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नब्बे से अधिक पेटेंट है भारली के नाम
First Published:21-07-12 11:50 PM
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नई दिल्ली, प्रमुख संवाददाता

मेरी जिंदगी के दो सपने है एक ऐसा अनाथालय बनाना जहां तकनीक विशेषज्ञों की फौज तैयार की जा सकें और दूसरा एक औद्योगिक गांव बनाना जहां हर आदमी तकनीक तौर पर मजबूत हो। यह कहना है कि असम में पैदा हुए उद्धव भारली का, जिनके नाम नब्बे से अधिक पेटेंट है। इंस्टीटय़ूट ऑफ इंजीनियर्स इंडिया से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने वाले उद्धव को नासा के एक पुरस्कार के लिए शॉर्टलिस्ट किया गया है। उद्धव विभिन्न उद्देश्यों के लिए 85 से अधिक इंजीनियरिंग डिवाइस बना चुके हैं। इनकी सफलता की कहानी कई उतार-चढ़ाव भरी रही। प्राइमरी स्कूल तक पहुंचते-पहुंचते पढ़ाई करने के लिए उन्हें कई तरह की परेशानियों से गुजरना पड़ा।

हालात इतने खराब हो गए थे कि 1987 में उनको पढ़ाई छोड़नी पड़ी। भारली ने लखीमपुरी के गवर्नमेंट सीनियर सेकेंडरी स्कूल से पढ़ाई की। वह बताते हैं कि उनके गणित के अध्यापक उन्हें कक्षा के बाहर खड़ा कर दिया करते थे क्योंकि वह कठिन सवाल पूछा करते थे। वह बताते हैं कि उन्हें गणित से बहुत प्यार है और वह आठवीं की पढ़ाई के दौरान 11वीं और 12वीं के सवाल हल किया करते थे। 2005 में उन्हें नेशनल इनोवेशन फाउंडेशन ने ग्रासरूट इनोवेटर का पुरस्कार दिया। भारली का पहला इनोवशन पॉलीथीन बनाने वाली मशीन था।

उस दौरान उसकी कीमत करीब चार लाख रुपये हुआ करती थी लेकिन उन्होंने यह मशीन लगभग 75,000 रुपये में बना दी। उसके बाद इन्होंने कसावा को छीलने वाली मशीन बनाई। जो कि एक मिनट में पांच किग्रा कसावा छील देती है। हाल ही उन्हें डेस्कटॉप पोमेग्रेनेट डी-सीडिंग मशीन बनाने के लिए नासा ने शॉर्ट लिस्ट किया है। उद्धव का एक पुरस्कार सीटीसी मिनी प्लांट, जो कि चाय की पत्ती तोड़ने वाले और किसानों की मदद के लिए बनाया था को वर्ल्ड टेक्नोलॉजी नेटवर्क फॉर द वर्ल्ड टेक्नोलॉजी अवार्ड 2012 के लिए नामित किया गया है। .

 
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