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अलविदा कह गए संगीतकार कशालकर
First Published:11-07-12 11:41 PM
इलाहाबाद कार्यालय संवाददाता
शहर के मशहूर संगीतकार पं. एचवी कशालकर का बुधवार को निधन हो गया। वह 87 वर्ष के थे। उन्होंने दरभंगा कॉलोनी स्थित अपने निवास पर अंतिम सांसें ली। वह कुछ समय से हिमोग्लोबिन की कमी से जूझ रहे थे। वे काफी समय से प्रयाग संगीत समिति से जुड़े थे और यहां संगीत सिखाते थे। उनके निधन से संगीतकार बिरादरी में शोक की लहर दौड़ गई। प्रयाग संगीत समिति में एक शोक सभा हुई, जिसमें समिति के अध्यक्ष मिलन मुखर्जी, सचिव अरुण कुमार, कोषाध्यक्ष आदित्य नारायण, रजिस्ट्रार बलराम सिंह, उमा दीक्षित, उप निदेशक भोलानाथ समेत सभी अध्यापक व अध्यापिका मौजूद रहे। कशालकर की दो पुत्रियां हैं जिनकी शादी हो चुकी है। एक बेटी मंजू आर्मी स्कूल पूना में संगीत शिक्षिका है और दूसरी सुनीता भाले खरागढ़ विश्वविद्यालय में व्याख्याता है।
देश-विदेश तक रोशन किया नाम संगीतकार पं. एचवी कशालकर ने देश के साथ विदेशों में भी नाम रोशन किया। उन्हें संगीत पिता पं. विष्णु अन्ना कशालकर से विरासत में मिला था। अन्ना कशालकर प्रयाग संगीत समिति के संस्थापक सदस्य भी थे। पं. एसवी कशालकर का जन्म 19 सितंबर 1925 को इलाहाबाद में ही हुआ था। उन्होंने ग्वालियर घराना की गायिकी की शिक्षा अपने पिता के साथ पं. रामाश्रय झा, डॉ. चंद्रशेखर रेले तथा पं. मधुसूदन भावे से ली थी। पं. कशालकर ने प्रयाग संगीत समिति से प्रवीण की उपाधि प्राप्त की। उसके बाद वर्ष 1949 से 1983 तक एजी ऑफिस में कार्यरत रहे। वहां से अवकाश ग्रहण करने के बाद प्रयाग संगीत समिति में प्रवीण की कक्षाओं में अध्यापन करने लगे।
वह नाटकों का भी मंचन करते थे। इनका कहना है कशालकरजी का जाना बेहद खेदजनक है। वह अच्छे संगीतकार के साथ-साथ एक बेहतरीन नाटककार भी थे। उनकी कमी नहीं पूरी हो सकती। मंजुल वर्मा, कार्यक्रम अधिकारी, आकाशवाणी पं रामाश्रय झा, कमला बोस के बाद कशालकरजी संगीत के एक स्तम्भ थे। उनके जाने से संगीत को एक गहरा आघात लगा है। अरुण कुमार, सचिव, प्रयाग संगीत समिति कशालकरजी बहुत अच्छे गुरु थे। वह इस उम्र में भी नए संगीतकारों को सिखाने के लिए हमेशा तत्पर रहते थे। यही कारण है कि उन्हें गुरुजी ही कहा जाता था। अभिलाष नारायण, वरिष्ठ रंगकर्मी
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