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मलबे से तीन और शव बरामद, तीन और गिरफ्तारियां
जालंधर, एजेंसी
First Published:22-04-12 07:45 PM
दुखियारी चंद्रावती को क्या मालूम था कि बाल बच्चों की पढ़ाई लिखाई और घर की आर्थिक स्थिति बेहतर बनाने के लिए काम की तलाश में पंजाब आया उसका पति भगवानदास अब उसे कभी नहीं मिलेगा।
यदि उसे यह पता होता तो वह कभी अपने पति को यहां न आने देती। बेचारी पिछले छह दिनों से शीतल विज फैब्रिक्स की मलबे के पास खड़ी होकर अपने सुहाग की जिंदगी की भगवान से भीख मांगती रही लेकिन उसे मौत के क्रूर हाथों ने उसके पति को लील लिया।
उसके बच्चे बिलख-बिलख कर रो रहे हैं और वे नहीं जानते कि अब उनका पिता उन्हें कभी नहीं मिलेगा। इस भयंकर हादसे की खबर सुनकर मंटू राम का दादा पतलूराम छह दिनों से अपने पोते को ले जाने के लिए बिहार के छपरा से आया हुआ है लेकिन रविवार को बूढे़ को पोता तो नहीं मिला उसका शव जरूर मिल गया। बदहवास बूढ़ा कुछ भी कह पाने की हालत में नहीं है। मंटू (21) और भगवानदास (35) (उत्तरप्रदेश के मेहराजगंज) दोनों के शव रविवार सुबह मलबे के ढेर से मिले। बुरी हालत मिले इन शवों से बदबू आनी शुरू हो गई है। प्रशासन ने कल तक 24 शवों के मिलने की पुष्टि कर दी थी। सिविल अस्पताल में पहुंचे इन शवों को पोस्टमार्टम किया गया। राहत तथा बचाव कार्य युद्ध स्तर पर होने के बावजूद अभी भी मलबे को आठ दिन बाद भी पूरी तरह नहीं उठाया जा सका है। मलबा स्थल से दुर्गन्ध चारों ओर फैल गई है। उद्योगपति शीतल विज की रिमांड अवधि कल तक है। वह पहले तो पूछताछ के दौरान मजदूरों की संख्या बताने में आनाकानी कर रहा है। बाद में उसने कबूल किया कि घटना के समय मौजूद मजदूरों की संख्या करीब सौ थी। उधर इस हादसे के लिए जिम्मेदार मालिक शीतल विज, उसके पुराने ठेकेदार सरवन सिंह के अलावा रविवार को तीन और को भी गिरफ्तार कर लिया गया। इनमें ठेकेदार राम सिंह, हंसराज और जेसीबी मशीन का ऑपरेटर जगदीश कुमार है। राहत तथा बचाव कार्य युद्ध स्तर पर जारी है। सेना से लेकर अन्य सभी जवान तथा गैर सरकारी संगठनों के वॉलंटियर्स राहत कार्यों में जुटे हैं लेकिन अब कोई जिंदा नहीं बचा
है। राहत कार्य में जुटे जवानों को दुर्गन्ध में काम करने में दिक्कतें पेश आ रही हैं। जालंधर मंडल के आयुक्त अनुराग वर्मा की अध्यक्षता में बनीं जांच समिति रिपोर्ट तैयार करने में जुटी है तथा सारा रिकॉर्ड खंगाला जा रहा है ताकि दोषी को सजा मिल सके और कोई भी उद्योगपति अवैध धंधा फिर करने की हिमाकत न कर सके।
उसके बच्चे बिलख-बिलख कर रो रहे हैं और वे नहीं जानते कि अब उनका पिता उन्हें कभी नहीं मिलेगा। इस भयंकर हादसे की खबर सुनकर मंटू राम का दादा पतलूराम छह दिनों से अपने पोते को ले जाने के लिए बिहार के छपरा से आया हुआ है लेकिन रविवार को बूढे़ को पोता तो नहीं मिला उसका शव जरूर मिल गया। बदहवास बूढ़ा कुछ भी कह पाने की हालत में नहीं है। मंटू (21) और भगवानदास (35) (उत्तरप्रदेश के मेहराजगंज) दोनों के शव रविवार सुबह मलबे के ढेर से मिले। बुरी हालत मिले इन शवों से बदबू आनी शुरू हो गई है। प्रशासन ने कल तक 24 शवों के मिलने की पुष्टि कर दी थी। सिविल अस्पताल में पहुंचे इन शवों को पोस्टमार्टम किया गया। राहत तथा बचाव कार्य युद्ध स्तर पर होने के बावजूद अभी भी मलबे को आठ दिन बाद भी पूरी तरह नहीं उठाया जा सका है। मलबा स्थल से दुर्गन्ध चारों ओर फैल गई है। उद्योगपति शीतल विज की रिमांड अवधि कल तक है। वह पहले तो पूछताछ के दौरान मजदूरों की संख्या बताने में आनाकानी कर रहा है। बाद में उसने कबूल किया कि घटना के समय मौजूद मजदूरों की संख्या करीब सौ थी। उधर इस हादसे के लिए जिम्मेदार मालिक शीतल विज, उसके पुराने ठेकेदार सरवन सिंह के अलावा रविवार को तीन और को भी गिरफ्तार कर लिया गया। इनमें ठेकेदार राम सिंह, हंसराज और जेसीबी मशीन का ऑपरेटर जगदीश कुमार है। राहत तथा बचाव कार्य युद्ध स्तर पर जारी है। सेना से लेकर अन्य सभी जवान तथा गैर सरकारी संगठनों के वॉलंटियर्स राहत कार्यों में जुटे हैं लेकिन अब कोई जिंदा नहीं बचा
है। राहत कार्य में जुटे जवानों को दुर्गन्ध में काम करने में दिक्कतें पेश आ रही हैं। जालंधर मंडल के आयुक्त अनुराग वर्मा की अध्यक्षता में बनीं जांच समिति रिपोर्ट तैयार करने में जुटी है तथा सारा रिकॉर्ड खंगाला जा रहा है ताकि दोषी को सजा मिल सके और कोई भी उद्योगपति अवैध धंधा फिर करने की हिमाकत न कर सके।
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