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अनाज घोटाले में अफसरों के फंसने से कई बेचैन
First Published:17-05-12 01:25 AM
बलिया। निज संवाददाता। करोड़ो के खाद्यान्न घोटाले में कई अफसरों के फंसने की खबर ने कइयों की नींद उड़ा दी है। जिले में संबंधित विभागों के कर्मचारियों के साथ-साथ खाद्यान्न माफिया भी डरे-सहमे हुए हैं। उन्हें गाज गिरने का डर सता रहा है। आलम यह है कि कई विभागों के अधिकारी व कर्मचारी लखनऊ में अपने संबंधियों से संपर्क कर पता लगाने की कोशिश करते रहे कि अनाज घोटालेबाजों की सूची में उनका नाम है या नहीं।
ईओडब्ल्यू की दो सदस्यीय टीम एक माह से जिले में अनाज घोटाले से जुडेम् मामले की जांच कर रही है। घोटाले के खुलासे के बाद कई बार जांच एजेंसियां बदली गयीं। आखिरकार 43 मुकदमों की जांच ईओडब्ल्यू व आठ मुकदमों की जांच सीबीआई को सौंपी गयी। अनाज घोटाले की जांच की निगरानी हाईकोर्ट ने शुरू कर दी।
उधर, ईओडब्ल्यू की ओर से 21 में 14 मामलों में अभियोजन की सरकार से स्वीकृति मिलने के बाद विभिन्न विभागों में हड़कम्प मच गया। वर्ष 2002 से 2005 के बीच नौ सीडीओ आये। उन सबके अनाज घोटाले में फंसने की खबर से खाद्यान्न माफियाओं ने मोबाइल फोन बंद कर दिया।
जिले में एक माह से ईओडब्ल्यू के इंस्पेक्टर प्रेमपाल सिंह व आदिवासी टीम विभिन्न मामले की जांच कर रही है। फंसने वाले अधिकारियों में तत्कालीन जिलाधिकार उमेश चंद किरण भी हैं जिन्होंने वर्ष 2002 में 18 दिन तक सीडीओ का चार्ज लिया था। एडीएम जेबी सिंह वर्ष 2003 में एक माह व सीआरओ दीनानाथ पटवा वर्ष 2004 में दो माह तक सीडीओ रहे।
इनसेट2005 में हुआ था घोटाले का खुलासा
बलिया। करोड़ों के अनाज घोटाले का खुलासा वर्ष 2005 में तब हुआ जब तत्कालीन परियोजना निदेशक रवि कुमार को खाद्यान्न के एक ठेकेदार ने कार्यालय में ही थप्पड़ जड़ दिया था। इसके बाद श्री कुमार ने तत्कालीन ग्राम्य विकास आयुक्त राजीव कुमार से शिकायत कर बताया जिले में एसजेआरवाई में बड़े पैमाने पर लूट-खसोट जारी है।
अधिकारियों पर दबाव बनाकर रोजाना खाद्यान्न घोटाला किया जा रहा है। इस शिकायत पर आयुक्त राजीव कुमार जिले में धमक गये और एक सप्ताह तक रहकर उन्होंने पूरे मामले की छानबीन की। इसके बाद अपनी रिपोर्ट सरकार के पास भेजी। शासन ने घोटाले की जांच की जिम्मेदारी सीबीसीआईडी को सौंपी।
सीबीसीआईडी ने 17 थानों में 51 एफआईआर दर्ज कराते हुए जांच शुरू कर दी। आरोपितों में कई सीडीओ, परियोजना निदेशक, बीडीओ, एसडीएम, डीएसओ, ब्लाक प्रमुख, प्रधान, कोटेदार, ट्रांसपोर्टर, ग्राम पंचायत सचिव समेत हजारों शामिल थे।
सीबीसीआईडी की जांच को लेकर जिले में हो-हल्ला मचने पर शासन ने जांच की जिम्मेदारी ईओडब्ल्यू को दे दी। इस बीच, वर्ष 2007 में प्रदेश की सत्ता में परिवर्तन हो गया। वर्ष 2007 में मुख्यमंत्री ने अनाज घोटाले की जांच की जिम्मेदारी एसआईटी को दी।
अधिकारियों ने शासन को अवगत कराया कि मामला कई प्रदेशों के अलावा केन्द्र सरकार से जुड़ा है। लिहाजा, इसकी जांच सीबीआई से करायी जाये। इस दौरान घोटाले का मामला हाईकोर्ट भी पहुंचा। इसकी सीबीआई जांच का भी निर्देश दिया गया।
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