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मानसून के साथ बढ़ा मच्छरों का आतंक
गुड़गांव। वाचस्पति उपाध्याय
First Published:04-08-12 09:12 PM
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स्वास्थ्य विभाग की तैयारियों पर मच्छरों का आतंक भारी पड़ने लगा है। मानसून आने के बाद पहले पखवाड़े में ही मलेरिया के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ी है। इस साल अभी तक मलेरिया के 103 मामले व डेंगू के तीन मामले सामने आ चुके हैं। जबकि साल 2011 में अगस्त के पहले हफ्ते तक मलेरिया के 94 मामले सामने आये थे।

मलेरिया की रोकथाम से लेकर इससे निपटने की जिम्मेदारी भी स्वास्थ्य विभाग की है। फॉगिंग यानी दवा के छिड़काव का काम पहले निगम के जरिए होता था लेकिन अब स्वास्थ्य विभाग को ही करना है। अगले कुछ महीनों तक मच्छरों के आतंक से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग को मुस्तैद रहने की जरूरत है। लेकिन अधूरी तैयारियों व स्वास्थ्य कर्मचारियों की कमी के चलते स्वास्थ्य विभाग के लिए इस चुनौती से निपटने की राह आसान नहीं लग रही। जिला मलेरिया अधिकारी डॉक्टर महेंद्र गुप्ता ने बताया कि मानसून आने के बाद से मच्छरों का प्रकोप बढ़ा है। और पिछले साल की तुलना में अभी तक मलेरिया के संक्रमण की दर में इजाफा हुआ है।

उन्होंने बताया कि मलेरिया का सबसे ज्यादा संक्रमण जुलाई से अक्टूबर तक होता है। मलेरिया का एक मच्छर 11000 लोगों को बीमार कर सकता है। जिला मलेरिया अधिकारी के अनुसार विभाग की प्राथमिकता मलेरिया से होने वाली मौतों और संक्रमण को रोकना होता है। उन्होंने बताया कि संक्रमण बढ़ने के लिए कई बार तो मरीज स्वयं जिम्मेदार होते हैं। मरीज 14 दिनों का पूरा कोर्स नहीं करते। तीन-चार दिनों तक दवा लेकर छोड़ देने से संक्रमण का खतरा और बढ़ जाता है।

दोबारा बुखार आने पर उसे काबू करने में अधिक वक्त लगता है। पीएफ मलेरिया के लिए 14 दिनों का पूरा इलाज आवश्यक है। बीच में इलाज छोड़ने पर मस्तिष्क ज्वर होने का खतरा बढ़ जाता है। सही समय में इलाज न करवाने पर मरीज की मौत भी हो सकती है।

अधूरे ही हैं सरकारी इंतजाम-
पिछले साल मलेरिया के 530 व डेंगू के 156 मामले सामने आए थे। ज्यादातर मामले मानसून व उसके बाद तेजी से बढ़ते हैं। मलेरिया व डेंगू से निपटने के लिए 120 मल्टीपरपज हेल्थ वर्करों की भर्ती की बात की गई। लेकिन पिछले माह नियुक्त किये गये अस्थाई 35 हेल्थ वर्करों को ही सभी विभागों का कार्य देखना होता है। बीस लाख की आबादी वाले जिले के लिए हेल्थ वर्करों व हेल्थ सुपरवाईजरों की मौजूदा संख्या 100 ही है। शहर में नालियां, खुले सीवर व जलजमाव भी मलेरिया के लार्वा की वजह बन रहे हैं। इसके लिये भी पर्याप्त इंतजाम नहीं हुए हैं। 

केवल एक इंसेक्ट कलेक्टर-
इंसेक्ट कलेक्टर विभिन्न जगहों व घरों में जाकर मलेरिया और डेंगू के मच्छरों की पहचान करता है। इसकी सूचना के आधार पर ही विभाग फॉगिंग आदि की कार्रवाई करता है। गुड़गांव शहर के लिए केवल एक इंसेक्ट कलेक्टर है जो पिछले कई सालों से अकेले ही यह कार्य कर रहा है। जबकि नियमानुसार विभाग में सात इंसेक्ट कलेक्टर होने चाहिये। नियमों के अनुसार एक इंसेक्ट कलेक्टर को 10 स्थानों पर जाना होता है। लेकिन वर्तमान इंसेक्ट कलेक्टर काम को अतिरिक्त बोझ के कारण 35 से 40 जगहों पर जाना पड़ता है। जिला मलेरिया अधिकारी ने बताया कि विभाग ने इस पद पर छह नियुक्तियों के लिये प्रस्ताव भेजा है।

अधिकारियों ने बताया- सिविल अस्पताल के सीएमओ प्रवीण गर्ग का कहना है कि हम उपलब्ध संसाधनों के साथ मलेरिया व डेंगू से निपटने व लोगों को जागरूक बनाने का पूरा प्रयास करेंगे। नगर निगम के सीएमओ वी के थापर का कहना है कि फॉगिंग के लिए आवश्यक मशीनरी सिविल अस्पताल प्रबंधन को मुहैया करा दी गई है। मोबाइल के जरिए संदेश भेजने की प्रक्रिया की भी जल्द पहल होगी।

103 मामले मलेरिया के आ चुके हैं सामने
94 मामले ही अगस्त के पहले हफ्ते तक आए थे पिछले साल
530 कुल मलेरिया के मामले आए थे पिछले साल
11 हजार लोगों को बीमार करने में एक मच्छर सक्षम
14 दिनों तक लेनी होती है मलेरिया की दवा 

 
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