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कुलपति-शिक्षक संघ के बीच गतिरोध दूर करने की कवायद
नई दिल्ली, एजेंसी First Published:13-12-12 12:11 PM

मानव संसाधन विकास मंत्री के रूप में एम एम पल्लम राजू के कार्यभार संभालने के साथ डीयू के कुलपति और शिक्षक संघ के बीच गतिरोध को समाप्त करने के प्रयास फिर से शुरू हो गए है और समझा जाता है कि राजू ने कुलपति दिनेश सिंह से शिक्षक संघ से बातचीत करने को कहा है।

इसी सिलसिले में डीयू के एकेडेमिक फार एक्शन एंड डेवेलपमेंट (एएडी) का एक शिष्टमंडल बुधवार को कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मिला।

इससे पहले डूटा के शिष्टमंडल ने मानव संसाधन विकास मंत्री पल्लम राजू से मुलाकात की थी। राजू ने कहा था कि डीयू में सुधार से जुड़ी नयी पहल को आगे बढ़ाया जाना चाहिए लेकिन आमसहमति के साथ। एएडी के अध्यक्ष डां आदित्य नारायण मिश्रा ने कहा कि कल सोनिया गांधी से मुलाकात के दौरान शिष्टमंडल ने उन्हें डीयू से जुड़ी विभिन्न समस्याओं से अवगत कराया।

उन्होंने कहा कि दिल्ली विश्वविद्यालय के विभिन्न कालेजों में 4,000 पद रिक्त है और डीयू के विभिन्न विभागों में 600 पद खाली है। युवा शिक्षक अस्थायी तौर पर काम कर रहे और शिक्षकों की नियुक्ति से जुड़ी सेवा शर्तों के बारे में यूजीसी की सिफारिशों से जुडी फाइल मंत्रालय में लंबित हैं। मिश्रा ने कहा कि छठे वेतन आयोग को लागू करने के बारे में भी कई विसंगतियां है जिनका अभी तक समाधान नहीं किया जा सका है। मिश्रा ने कहा कि व्यापक मेधा का ढांचा तैयार करने के लिए एक व्यवस्थित प्रयास करने की जरूरत है और इन सभी विषयों के बारे में सोनिया गांधी को बताया गया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष ने इस बारे में पहल करने का आश्वासन दिया।

बहरहाल, डीयू के कुलपति दिनेश सिंह विश्वविद्यालय में सुधार प्रयासों को आगे बढा रहे हैं। उनके पूर्ववर्तियों ने डीयू में सेमेस्टर प्रणाली की पहल की और उसे लागू किया। वहीं वर्तमान कुलपति में मेटा विश्वविद्यालय, मेटा कालेज और चार वर्षीय स्नातक कोर्स के अपने महात्वाकांक्षी योजना को आगे बढ़ाने में लगे हुए हैं।

सूत्रों ने बताया कि विश्वविद्यालय प्रशासन सभी पक्षों को साथ लेकर सुधार योजना को आगे बढा़ना चाहता है लेकिन परिचर्चा के दौर को लम्बा खींचने का उसका इरादा नहीं है क्योंकि इससे सुधार में मंदी आ जायेगी। जब कपिल सिब्बल के मानव संसाधन विकास मंत्री थे तब उन्होंने डीयू में सुधार योजनाओं का पूरा समर्थन किया। समझा जाता है कि एम एम पल्लम राजू भी सुधार योजना के पक्ष में है लेकिन वह चाहते है कि इस दौरान आम सहमति बनाने के प्रयास किये जाएं।
 
 
 
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