदालत में सरेंडर कर दिया। अदालत ने मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डॉ. वेदप्रकाश, डिप्टी एमएस डॉ. बीके बिहारी व प्रिंसीपल एसके घिल्डियाल के खिलाफ वारंट जारी किए थे। तीनों को जमानत मिल गई है।
सीबीआई के सहायक लोक अभियोजक दीप नारायण ने अदालत में दलील दी कि इंस्टीटय़ूट ने एमसीआई टीम के अफसरों से सांठगांठ कर मान्यता के लिए एक बड़े फर्जीवाड़े को अंजाम दिया। वहीं बचाव पक्ष के अधिवक्ता प्रवीण सेठ ने कहा कि सीबीआई इस प्रकरण में जांच पूरी कर चुकी है। चाजर्शीट भी अदालत में दाखिल की जा चुकी है। उनके मुवक्किल कोई पेशेवर अपराधी नहीं हैं और उन्हें जमानत दी जानी चाहिए। अदालत ने हर आरोपित को 50-50 हजार रुपए के दो-दो जमानती पेश करने पर रिहा कर दिया। सुबह से शाम तक
डटा रहा स्टाफ
कोर्ट परिसर में सुबह ही काफी भीड़ लग गई थी। मेडिकल कॉलेज का स्टाफ व एसजीआरआर एजुकेशन मिशन से जुड़े अधिकारी सुबह से शाम तक वहीं डटे रहे। अधिकारी संस्थान को फोन पर लगातार पल-पल का अपडेट देते रहे। जमानत के लिए जरूरत छह लोगों की थी, लेकिन कई अधिकारी-कर्मचारी जमानत के लिए खड़े हो गए। छात्रों का लग
गया जमावड़ा
दोपहर बाद संस्थान के काफी छात्र भी कचहरी पहुंच गए। काफी संख्या में एमबीबीएस छात्र सीबीआई कोर्ट के बाहर खड़े थे। शिक्षकों के समझाने पर वहां से वापस लौट गए। जब तक संस्थान के अधिकारियों की जमानत पर फैसला नहीं हुआ, छात्र कचहरी परिसर में जमा रहे। छात्रों ने यह भी बताया कि सोमवार को उनकी छुट्टी कर दी गई थी। दिनभर तैनात रही पुलिस
कचहरी परिसर में तनाव की स्थिति को देखते हुए पुलिस बल को भी तैनात किया गया था। यहां तक की शहर कोतवाल भी डय़ूटी पर दिनभर कचहरी में ही रहे। कोर्ट कंपाउंड में संस्थान के सैकड़ों छात्र इकट्ठा हो गए थे। उनकी मौजूदगी को लेकर भी लगातार पुलिसकर्मी आशंकित रहे। इसी कारण डेढ़ सेक्शन पीएसी, चीता फोर्स व दो दारोगा तैनात रहे।
00

टिप्पणियाँ
स्थानीय ख़बरें
एन सी आर
पंजाब
उत्तराखंड
उत्तर प्रदेश
बिहार
झारखंड
लाइवहिन्दुस्तान पर अन्य ख़बरें
आज का मौसम राशिफल



ई-मेल
