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छात्रा के बयानों पर टिकी प्रबंधक की किस्मत
बरेली। वरिष्ठ संवाददाता
First Published:08-06-12 10:18 PM
मुरादाबाद के दीनदयाल उपाध्याय इंटर कॉलेज के प्रबंधक की किस्मत में जेल जाना है या बरी होना, ये छात्र के बयानों पर अटक गई है। पुलिस अफसरों के मुताबिक, छात्र ने शपथपत्र में प्रबंधक को क्लीन चिट दे दी है। कोर्ट में छात्र के बयान के बाद प्रबंधक को छोड़ दिया जाएगा। वहीं पुलिस झूठी रिपोर्ट दर्ज कराने पर छात्र के खिलाफ कोर्ट में कार्रवाई करेगी। कोतवाली पुलिस को दिए 161 के बयानों में छात्र ने एफआईआर की बात दोहराकर रेप होने का जिक्र किया है। दूसरी ओर, प्रबंधक चार दिनों से कोतवाली में पुलिस की निगरानी में है।
पांच जून को प्रबंधक मुनेंद्र पाल सिंह पर एक छात्र ने कोतवाली में रेप का मुकदमा दर्ज कराया था। छात्र का कहना था कि मुनेंद्र उसे मार्कशीट सही कराने के बहाने यहां माल गोदाम रोड पर जगराज गेस्ट हाउस में ले गए। वहां उसके साथ रेप किया। सुबह प्रबंधक छात्र को ट्रेन पर बैठाने गया तो छात्र ने यात्राियों को आपबीती सुनाई। यात्राियों ने छात्र को जीआरपी के हवाले कर दिया। इस तरह मामला कोतवाली पुलिस के पास पहुंचा। पुलिस ने पांच जून को ही मुनेंद्र पाल सिंह को गिरफ्तार कर लिया था।
ये निकली कहानी
दरअसल मामला प्रधानी की चुनावी रंजिश का है। मुरादाबाद में ऊंचा गांव के संजीव सिंह और मुनेंद्र पाल सिंह के परिवारों में दुश्मनी चली आ रही है। दरअसल, प्रधानी के चुनाव के दौरान संजीव की भाभी और मुनेंद्र की पत्नी चुनाव लड़ रहीं थीं। इसी दौरान संजीव के भाई समरवीर सिंह का मर्डर हो गया था। मर्डर में मुनेंद्रपाल सिंह और उनके भाइयों को नामजद कराया गया था। बताया जा रहा है कि इसके बाद से ही मुनेंद्रपाल सिंह को फंसाने की साजिश शुरू हुई। सोमवार को कोर्ट में दर्ज होंगे छात्र के बयान
जिला अस्पताल में छात्र के साथ रेप की पुष्टि नहीं हुई है। अब पुलिस पैथोलॉजी रिपोर्ट का इंतजार कर रही है। छात्र ने पुलिस को दिए बयान में रेप होने की बात कही है। कानून के मुताबिक, पीड़िता का बयान ही कार्रवाई के लिए काफी है, लेकिन कोतवाली पुलिस का दावा है कि छात्र ने जो शपथपत्र दिया है, उसमें कहा है कि उसके साथ कोई घटना नहीं हुई है। शुक्रवार को छात्र के बयान कोर्ट में दर्ज होने थे, लेकिन छात्र देर से पहुंची और बयान नहीं हो पाया। अब सोमवार को कोर्ट में छात्र का बयान दर्ज होगा। पुलिस का दावा है कि छात्र ने मुनेंद्र पाल सिंह को झूठा फंसाया है। उसके खिलाफ कोर्ट में 182 की रिपोर्ट भेजी जाएगी। कार्रवाई का एक पहलू ये भी
पिछले साल अनाथालय की दो लड़कियों ने वहां के मंत्री महेंद्र गुप्त पर रेप का आरोप लगाया था। मेडिकल रिपोर्ट में रेप की पुष्टि नहीं हुई। बयानों के आधार पर कोतवाली पुलिस ने मंत्री के खिलाफ रेप का मुकदमा दर्ज किया। मंत्री फरार हो गया। उसके बाद कोर्ट में सरेंडर किया। छानबीन में मामला झूठा पाया गया था।
पांच जून को प्रबंधक मुनेंद्र पाल सिंह पर एक छात्र ने कोतवाली में रेप का मुकदमा दर्ज कराया था। छात्र का कहना था कि मुनेंद्र उसे मार्कशीट सही कराने के बहाने यहां माल गोदाम रोड पर जगराज गेस्ट हाउस में ले गए। वहां उसके साथ रेप किया। सुबह प्रबंधक छात्र को ट्रेन पर बैठाने गया तो छात्र ने यात्राियों को आपबीती सुनाई। यात्राियों ने छात्र को जीआरपी के हवाले कर दिया। इस तरह मामला कोतवाली पुलिस के पास पहुंचा। पुलिस ने पांच जून को ही मुनेंद्र पाल सिंह को गिरफ्तार कर लिया था।
दरअसल मामला प्रधानी की चुनावी रंजिश का है। मुरादाबाद में ऊंचा गांव के संजीव सिंह और मुनेंद्र पाल सिंह के परिवारों में दुश्मनी चली आ रही है। दरअसल, प्रधानी के चुनाव के दौरान संजीव की भाभी और मुनेंद्र की पत्नी चुनाव लड़ रहीं थीं। इसी दौरान संजीव के भाई समरवीर सिंह का मर्डर हो गया था। मर्डर में मुनेंद्रपाल सिंह और उनके भाइयों को नामजद कराया गया था। बताया जा रहा है कि इसके बाद से ही मुनेंद्रपाल सिंह को फंसाने की साजिश शुरू हुई। सोमवार को कोर्ट में दर्ज होंगे छात्र के बयान
जिला अस्पताल में छात्र के साथ रेप की पुष्टि नहीं हुई है। अब पुलिस पैथोलॉजी रिपोर्ट का इंतजार कर रही है। छात्र ने पुलिस को दिए बयान में रेप होने की बात कही है। कानून के मुताबिक, पीड़िता का बयान ही कार्रवाई के लिए काफी है, लेकिन कोतवाली पुलिस का दावा है कि छात्र ने जो शपथपत्र दिया है, उसमें कहा है कि उसके साथ कोई घटना नहीं हुई है। शुक्रवार को छात्र के बयान कोर्ट में दर्ज होने थे, लेकिन छात्र देर से पहुंची और बयान नहीं हो पाया। अब सोमवार को कोर्ट में छात्र का बयान दर्ज होगा। पुलिस का दावा है कि छात्र ने मुनेंद्र पाल सिंह को झूठा फंसाया है। उसके खिलाफ कोर्ट में 182 की रिपोर्ट भेजी जाएगी। कार्रवाई का एक पहलू ये भी
पिछले साल अनाथालय की दो लड़कियों ने वहां के मंत्री महेंद्र गुप्त पर रेप का आरोप लगाया था। मेडिकल रिपोर्ट में रेप की पुष्टि नहीं हुई। बयानों के आधार पर कोतवाली पुलिस ने मंत्री के खिलाफ रेप का मुकदमा दर्ज किया। मंत्री फरार हो गया। उसके बाद कोर्ट में सरेंडर किया। छानबीन में मामला झूठा पाया गया था।
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