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बिहार में रणवीर सेना के संस्थापक ब्रह्मेश्वर मुखिया की अज्ञात हमलावरों ने शुक्रवार तड़के गोली मारकर हत्या कर दी। अपराधियों ने उनके शरीर में लगभग 40 गोलियां दागी।
ब्रह्मेश्वर मुखिया की हत्या, बिहार में फिर शुरू हो सकता है खूनी संघर्ष!
नई दिल्ली, एजेंसी
First Published:01-06-12 05:27 PM
Last Updated:01-06-12 05:27 PM
रणवीर सेना के प्रमुख ब्रह्मेश्वर मुखिया की हत्या के बाद बिहार में एक बार फिर से खूनी संघर्ष शुरू होने की आशंका घिरने लगी है। आरा जिले में मुखिया की हत्या के बाद 80 के दशक में जो खूनी खेल ठाकुर और नक्सलियों में शुरु होकर 90 तक चला था, उस जातीय युद्ध के बीज अब फिर से पकने लगे हैं।
राज्य में 90 के दशक में हुए कई नरसंहारों में रणवीर सेना का हाथ माना जाता है। हाल ही में ब्रह्मेश्वर सिंह को बथानी टोला नरसंहार मामले में बाइज्जत बरी कर दिया गया था। हालांकि हाई कोर्ट के इस फैसले की कड़ी आलोचना हुई भी थी।
जानकारों का कहना है कि ब्रह्मेश्वर की हत्या बथानी में किए गए नरसंहार का बदला है। ब्रह्मेश्वर सिंह मुखिया बिहार का जाना माना नाम है और वो रणवीर सेना के कारण चर्चा में आए थे। कई संगीन अपराधों में शामिल सिंह को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। वह हाल ही में जेल से रिहा हुये थे।
जेल से निकलने के साथ ही किसानों के लिए एक संगठन की स्थापना भी की थी जो किसानों के हित के लिए संघर्ष करता। लेकिन मुखिया की हत्या की इस घटना के बाद से ये भी कयास लगाए जा रहे हैं कि कहीं फिर से बिहार में खूनी संघर्ष का दौर ना शुरू हो जाए।
उधर बथानी नरसंहार में बरी किए जाने के खिलाफ माले भी लगातार धरना प्रदर्शन कर रहा था। आरा में पिछले 26 मई से धरना पर बैठे माले के पूर्व विधायक सुदामा प्रसाद को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है। पुलिस ने ये कदम उनकी सुरक्षा के कारण उठाया है।
जानिए आखिर कौन थे ब्रह्मेश्वर मुखिया!
बिहार की जातिगत लड़ाइयों का एक चर्चित चेहरा थे ब्रह्मेश्वर मुखिया। बिहार राज्य में एक वक्त ऐसा आया जब नक्सली संगठनों और बड़े किसानों के बीच खूनी लड़ाई का दौर चल पड़ा। इस दौरान ही ब्रह्मेश्वर मुखिया ने अपने नेतृत्व में अपनी एक सेना बनाई थी।
सितंबर 1994 में ब्रह्मेश्वर मुखिया के नेतृत्व में जो सगंठन बना उसे रणवीर सेना का नाम दिया गया। ब्रह्मेश्वर मुखिया ने ऊंची जाति के जमींदारों की प्राइवेट आर्मी रणवीर सेना की शुरुआत की थी।
1994 से लेकर 2002 तक करीब 250 लोगों की हत्या के 22 मुकदमें का मुख्य आरोपी ब्रह्मेश्वर मुखिया को सबूतों के अभाव में कुछ दिन पहले ही जमानत दी गई थी।
ब्रह्मेश्वर मुखिया पर सबसे पहले अपने ही गांव खोपिरा में रक्तपात करने का आरोप लगा था। उसके बाद 2002 तक तकरीबन 22 बार दलितों और पिछड़ों को मौत के घाट उतारने का आरोप लगाया गया।
इन आरोपों को जांच के लिए लिए जो अमीरदास आयोग बनी थी उसे जनवरी 2006 में भंग कर दिया गया था। अमीरदास आयोग का गठन तत्कालीन राजद सरकार ने रणवीर सेना पर लगे आरोपों की जांच करने के लिए किया था।
बिहार में ब्रह्मेश्वर मुखिया ने वर्ष 1994 के अंत में रणवीर सेना का गठन किया था। इस सेना पर 29 अप्रैल 1995 को भोजपुर जिले के संदेश प्रखंड के खोपिरा में पहली बार कहर बरपाने का आरोप लगा।
आरोप था कि इस दिन ब्रह्मेश्वर मुखिया की मौजूदगी में रणवीर सेना ने 5 दलितों की हत्या कर दी थी। इसके करीब 3 महीने बाद रणवीर सेना ने भोजपुर जिले के ही उदवंतनगर प्रखंड सरथुआं गांव में 25 जुलाई 1995 को 6 लोगों की गोली मारकर हत्या कर दी गई।
7 फरवरी 1996 को रणवीर सेना ने एक बार फिर भोजपुर जिले के चरपोखरी प्रखंड के चांदी गांव में हमला कर 4 लोगों की हत्या कर दी। इसके बाद 9 मार्च 1996 को भोजपुर के सहार प्रखंड के पतलपुरा में 3, 22 अप्रैल 1996 को सहार प्रखंड के ही नोनउर नामक गांव में रणवीर सेना ने 5 लोगों की हत्या कर दी। 29 अप्रैल 1995 से लेकर 25 मई 1996 तक के बीच रणवीर सेना ने कुल 38 लोगों की हत्या कर दी।
11 जुलाई 1996 के दिन रणवीर सेना ने भोजपुर जिले के सहार प्रखंड के ही बथानी टोला नामक दलितों और पिछड़ों की बस्ती पर हमला बोलकर 21 लोगों की गर्दन रेतकर हत्या कर दी।
वर्ष 1997 में रणवीर सेना ने भोजपुर जिले के बाहर कदम रखा और 31 जनवरी 1997 को जहानाबाद के मखदूमपुर प्रखंड के माछिल गांव में 4 दलितों की हत्या कर दी। इस घटना के बाद रणवीर सेना ने पटना जिले के बिक्रम प्रखंड के हैबसपुर नामक गांव में 10 लोगों की हत्या कर दी। इस घटना को रणवीर सेना ने 26 मार्च 1997 को अंजाम दिया।
रणवीर सेना ने 31 दिसंबर 1997 को रणवीर सेना ने जहानाबाद के लक्ष्मणपुर-बाथे नामक गांव में एक साथ 59 लोगों की निर्मम हत्या कर दी। यह बिहार में हुआ अब तक का सबसे बड़ा सामूहिक नरसंहार है।
25 जनवरी 1999 को रणवीर सेना ने जहानाबाद में एक और बड़े नरसंहार को अंजाम दिया। जहानाबाद के अरवल प्रखंड के शंकरबिगहा नामक गांव में 23 लोगों की हत्या कर दी गई।
इसके बाद 10 फरवरी 1999 को जहानाबाद के नारायणपुर में 12, 21 अप्रैल 1999 को गया जिले के बेलागंज प्रखंड के सिंदानी नामक गांव में 12, 28 मार्च 2000 को भोजपुर के सोनबरसा में 3, नोखा प्रखंड के पंचपोखरी में 3 और 16 जून 2000 को रणवीर सेना ने औरंगाबाद जिले के गोह प्रखंड के मियांपुर गांव में 33 लोगों की सामूहिक हत्या कर दी, इसमें 20 महिलाएं, 4 बच्चे और केवल 9 वयस्क पुरुष थे।
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टिप्पणियाँ
टिप्पणियॉ पढ़े(10)
मुखिया जी की हत्या से सोया शेर एक बार फिर से जग गया शेर कितनो की बलि लेगा ये आने वाला वक़्त ही बताएगा
By choolbool baba (3rd-June-2012 01:48:PM)
रक्तपात बुरा होता है मानवता , प्यार ,कहा है
शांति से जीवन का आनंद लो दुसरे के बारेमे सोचो तो खुद को भी सुख से भरा जीवन मिले गा आदमी वो होता है जो दुर्बल की रक्षा करता है
न की उसकी कमजोरी का फायदा उठता
By kailash (3rd-June-2012 12:59:PM)
ये तो होना ही था,व्यक्तिगत या जातिगत स्वार्थ सामाजिक स्वार्थ से उपर नहीं हो सकते|समाज उसका दंड तो देगा ही|यही हुआ|यह एक तरह से सामंतवाद पर चोट है,वैसे तो यह बिहार में दम तोड़ चुकी है|यह शायद आखिरी किल साबित हो|
By R K (2nd-June-2012 05:58:PM)
कमाल हो गया रणवीर सेना के खिलाफ कोई बोलने के लिए तक तैयार नहीं है एक दरिंदा जो अभी तक जिन्दा रहा और अब वो मर गया तो लोगों को दुःख हो रहा है वास्तव में इस देश का नाश जातिवाद ने किया है और लोगों को मानसिक गुलाम भी इसी जातिवाद ने बनाया है और फिर भी लोग उन लोगों का समर्थन कर रहे हैं जो जातिवाद की मानसिकता से गरीब और मजदूर लोगों की हत्याएं कर या करा रहे हैं
By ck (2nd-June-2012 03:35:PM)
इस स्टोरी मैं बारा और सेनारी जैसे नरसंहारों की कोई चर्चा नहीं है पूरा गावं का गांव कट देते थे ,तब की सर्कार सोई जी ने अन्याय के खिलाफ आवाज उठाई ने जब मुखिया जी को दोसी नहीं माना तब लेखक को इस प्रकार की टिप्णी
By rupesh kumar (2nd-June-2012 01:21:AM)
ये समय सयंम का है शांति व्यवस्था बनाए रखना हुआ वो दुर्भाग्यपूर्ण है इसमें कोई दो राय नहीं हमे कभी भी संयम नहीं खोना
By abhishek (1st-June-2012 11:31:PM)
"लाल सलाम " जिंदाबाद
By Laal Salaam (1st-June-2012 11:00:PM)
jisne bhi ye kia hai wo nhi bachega aur ranvir sena koo bihar me fir se aana
By abhishek (1st-June-2012 09:24:PM)
वो उसी सजा का हक़दार था
By UDAY GUPTA (1st-June-2012 06:35:PM)
जैसी करनी वैसा फल मिल ही गया यही प्रकृति का नियम है
By jahir muhammad (1st-June-2012 05:45:PM)
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