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50 जिंदगियां बचाने वाले लाइफगार्ड को कोई पहचान नहीं
आगरा, एजेंसी
First Published:23-05-12 01:18 PM
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लाइफगार्ड सतीश चंद्रा अमेरिकी टीवी शो 'बेवाच' में लोगों को समुद्र में डूबने से बचाने वाले लोकप्रिय किरदार मिच बकनन की तरह हैं। वह बीते 33 साल में 50 जिंदगियां बचा चुके हैं लेकिन न तो उन्हें अब तक कोई पहचान मिली है और न ही उनका कहीं कोई सम्मान हुआ है।

आगरा में यमुना नदी के तट पर बने पोइया घाट पर केंद्रीय जल आयोग के निगरानी स्टेशन पर कार्यरत चंद्रा कहते हैं, ''मैं हर बार जब किसी डूबते व्यक्ति को बचाने के लिए नदी में कूदता हूं तो अपनी जान जोखिम में डालता हूं, लेकिन वास्तव में मुझे इसकी कोई परवाह नहीं है। मैं जीवन के लिए संघर्ष कर रहे लोगों को बचाने पर अपना ध्यान केंद्रित रखता हूं।'' कमजोर और थके हुए 55 वर्षीय चंद्रा को कोई पछतावा नहीं है।

उन्होंने कहा, ''मैं जो करता हूं, वह मेरे काम की आवश्यकता है। मुझे ईश्वर ने इसके लिए नियुक्त किया है। मुझे उसी से ऊर्जा मिलती है और वही मुझसे मशीन की तरह काम करवाता है। मैं ऐन मौके पर विभिन्न नदियों के भंवरों और गहरे पानी से लोगों को बाहर निकाल लाता हूं। लेकिन पहचान और पुरस्कार एक व्यक्ति के अहम को तुष्ट करते हैं और प्रेरक साबित होते हैं।'' उन्होंने कहा कि उनके पास डूब रहे व्यक्ति से साथ सुरक्षित लौटने की एक मानक तकनीक है।

उन्होंने कहा, ''सामान्यतौर पर मैं पूरी ताकत के साथ पानी में अपने लिए रास्ता बनाता हूं और फिर उस व्यक्ति को जोर लगाकर निकालकर ले आता हूं। कभी-कभी डूबने वाला व्यक्ति आपको बुरी तरह पकड़कर आपकी जान खतरे में डाल देता है। इसके बाद आपको उसे गहरे पानी की ओर धकेलना पड़ता है तब वह तुरंत आपको मुक्त कर देता है।''

उन्होंने कहा, ''मैं अपनी नजर के सामने किसी को डूबता नहीं देख सकता। चम्बल, गंगा, यमुना, खारी व बनास. जहां कहीं भी मेरी तैनाती हुई है, वहां मैंने लोगों को बचाया है। जब कोई मेरे प्रति कृतज्ञता व्यक्त करता है कि उसका जीवन बचाने में मैं सहयोगी रहा, तो मुझे इससे बहुत संतुष्टी मिलती है।''

चंद्रा की यात्रा 1979 में राजस्थान के चित्तौड़ से शुरू होती है। उन्होंने बताया, ''जल आयोग का एक अधिकारी नदी में डूब रहा था। जब मैंने देखा, तो मैं तुरंत नदी में कूद गया और उन्हें मौत के जबड़ों से सुरक्षित बाहर निकाल लाया।''

इस घटना को करीब 200 लोग देख रहे थे। इसके बाद चंद्रा को उदयपुर में आयोग में एक अस्थायी कर्मचारी का काम मिल गया। चंद्रा ने लाइफगार्ड के तौर पर अपनी जिंदगी में अब तक 50 लोगों की जानें बचाई हैं। लेकिन वह 1993 की एक घटना को कभी नहीं भूल पाते, तब वह आगरा की यमुना नदी में दो बच्चे को डूबने से नहीं बचा सके थे।

साल 1995 में चम्बल नदी को पार कर रहे एक ट्रैक्टर का संतुलन बिगड़ा और उसमें सवार 35 से ज्यादा लोग डूब गए। चंद्रा ने इनमें से नौ की जान बचा ली थी। उन्होंने कहा, ''यदि मेरे इन कामों के लिए मुझे राज्य या केंद्र सरकार का कोई पुरस्कार मिले तो मुझे खुशी व संतुष्टी होगी और मेरे उदाहरण से अन्य लोग भी ऐसा करने के लिए प्रेरित होंगे।''

चंद्रा ने कहा, ''समय के साथ मेरा शरीर बूढ़ा हो रहा है लेकिन मेरी आत्मा कमजोर नहीं हुई है, उसमें अब भी जोश है। जब भी नदियों के किनारों पर कोई मेला लगता है या पूजा होती है तो मेरी नजर पानी पर लगी रहती है और देखती रहती है कि कहीं कोई डूब तो नहीं रहा है। पुलिसकर्मी भी मेरे पास आकर मुझसे मेलों के आसपास रहने के लिए कहते हैं।''

 
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